पीजीआई में वेंटिलेटर न मिलने से पांच दिन की बच्ची की मौत
परिजनों का आरोप : डॉक्टर बोले, यहां जन्म होता तो लेते जिम्मेदारी
450 करोड़ के बजट वाले संस्थान में नहीं मिला नवजात को वेंटिलेटर, मौत
- 8 वेंटिलेटर है निक्कू वार्ड में
- 10 वेंटिलेटर हैं पिक्कू वार्ड में
- 12 वेंटिलेटर हैं बच्चों के लिए
- 60 वेंटिलेटर हैं कुल पीजीआईएमएस में
- 12 लाख का खर्च आता है एक वेंटिलेटर में
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय का भले ही 450 करोड़ रुपये का बजट हो, लेकिन यहां की अव्यवस्थाएं अकसर मरीजों के लिए जानलेवा साबित होती हैं। सोमवार को वेंटिलेटर के अभाव में पांच दिन की नवजात बच्ची ने दम तोड़ दिया। हद तो यह है कि परिजनों ने बेटी का शव घर ले जाने के लिए एंबुलेंस मांगी तो वह भी मुहैया नहीं कराई गई।
चरखीदादरी निवासी पिंकी के परिजनों ने बताया कि शनिवार को निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात बच्ची के मुंह में पानी चला गया। इसके चलते उसकी तबीयत बिगड़ गई। निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने बच्ची को पीजीआईएमएस रेफर कर दिया। इस पर वह बच्ची को लेकर पीजीआईएमएस के आपात विभाग में आ गए। मरीज के बारे में डॉक्टरों ने बताया कि उसकी तबीयत अधिक खराब है, उसे वेंटिलेटर की जरूरत अधिक है। उनके पास अभी वेंटिलेटर नहीं है, वह इसके लिए इंतजाम कर लें। इस पर सभी ने डॉक्टर के आगे हाथ जोड़ लिए कि वह निजी अस्पताल का खर्च वहन करने की स्थिति में नहीं है। तो डॉक्टरों ने कहा कि यदि बच्चा उनके यहां जन्म लेता तो वह जिम्मेदारी लेते, लेकिन अब वह प्रयास ही कर सकते हैं। इसके बाद बच्ची को वार्ड 14 में शिफ्ट कर दिया गया। सोमवार को लड़की का पिता जब वार्ड में आया तो देखा कि बच्ची के अंदर जान ही नहीं है। इस बारे में डॉक्टर को बताया तो आधे घंटे बाद डॉक्टरों ने जांच की और उसे मृत घोषित कर दिया।
स्वास्थ्य मंत्री को फोन किया, लेकिन किसी और ने उठाया, नहीं दिया ध्यान
पीड़ित ने बताया कि उन्हें पीजीआईएमएस में वेंटिलेटर नहीं मिला और न ही शव ले जाने के लिए एंबुलेंस दी गई। इसके लिए उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को फोन किया। लेकिन उनका फोन किसी अन्य ने उठाया और उनकी बात पर गौर तक नहीं किया। इसके बाद उन्होंने अपनी लिखित शिकायत चिकित्सा अधीक्षक को दी है।
अमर उजाला की पीजीआईएमएस के एमएस से सीधी बात
सवाल : वार्ड नंबर 14 में एक बच्ची की मौत हुई है। क्या कारण रहे?
एमएस : इस तरह की जानकारी नहीं है।
सवाल : बच्ची को वेंटिलेटर नहीं मिला, क्या वजह रही?
एमएस : वेंटिलेटर खाली होगा तो ही मिलेगा।
सवाल : डॉक्टरों ने कहा कि यहां पैदा होती तो देख लेते, अब कोशिश ही कर सकते हैं, ऐसा क्यों?
एमएस : संस्थान में भर्ती मरीज को जरूरत पड़ने पर बाहर से आए मरीज से पहले वेंटिलेटर दिया जाता है।
सवाल : संस्थान में बच्चों के लिए कितने वेंटिलेटर हैं?
एमएस : संस्थान में 60 वेंटिलेटर हैं। इतने किसी भी पीजीआई में नहीं हैं। इनमें से 12 बच्चों के लिए हैं। यहां मरीज इतने हैं कि 1200 वेंटिलेंटर भी कम पड़ेंगे।
सवाल : पीड़ित परिवार को एंबुलेंस सेवा क्यों नहीं मिली?
एमएस : एंबुलेंस सेवा केवल बीपीएल व जननी सुरक्षा योजना के तहत ही नि:शुल्क दी जाती है। इसके अलावा अन्य केस में शुल्क देना होता है। इस तरह की मेरे पास कोई आवेदन नहीं आया है।
- 60 वेंटिलेटर होने के बाद भी बच्ची को नहीं मिली जिंदगी
60 वेंटिलेटर होने के बावजूद पीजीआई प्रबंधन मासूम की जान बचाने के लिए वेंटिलेटर का प्रबंध नहीं कर सका। पीजीआईएमएस का सालाना बजट करीब 450 करोड़ रुपये होने के बावजूद एक मासूम की जान सिर्फ इस लिए चली गई क्योंकि उसे वेंटिलेटर नहीं मिला।