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बीए की छात्रा ने समाज में लड़कियों के महत्व पर लिखी किताब

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एमए-7 व 8 : किताब लिखने वाली भव्या शौकीन
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भव्या शौकीन द्वारा लिखी गई किताब।
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बीए की छात्रा ने समाज में लड़कियों के महत्व पर लिखी किताब
रोहतक की रहने वाली है किताब लिखने वाली 19 वर्षीय भव्या शौकीन
किताब के माध्यम से दिया संदेश- लड़कियां किसी भी मायने में लड़कोें से कम नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
कहते हैं हुनर और प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। सही मायनों में सफलता की इबारत उम्र से नहीं बल्कि हौसले और मजबूत इरादों से लिखी जाती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है कि रोहतक शहर की बेटी भव्या शौकीन ने। सिर्फ 19 साल की उम्र में ही वह लेखिका बन गई हैं और पहली किताब लिख डाली है। किताब में समाज में लड़कियों के महत्व को दर्शाया गया है। इस किताब में बताया गया है कि लड़कियां आज किसी मायने में लड़कों से कम नहीं हैं।
12 फरवरी 1999 को जन्मी भव्या शौकीन रोहतक की रामगोपाल कॉलोनी की निवासी है। भव्या ने दसवीं कक्षा तक की शिक्षा इंडस पब्लिक स्कूल रोहतक में ग्रहण की। उसके बाद चमन वाटिक स्कूल अंबाला से बारहवीं की परीक्षा पास की। फिलहाल वह वनस्थली विद्यापीठ राजस्थान में बीए इंग्लिश ऑनर्स की छात्रा हैं।
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भव्या ने बताया कि समाज में लड़कियों की स्थिति के बारे में सोचकर उसने एक साल पहले किताब लिखने की सोची। परिवारवालों ने आगे बढ़ने में पूरा सहयोग दिया। अब वह किताब प्रकाशित हो चुकी है। इस किताब का नाम है आई नो इट्स वर्सट। इस किताब के जरिए दर्शाया गया है कि लड़कियों के साथ आज भी दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता है। इस किताब में श्रेया नाम की लड़की की कहानी है, जो बिहार के एक छोटे से गांव में पैदा हुई, जहां लड़कियों को मारा जाता है। गांव वाले लड़कियों के जन्म के खिलाफ हैं, लेकिन पिता किशोर ने गांव वालों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। बेटी को बचाने के लिए गांव छोड़ दिया और अच्छी तरह से पालन पोषण किया। जिसके चलते श्रेया बाद में आईएएस अधिकारी बनी।
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भव्या शौकीन का कहना है कि समाज में आज भी लड़कियों को लड़कों के बराबर नहीं समझा जाता। लड़कियों और लड़कों में अंतर रखा जाता है। हालांकि समाज की सोच में काफी बदलाव भी आया है। इसी की बदौलत लड़कियां हर क्षेत्र में लड़कों से आगे बढ़ रही हैं। इस किताब के जरिए समाज को जागरुक करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। छत्तीसगढ़ के एजुक्रिएशन ने भव्या के सोच को हकीकत में बदलने का काम किया है।
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