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स्टूडेंट्स ओलंपिक के बाद थांग टा चैंपियनशिप के नाम पर खिलाड़ियों से ठगी

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फोटो नंबर 106 व 107
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अमर उजाला एक्सक्लूसिव

स्टूडेंट्स ओलंपिक के बाद अब थांग टा चैंपियनशिप के नाम पर खिलाड़ियों से ठगी
- थांग टा फेडरेशन का प्रमाण पत्र नहीं आत्म रक्षा के गुर ही आएंगे काम
विकास सैनी
रोहतक।
खेलों के नाम पर विद्यार्थियों से ठगी धड़ल्ले से जारी है। हजारों रुपये, बेशकीमती समय और ऊर्जा खर्च करने के बावजूद खिलाड़ियों के हाथ प्रमाण पत्र भी नहीं आ रहा है।
प्रदेश में स्टूडेंट्स ओलंपिक के बाद अब थांग टा चैंपियनशिप के नाम पर खिलाड़ियों से ठगी का मामला सामने आया है। एमडीयू में बुधवार को शुरू हुई चैंपियनशिप में देश के करीब 23 राज्यों के 500 से अधिक खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। खिलाड़ी यहां सात से 10 हजार रुपये खर्च करके प्रमाण हासिल करने पहुंचे हैं। जबकि यह प्रमाण पत्र किसी काम नहीं आएगा। इसकी वजह फेडरेशन के पास खेल की मान्यता नहीं होना है। सरकार से मान्यता के बगैर चैंपियनशिप के प्रमाण पत्र बेकार हैं। यह बात खुद थांग टा फेडरेशन के अधिकारियों ने भी मानी है।
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एक चैंपियनशिप से लाखों की कमाई
खेलों के नाम पर कमाई का खेल बेहद सीलके से चल रहा है। एक-दो नहीं अनेक खेल एसोसिएशन व फेडरेशन ओलंपिक या चैंपियनशिप के नाम पर लाखों की कमाई कर रही है। एमडीयू में चल रही थांग टा चैंपियनशिप के जरिए भी थांग टा फेडरेशन को करीब 40 लाख रुपये की कमाई का अनुमान है। यहां आए 500 से अधिक खिलाड़ियों से आठ हजार रुपये के हिसाब से की गई वूसली से यह राशि आई है। चैंपियनशिप में 90 प्रतिशत मणिपुर व अन्य पहाड़ी इलाकों से है। इनके अभिभावक भी साथ हैं। ऐसे में यह शुल्क और बढ़ जाता है।

क्या है थांग टा फेडरेशन
थांग टा फेडरेशन ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर इसे नेशनल फेडरेशन बताया गया है। यह फेडरेशन थांग टा खेल कराती है। यह एशियन व वर्ल्ड थांग टा फेडरेशन का सदस्य बताई गई है। फेडरेशन राज्यों को भी अपनी सदस्या देती है।

क्या है थांग टा खेल
मार्शल आर्ट कई हिस्सों में खेला जाता है। इसी का एक हिस्सा थांग टा है। आत्म रक्षा के लिए इसे इस्तेमाल किया जाता है। डंडे व किक के साथ खिलाड़ी एक दूसरे पर वार करते हैं। किक या वार के नंबर दिए जाते हैं। प्रतिद्वंद्वी पर किक से किए वार को डंडे पर रोकने या पलट वार करने से अंक कट जाते हैं। यह अंक डंडे से वार करने वाले के खाते में चले जाते हैं। डंडा तलवार का प्रतीक है।

प्रमाण पत्र के लिए आए खेलने
थांग टा चैंपियनशिप में खेलने आए खिलाड़ियों ने बताया कि हरियाणा के रोहतक में 24वीं नेशनल थांग टा चैंपियनशिप की जानकारी मिली थी। इसलिए यहां खेलने आए हैं। नेशनल चैंपियनशिप का प्रमाण पत्र नौकरी दिलाने में सहायक होता है। इस प्रमाण पत्र से खेल कोटे में आवेदन किया जा सकता है। कॉलेज या किसी शिक्षण संस्था में दाखिले में भी रियायत मिलती है। इसीलिए चैंपियनशिप में शामिल हुए। यह प्रमाण पत्र काम नहीं आएगा, इसकी जानकारी नहीं है।

वर्जन :
थांग टा फेडरेशन पिछले कई वर्षों से खेल को प्रोत्साहित कर रही है। यह 24वीं नेशनल चैंपियनशिप है। यहां विभिन्न 23 राज्यों से 500 से ज्यादा खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। पहले यह खेल स्कूल गेम्स में शामिल था। खेल की मान्यता को लेकर प्रयास जारी है।
एच. प्रेम कुमार सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष, थांग टा फेडरेशन।

वर्जन :
हरियाणा में थांग टा खेल पहली बार आया है। यह मूलत: मणिपुर में खेला जाता है। इस भारतीय खेल को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। सरकार से इसे मान्यता दिलाने के लिए पत्राचार किया गया है। इसके बाद इस खेल के प्रमाण पत्रों का खिलाड़ियों को लाभ मिलेगा।
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मदन लाल बागड़ी, हरियाणा सचिव, थांग टा फेडरेशन।

वर्जन :
थांग टा चैंपियनशिप के बारे में अखबार से पता लगा। स्टूडेंट्स ओलंपिक, थांग टा चैंपियनशिप या किसी भी तरह के खेल के लिए सरकार से मान्यता होना जरूरी है। इससे बगैर खेल एसोसिएशन व फेडरेशन की ओर से जारी प्रमाण पत्र बेकार हैं।
निर्मला गुलिया, जिला खेल अधिकारी।
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