प्वाइंट... बुलेट का निकला पांच बार ड्रा, नहीं आए विजेता
नाटकीय अंदाज में बोले मुख्यमंत्री, पिता-पुत्र की उम्र का खुद ही लगा लेना अंदाजा
शैलेश तिवारी
रोहतक।
तृतीय एग्री लीडर समिट-2018 मेले में प्रदेश भर से हजारों किसानों ने मेले के पहले दिन लकी ड्रा कूपन में भाग लिया। तीसरे इनाम के रूप कलानौर खंड के मसूदपुर निवासी 10वीं में पढ़ने वाले 16 वर्षीय कमल को बुलेट मिली। शनिवार का दिन कमल और उसके पिता के लिए खास रहा। कमल ने बताया कि उसे उम्मीद भी नहीं थी मेले के पहले ही दिन बुलेट मिल जाएगी। कलानौर से रोडवेज बस से आए थे उनके घर में कोई भी वाहन नहीं है। गेट नंबर चार पर आते ही कूपन लिया और मेला देखने अंदर चले गए। गांव के लोगों ने कहा कि चल मुख्यमंत्री को देखकर आते हैं। तभी हम सभी मुख्य पंडाल के अंदर आए तो पता कि यहां पर गेट भरे कूपन से लकी ड्रॉ निकाला जा रहा था। एक घंटे बाद मेरे कूपन का भी नंबर बोला गया।
बुलेट का पांच बार निकला गया लकी ड्रा
मंच से मुख्यमंत्री मनोहर लाला खट्टर ने पांच बार बुलेट का लकी ड्रॉ निकाला, लेकिन कोई भी विजेता बुलेट को लेने मंच पर नहीं आया। थोड़ी देर बात बुलेट का दूसरा लकी ड्रा निकाला गया। मुख्यमंत्री जब मंच से लकी कूपन नंबर बोल रहे थे तभी कमल का कूपन नंबर बोला गया। कमल जैसे ही बुलेट की चाबी लेने मंच पर पहुंचा तो मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने नाटकीय अंदाज ने कमल से उसकी उम्र पूछी तो उसने अपनी उम्र 16 साल बतायी तभी सीएम ने कहा कि अपने पिता को बुलाओ। पिता के मंच पर आते ही सीएम ने कहा कि अब आप लोग भी पिता पुत्र की उम्र का अंदाजा लगा लो। सीएम ने मंच से कहा कि बुलेट कौन चलाएगा तो कमल ने कहा बापू। पिता जितेंद्र से सीएम ने कहा कि अभी दो साल और बेटे को बुलेट पर चढ़ने नहीं देना, अभी वह नाबालिग है।
बुलेट तो मिली लेकिन चाबी स्कूटी की
इनाम को घोषणा होने के बाद जब कमल स्टेज पर पहुंचा तो जल्दबाजी में उसे बुलेट की जगह स्कूटी का चाबी सौंप दी गई। मामले का खुलासा तब हुआ जब वह कार्यक्रम समाप्त होने के बाद बुलेट को ले जाने लगा तो उसने बुलेट में चाबी लगाई। आसपास खड़े लोगों ने कमल के पिता जितेंद्र को बताया कि यह चाबी को स्कूटी की मिली है। लेकिन मौके पर कोई भी अधिकारी न होने की वजह से वह बिना चाबी लिए ही वहां से चला गया।
लोगों ने दी बुलेट को कलानौर तक ले जाने की राय
मुख्य पंडाल से बुलेट का बाहर निकालते समय ही आसपास चल रहे लोगों ने अपनी तरह-तरह राय दीं, किसी ने बोला कि बुलेट को रोडवेज पर लाद ले चलें तो कोई बोला बुलेट के लिए छोटा हाथी ही सही होगा। इस दौरान बुलेट विजेता कमल अपने पिता जोगेंद्र के साथ मेला ग्राउंड के पीछे वन सिटी चौक पर पहुंचा वहां पर कई वाहन चालकों को कलानौर तक बुलेट ले जाने के लिए तय किया। लेकिन कोई भी बुलेट को ले जाने के लिए तैयार नहीं हुआ। थक हार कर जितेंद्र ने बुलेट का पैदल ही ले जाना शुरू कर दिया।
जुगाड़ सिस्टम से बुलेट किया स्टार्ट
किसान जितेंद्र बताया कि सिटी वन चौके से बुलेट को करीब दो किलोमीटर तक पैदल ही धक्का मारकर एक मैकेनिक के पास ले गए वहां पर जुगाड़ सिस्टम से बुलेट को स्टार्ट कर कलानौर तक ले गया।
स्कूटी विजेता को एक घंट तक करनी पड़ी चाबी के लिए मशक्कत
रोहतक की सांधी निवासी रेशमा के पति जोगेंद्र ने बताया कि मंच से सीएम साहब ने स्कूटी के चाबी की फोटो के साथ फोटो तो खिंचवा ली लेकिन असली चाबी को लेने में कई घंटे लग गए। पहले मंच पर मौजूद एक अधिकारी से चाबी दिलाने के लिए कहा तो उन्होंने कंपनी के कर्मचारी को चाबी देने के लिए बोल दिया। कंपनी कर्मचारी ने कहा कि स्कूटी का चाबी बुधवार या वीरवार को शोरूम पर आकर ले जाना। एक घंटे मशक्कत के बाद एक अधिकारी ने स्कूटी चाबी दिलवा दी। जोगेंद्र ने बताया कि उससे 8.500 सौ रूपये भी जमा करवाए गए है।
मुख्यमंत्री ने ली रेशमा के पति की चुटकी
मंच पर रेशमा के पति को स्कूटी का चाबी सौंपते समय मुख्यमंत्री ने चुटकी लेते हुए कहा कि जोगेंद्र से कहा कि कहां गई रेशमा कहीं उसकी स्कूटी पर कब्जा न जमा लेना। बातचीत में जोगेंद्र ने बताया कि पत्नी रेशमा बच्चे को लेने स्कूल चली गई है बच्चे का पेपर चल रहा है। मैं यहां पर मेला देख रहा था मुख्य पंडाल में ठंडी हवा लेने के लिए बैठा तभी रेशमा के कूपन का नंबर मुख्यमंत्री ने बोला और स्कूटी मिल गई।