ईएसआई डिस्पेंसरी में महिला चिकित्सक की कमी बढ़ा रही मरीजों पर आर्थिक बोझ
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। ईएसआई डिस्पेंसरी के बीमाधारकों को महिला चिकित्सक की कमी खल रही है। यहां लंबे समय से महिला चिकित्सक न होने से महिला मरीजों का उपचार कराने में आर्थिक बोझ बढ़ गया है। डॉक्टर मरीजों को पीजीआईएमएस रोहतक, जिला अस्पताल रेफर कर रहे हैं।
डिस्पेंसरी में रोजाना 70 से 80 मरीज उपचार के लिए आते हैं। इसमें तकरीबन 20 फीसदी मरीज महिलाएं अपनी समस्या ले कर आती हैं। महिला मरीज सुनीता, अनीता, रज्जो, स्वीटी ने बताया कि महिला डॉक्टर न होने के चलते उन्हें बाहर रेफर कर दिया जाता है। उन्हें पहले ईएसआई डिस्पेंसरी आना होता है, यहां उनकी रेफरल स्लिप बनाई जाती है। इसके बाद वह बाहर अस्पताल में अपनी जांच करवाती हैं और जो डॉक्टर दवा लिखता है उसे लेने के लिए फिर ईएसआई डिस्पेंसरी आना पड़ता है। यह सिलसिला हर बार होता है। इसका परिणाम यह होता है कि वह जांच बाहर कराती हैं और दवा लेने उन्हें ईएसआई डिस्पेंसरी आना पड़ता है। इसके चलते उन पर ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ जाता है। हाउसिंग बोर्ड में डिस्पेंसरी होने के कारण उन्हें चार गुणा अधिक किराया भरना पड़ता है।
मरीजों की क्या है समस्या
ईएसआई के अधिकांश मरीज इंडस्ट्रियल एरिया के हैं। यहां से अशोका चौक आने में कई बार दो बार वाहन बदलने पड़ते हैं। इसके बाद अशोका चौका से हाउसिंग बोर्ड का वाहन लेना पड़ता है। इसके चलते एक मरीज को एक बार में अकेले ईएसआई अस्पताल आने-जाने में 80 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यहां नियमानुसार दवा तीन दिन की ही दी जाती है। कई बार तो दवा से अधिक मरीज को किराया भरना पड़ता है।
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हमारे पास डिस्पेंसरी में तीन डॉक्टर हैं। महिला डॉक्टर के लिए अधिकारियों को लिखा गया है। हमारे पास जो दवा होती है वह मरीज को उपलब्ध कराते हैं, नहीं तो मरीज का बिल पास कर दिया जाता है।
-डॉ. भामिक कादियान, प्रभारी एवं वरिष्ठ डॉक्टर, ईएसआई डिस्पेंसरी रोहतक।