सरहद पर गए सैनिक की बेटी के मौत के मामले में चार माह बाद भी कार्रवाई नहीं
पीजीआई डॉक्टर को नौकरी से भी निकाल चुकी, कार्रवाई के लिए पुलिस को अब भी रिपोर्ट का इंतजार
- परिवेदना समिति की मीटिंग में आए कृषि मंत्री बोले, अगली मीटिंग में दे डीएसपी कार्रवाई रिपोर्ट
- डीसी पीजीआई प्रबंधन से पूछें, एक मरीज को अटेंड करने में कितना लग रहा समय
- अगस्त माह में पीजीआई में हो गई थी 9 माह की बच्ची की मौत
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
एक तरफ जहां एक सैनिक सरहद पर जान की बाजी लगा रहा है, दूसरी तरफ इलाज के अभाव में उसकी 9 माह की बेटी उपचार के अभाव में दम तोड़ देती है। व्यवस्था की नाकामी का आलम यह है कि पीजीआई मामले में एक डॉक्टर को नौकरी से भी निकाल चुका है, लेकिन पुलिस को चार महीने बाद भी कार्रवाई के लिए पीजीआई की रिपोर्ट का इंतजार है। परिवेदना समिति की मीटिंग में आए कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने हैरानी जताते हुए डीएसपी से अगली मीटिंग में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। साथ ही डीसी डाक्टर यश गर्ग को हिदायत दी है कि वे पीजीआई प्रबंधन से पूछे कि एक मरीज को इमरजेंसी में अटेंड करने में कितना समय लगता है।
परिवेदना समिति की सूची में शामिल चौथे नंबर पर बहुअकबरपुर निवासी लांस नायक अनिल कुमार ने शिकायत दी थी कि 26 अगस्त को नौ महीने की उसकी बेटी अवनी को उसकी मां व चाचा तबीयत बिगड़ने पर पीजीआई की इमरजेंसी ले गए। यहां डॉक्टर ने बगैर जांच किए व देखे ही दवा लिख कर उसे घर भेज दिया। रास्ते में बच्ची की तबीयत और बिगड़ने पर परिवार उसे दोबारा पीजीआई लाया गया। वहां पर बच्ची ने दम तोड़ दिया। बच्ची को मृत घोषित करने के बाद परिजनों ने आपत्ति जताते हुए पुलिस में शिकायत दी। पुलिस ने मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। पीजीआई प्रशासन ने एक्शन लेते हुए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की। इसने डॉक्टरों को दोषी मानते हुए सजा का हकदार बताया। इसके चलते पीजीआई प्रशासन ने इंटर्न की अनुपस्थिति लगाई। पीजी स्टूडेंट को एक महीने के लिए सस्पेंड किया गया। सीनियर रेजिडेंट को नौकरी से निकाल दिया गया। नौकरी से निकाले जाने पर डॉक्टर हाई कोर्ट पहुंचा और खुद निर्दोष बताते हुए न्याय की अपील की। इस पर अदालत ने उसे स्टे जारी कर दिया। अदालत के निर्देश पर डॉक्टर ने दोबारा संस्थान में अपना कार्यभार संभाल लिया।
डीएसपी बोले, नहीं मिली रिपोर्ट
परिवेदना कमेटी की मीटिंग में शिकायतकर्ता नहीं पहुंचे। डीएसपी डॉक्टर रविंद्र ने बताया कि मामले में कार्रवाई के लिए पीजीआई की तरफ से रिपोर्ट नहीं आई है। जैसे ही रिपोर्ट मिलती है, तुरंत कार्रवाई करेंगे। मंत्री ने साफ कहा कि अगली मीटिंग में कार्रवाई रिपोर्ट दी जाए।
डीसी पूछेंगे, कितनी देर में अटेंड कर रहे मरीज
मंत्री ने डीसी डाक्टर यश गर्ग को साफ कहा कि वे पीजीआई प्रबंधन से बातचीत करें। पूछा, जाए इमरजेंसी में कितने मरीज आ रहे हैं। कितने डॉक्टर तैनात हैं। एक मरीज को अटेंड करने में कितना समय लगता है। पूरी व्यवस्था को सुधारने के लिए पत्र व्यवहार करें।
डीएमएस भी मान रहे लापरवाही
पीजीआई की इमरजेंसी में औसतन एक हजार से 1200 तक मरीज आते हैं। अब ट्रॉमा सेंटर बनने के बाद संख्या कम हो जाएगी। अगर डाक्टर गंभीरता से काम करें तो अच्छी तरह से मरीज अटेंड किए जा सकते हैं। सैनिक की बेटी के मामले की जांच उन्हाेंने की, जिसमें लापरवाही सामने आई थी।
-डॉक्टर संदीप, डीएमएस आपात विभाग पीजीआई