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संदिग् ध डेंगू के नाम पर डेंगू के मरीजों को छिपा रहा स्वास् थ्य विभाग

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बड़ा सवाल : डेंगू है या संदिग्ध डेंगू...
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- बुखार से 12 मौत, पर अभी तक डेंगू की पुष्टि नहीं
- डेंगू संदिग्ध के नाम पर डेंगू के मरीजों को छिपा रहा विभाग
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीज सबसे अधिक परेशान हैं कि उन्हें डेंगू है या संदिग्ध डेंगू। क्योंकि अधिकांश मरीजों में इनके लक्षण एक जैसे ही मिलते हैं। कार्ड टेस्ट में अधिकांश मरीजों को डेंगू पॉजिटिव मिलता है, जबकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से मान्य एलाइजा जांच में अधिकांश को डेंगू नेगेटिव मिलता है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि अभी तक डेंगू से जिले में किसी मरीज की मौत नहीं हुई है, जबकि पीजीआईएमएस के बाल रोग विभाग में दस बच्चों और दो वयस्कों की मौत हो चुकी है। इन मरीजों को भी डेंगू के लक्षण थे, लेकिन इनके डेंगू ग्रस्त होने की पुष्टि नहीं की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार शुक्रवार को 16 डेंगू के और नये मरीज सामने आए हैं, जबकि वीरवार को डेंगू के जिले भर में 318 मरीज थे। मौसम में ठंडक होने के बावजूद लगातार डेंगू के मरीजों की बढ़ रही संख्या स्वास्थ्य विभाग और पीजीआईएमएस के लिए आफत बनती जा रही है। ब्लाक सी व ओपीडी में बुखार के मरीजों की संख्या 40 हजार का आंकड़ा पार कर गई है। इसमें हजारों की संख्या संदिग्ध डेंगू के मरीजों की रही है और 854 मरीजों के डेंगू ग्रस्त होने की संस्थान ने पुष्टि भी की है। पीजीआईएमएस के आपातकालीन विभाग, ब्लाक-सी और मेडिसन विभाग के वार्डों के अलावा बाल रोग वार्ड में बुखार के मरीजों की संख्या बेड की संख्या के अनुपात में कई गुणा बढ़ गई है। कुछ जगह एक बेड पर दो से तीन मरीजों का उपचार किया जा रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. अनुपमा मित्तल के अनुसार वह केवल एलाइजा जांच रिपोर्ट को ही मानते हैं। इन दिनों मरीजों की हो रही मौतों को डेंगू ही कारण नहीं माना जा सकता। इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं।
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बुखार उतरने के बाद शुरू होता है खतरा
- एक्सपर्ट के अनुसार अधिकांश लोग मरीज का बुखार उतरते ही चैन की सांस लेते हैं कि बीमारी से छुटकारा मिला। लेकिन सच्चाई में समस्या यहीं से शुरू होती है। जैसे ही डेंगू के मरीज का बुखार ठीक होता है, उसकी प्लेटलेट्स तेजी से गिरना शुरू होती हैं। परिजन इस दौरान मरीज को महसूस होने वाली कमजोरी का कारण बुखार को मानते हुए दवाओं का सेेवन करते हैं। इससे प्लेटलेट्स और तेजी से गिरती हैं, जिससे मरीज की स्थिति और अधिक खराब हो जाती है। यदि मरीज को सही समय पर अस्पताल में लाया जाए तो उसे बचाया जा सकता है और गंभीर अवस्था में जाने से रोका जा सकता है। डॉक्टरों की मानें तो बुखार उतरने के अगले दो दिन मरीज के लिए सबसे खतरनाक दिन होते हैं, क्योंकि इस दौरान मरीज की प्लेटलेट्स अधिक तेजी से गिरती हैं। जब मरीज की एक बार प्लेटलेट्स बढ़ना शुरू होती हैं तो वह अपने आप तेजी से बढ़ जाती हैं। परिजनों को यह ध्यान देना होता है कि मरीज के शरीर पर लाल दाने न पड़ रहे हों और किसी हिस्से से रक्त न बह रहा हो।

प्लेटलेट्स को लेकर बना रहता है दबाव
पीजीआईएमएस में डॉक्टरों पर अक्सर मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने का दबाव बना रहता है। जबकि आपातकालीन विभाग के डीएमएस डॉ. संदीप कुमार के अनुसार हर दिन 100 यूनिट से अधिक प्लेटलेट्स मरीजों को चढ़ाई जा रही है। जिस मरीज को जरूरत होती है, उन्हें प्लेटलेट्स उपलब्ध कराई जा रही है। प्लेटलेट्स की कमी के चलते किसी मरीज की मौत नहीं हुई है। वहीं एक्सपर्ट की मानें तो लोगों में भ्रम है कि प्लेटलेट्स डेंगू के मरीजों को चढ़ाई जानी चाहिए। जब मरीज की प्लेटलेट्स 10 हजार से नीचे आ रही हों और उसके शरीर के किसी हिस्से से रक्त बहने लग रहा हो तो ही प्लेटलेट्स चढ़ाई जानी चाहिए। इससे पहले मरीज को तरल पेय पदार्थ दिया जाना चाहिए। डॉक्टर उसी मरीज को दाखिल करें जिसे अत्यधिक समस्या हो।

तापमान गिरने का इंतजार
स्वास्थ्य विभाग जहां डेंगू को फैलने से नहीं रोक पाया है, वहीं पीजीआईएमएस के डॉक्टर बीमारी से लड़कर परेशान हो गए हैं। अब सभी डॉक्टरों को तापमान गिरने का इंतजार है, क्योंकि इसके बाद ही डेंगू का वायरस खत्म हो सकेगा।
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नारियल, कीवी और बकरी का दूध हुआ महंगा
डेंगू को लेकर नारियल पानी, कीवी और बकरी के दूध की कीमत में इन दिनों इजाफा हुआ है। नारियल पानी दिन दिनों 30 की बजाए 40 से 45 रुपये में कीवी 18 से 40 रुपये प्रति पीस और बकरी का दूध इन दिनों 200 रुपये किलो हो गया है। जबकि डेंगू का उपचार कर रहे डॉक्टरों की मानें तो ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि इन चीजों के प्रयोग से मरीज में प्लेटलेट्स को बढ़ाया जा सकता हो। मरीज को बुखार होने पर अधिक से अधिक तरल पदार्थ लेना चाहिए।
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