अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। पीजीआई के आपरेशन थियेटर में दुकानदारों और डॉक्टरों की मिलीभगत का खेल है। इसके बावजूद यहां सीनियर डॉक्टरों का दावा है कि आपरेशन थियेटर के अंदर मरीज की सर्जरी में प्रयोग होने वाले उपकरण दुकानदार की ओर से मुहैया कराना गलत नहीं है। इससे मरीज को नुकसान नहीं सुविधा मिलती है। जबकि मरीजों के परिजनों का आरोप रहता है कि वह सामान खुद खरीदकर नहीं ला सकते। उन पर एक दुकानदार से सामान खरीदने का दबाव बनाया जाता है।
ऐसे ही एक मामले का खुलासा किया है पीजीआई की एक महिला मरीज के परिजनों ने। शिकायतकर्ता मुकेश व उनके सहयोगियों ने बताया कि 16 अगस्त को उन्होंने महिला के घुटने का प्रत्यारोपण ऑर्थो विभाग के डॉ. राकेश गुप्ता से कराया। इसमें उन्हें सारा सामान ऑपरेशन थियेटर में ही उपलब्ध कराया गया। जब उनके पास बिल आया तो वह तकरीबन एक लाख पांच हजार रुपये था। उन्होंने इस पर आपत्ति जताई कि सरकार की घोषणा के अनुसार उनसे घुटना प्रत्यारोपण के लिए अधिक कीमत ली जा रही है। सरकार ने 15 अगस्त को इसके लिए नोटिफिकेशन लागू कर दिया था। इसके बावजूद उनकी नहीं सुनी गई, उल्टे कुछ लोगों ने अधिक कीमत वाला बिल जमा करने का उन पर दबाव बनाया। इसके बाद जब दूसरे घुटने का आपरेशन हुआ तो उनसे 54 हजार रुपये लिए गए। इसका भी सारा सामान ऑपरेशन थियेटर में उपलब्ध कराया गया। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि सरकार द्वारा नियम तय होने पर उनसे अधिक कीमत वसूली गई। इसके साथ ही पीजीआईएमएस के आपरेशन थियेटर में सामान का उपलब्ध कराया जाना भी डॉक्टरों और दुकानदारों की मिली भगत को उजागर करता है। यहां मरीज को अपनी मर्जी से किसी भी दुकान से सामान लाने की अनुमति नहीं है।
नियमानुसार यह है कृत्रिम घुटनों की कीमत
घुटना प्रत्यारोपण के प्रकार पुरानी कीमत नई कीमत
कोबाल्ट क्रोमियम 1,58,324 54,720
टाइटेनियम ऑक्सीडाइज्ड जिंकोमियम 2.5 से 4.5 लाख 76,600
हाई लैक्सिबिलिटी इंप्लांट 1.80 से 4.5 लाख 56,490
रिवीजन इंप्लांट दूसरी बार 2.75 से 6 लाख 1,13,950
विशेष इंप्लांट 2.75 से 9 लाख 1,13,950
बोले अधिकारी
सरकार ने घुटना प्रत्यारोपण के लिए प्रयोग होने वाले इंप्लांट की कीमत कम कर दी है। इसके लिए नोटिफिकेशन कब जारी हुआ है, जानकारी नहीं है। हमने किसी मरीज व उसके परिजनों पर इंप्लांट किसी दुकानदार से खरीदने का कोई दबाव नहीं बनाया। दुकानदार से जो भी बात हुई होगी परिजनों की हुई होगी। यदि नोटिफिकेशन के बाद अधिक बिल लिया जा रहा है तो परिजन दुकानदार से बात करें। इसमें हमारा कोई रोल नहीं है। आपरेशन थियेटर में सामान इसलिए मंगाया जाता है, क्योंकि एक इंप्लांट के कई साइज होते हैं। 100 से 150 के सेट में कौन सा लगेगा, यह कोई नहीं जानता। दुकानदार एक व्यक्ति को सारे साइज तो नहीं दे सकते।
- डॉ. राकेश गुप्ता, निदेशक एवं ऑर्थो सर्जन, पीजीआई
इस मामले में यदि कोई शिकायत आती है तो कमेटी गठित कर जांच की जाएगी। सरकार द्वारा बनाए गए नियमों को तोड़ने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी। यह विषय जांच का है, इसकी जांच होगी।
- मनदीप मान, जिला ड्रग कंट्रोलर