अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी/रोहतक। जालान अस्पताल 11 से 17 मार्च के दौरान मोतियाबिंद के ऑपरेशन कराने वाले 35 मरीजों की आंखों में संक्रमण होने के बाद जालान अस्पताल और सामान्य अस्पताल में आंखों के ऑपरेशन करने पर रोक लगा दी गई है। अस्पताल पहुंचे मरीजों से कहा गया है कि जब ऑपरेशन शुरू होंगे तब फोन पर बताया जाएगा। साथ ही जालान अस्पताल अस्पताल पहुंची दवाइयों के आठ सैंपल जांच के लिए चंडीगढ़ लैब में भेजे गए हैं। इस बीच भिवानी के निजी अस्पताल में आंखों के आपरेशन के बाद संक्रमण होने के मामले में सात और मरीजों को दिल्ली भेजे जाने की बात सामने आ रही है।
उल्लेखनीय है कि नेत्र ज्योति बचाओ अभियान के तहत 11 से 17 मार्च के दौरान जालान अस्पताल में हुए मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद 35 मरीजों की आंखों में संक्रमण हो गया था। मरीजों ने बताया था कि उन्हें कुछ दिखाई नहीं दे रहा। भिवानी ही नहीं करनाल, झज्जर, कुरुक्षेत्र में भी यह समस्या आई। इसके बाद इन मरीजों को पीजीआई रोहतक रेफर किया गया। अब मामले की जांच नहीं होने तक सिविल सर्जन ने जालान अस्पताल में किसी भी तरह के ऑपरेशन करने पर रोक लगा दी है। यहां के सभी ऑपरेशन अब सामान्य अस्पताल में होंगे। वहीं सामान्य अस्पताल के पीएमओ ने भी मामले की जांच नहीं होने तक नागरिक अस्पताल में आंखों के ऑपरेशन पर रोक लगा दी है। सिविल सर्जन डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता, जालान अस्पताल इंचार्ज डॉ. एडविन पीजीआई पहुंचे और मरीजों की जानकारी ली।
भिवानी के निजी अस्पताल में गए सात अन्य संक्रमित मरीजों को दिल्ली भेजे जाने की चर्चा
सूत्रों की मानें तो भिवानी के निजी अस्पताल में आंखों के आपरेशन के बाद संक्रमण होने के मामले में सात और मरीजों की बात सामने आ रही है। ये संक्रमण होने के बाद निजी अस्पताल में उपचार के लिए गए थे, लेकिन वहां अस्पताल प्रशासन ने संक्रमण होने के चलते उन्हें दाखिल करने से मना कर दिया। बताया जा रहा है कि उन्होंने सीधे दिल्ली की राह पकड़ी है। माना जा रहा है कि 11 मार्च से 18 मार्च तक प्रदेश में जितने भी आंखों के आपरेशन हुए हैं, उनमें ज्यादातर संदेह के दायरे में है। माना जा रहा है पूरे दवा के पूरे बैच में गड़बड़ी हो सकती है। इससे मरीजों की संख्या अधिक हो सकती है, जिसे प्रशासन दबाना चाह रहा है। यही स्थिति लगभग झज्जर में भी बताई जा रही है।
मरीजों की आंखों में क्यों हुआ संक्रमण, होगी जांच
जालान अस्पताल में 11 से 17 मार्च के दौरान 282 मरीजों के ऑपरेशन किए गए। इन सभी की आंखों में एक ही बैच की दवाइयों का प्रयोग किया गया। ऐसे में 35 मरीजों की ही आंखों में समस्या क्यों हुई। इस पर स्वास्थ्य विभाग दवाओं की सैैपलिंग कर जांच कर रहा है।
दोनों अस्पताल में औसतन रोजाना होते हैं 50 ऑपरेशन
सामान्य अस्पताल में वीरवार को 12 मरीजों के ऑपरेशन होने थे। मगर अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों ने निर्णय लिया कि जब तक नेत्र रोगियों की दृश्यता जाने के मामले की जांच नहीं होगी तब तक नए ऑपरेशन नहीं होंगे। मरीजों को बताया गया कि कुछ दवाइयों में दिक्कत आई है। इस कारण ऑपरेशन बाद में किए जाएंगे। सभी मरीजों के मोबाइल नंबर और पते नोट किए गए। उन्हें फोन कर बुलाया जाएगा। सामान्य अस्पताल में औसतन हर ऑपरेशन डे पर 10 से 12 ऑपरेशन किए जाते हैं। इसी तरह जालान अस्पताल में औसतन 35 से 40 ऑपरेशन किए जाते हैं।
अब सभी दवाइयों की प्रयोग से पहले होगी जांच
सामान्य अस्पताल में सभी नेत्र संबंधी दवाइयों की जांच लैब में करवाई गई। साथ ही निर्णय लिया गया कि सप्लाई में आने वाली सभी बैच की दवाइयों को प्रयोग से पहले लैब में जांचा जाएगा ताकि किसी तरह की समस्या से बचा जा सके।
सभी मरीजों की दृश्यता सुरक्षित
35 मरीजों की आंखों में समस्या है। इनमें से 19 के दोबारा ऑपरेशन पीजीआई में हुए हैं और 16 को अंडर ऑब्जर्वेशन रखा गया है। वहां चिकित्सीय टीम से बात हुई और सभी मरीजों का नि:शुल्क इलाज होगा। सभी की दृश्यता सुरक्षित है और जल्द ही सभी मरीजों को दिखाई देने लगेगा। मरीजों की देखभाल के लिए एक स्टाफ नर्स और दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की ड्यूटी जिले से लगाई गई है।
डा. आदित्य स्वरूप गुप्ता, सिविल सर्जन
सामान्य अस्पताल में नेत्र रोग मरीजों के ऑपरेशन कुछ समय के लिए बंद किए हैं। जालान अस्पताल के कुछ मरीजों में एंडोऑप्थलमाइटिस संक्रमण हुआ है। जिन मरीजों की आंखों में समस्या आई है, पहले उनकी जांच हो जाए, उसके बाद अस्पताल में ऑपरेशन शुरू होंगे।
रवींद्र पुनिया, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, सामान्य अस्पताल