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लोकसभा चुनाव : भाजपा खुफिया तरीके से तोल रही दीपेंद्र के खिलाफ हेवीवेट मंत्री

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रोहतक। प्रदेश की सबसे हॉट सीट मानी जा रही रोहतक लोकसभा क्षेत्र से जीत की हैट्रिक लगा चुके कांग्रेसी सांसद एवं पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा को हराने के लिए किसे मैदान में उतारा जाए, यह यक्ष प्रश्न भाजपा, इनेलो, जेजेपी, आप, बसपा व लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी की नींद उड़ाए हुए है। बंटवारे के बाद कमजोर हो चुका ताऊ देवीलाल का परिवार नए सिरे से खुद को उठाने का प्रयास कर रहा है। वहीं, भाजपा ने रोहतक सीट को प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। यही कारण है कि हुड्डा परिवार के खिलाफ दो बार चुनाव लड़ चुके प्रदेश के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ व मनीष ग्रोवर की संभावनाओं को खुफिया तरीके से तलाशा जा रहा है।
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दो साल में चाहे पिता पुत्र से दो बार हारे कैप्टन, पर इस बार राजनीतिक हालात अलग
प्रदेश के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु की हुड्डा परिवार से पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता है। भाजपा ने कैप्टन को 2004 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ मैदान में उतारा, लेकिन वे डेढ़ लाख वोट से हार गए थे। 2005 में हुड्डा सीएम बन गए और सांसद पद से त्यागपत्र दे दिया। उप चुनाव में उन्होंने विदेश में पढ़ रहे अपने पुत्र दीपेंद्र हुड्डा को रोहतक बुलाकर मैदान में उतारा। कैप्टन अभिमन्यु दीपेंद्र से हार गए। हालांकि, अब कैप्टन अभिमन्यु के रुतबे व सियासत में परिवर्तन आ गया है। वे न केवल पिछले साढ़े 4 साल से प्रदेश के वित्त मंत्री हैं, बल्कि केंद्र व राज्य में भाजपा की सरकार है। दूसरी तरफ दीपेंद्र हुड्डा के पिता सीएम भी नहीं हैं। न ही केंद्र व राज्य में कांग्रेस की सरकार है। साथ ही जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा को कैप्टन के परिवार ने करीब से देखा है। ऐसे में भाजपा के लिए दीपेंद्र हुड्डा के खिलाफ कैप्टन अच्छा विकल्प साबित हो सकते हैं।

धनखड़ साढ़े चार साल से झज्जर के साथ रोहतक में भी सक्रिय
लगातार दूसरी बार भाजपा कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ को दीपेंद्र हुड्डा के खिलाफ मैदान में उतार सकती है। 2014 में दीपेंद्र ने धनखड़ को मोदी लहर के बावजूद डेढ़ लाख से ज्यादा वोटों से हराया था। लेकिन इस बार हालात में बदलाव है। धनखड़ न केवल लोकसभा क्षेत्र के हलके बादली से विधायक हैं, बल्कि साढ़े चार साल से कैबिनेट मंत्री बनकर पूरे लोकसभा क्षेत्र में सक्रिय हैं। रोहतक की जिला कष्ट निवारण समिति के चेयरमैन वही हैं। ऐसे में धनखड़ भी भाजपा के लिए अच्छी पसंद हो सकते हैं।
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विस चुनाव के बाद भाजपा का मेयर बनाकर ग्रोवर दे चुके हुड्डा को दो शिकस्त
प्रदेश के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा सार्वजनिक मंच से कह चुके हैं कि 2014 के विधानसभा चुनाव में जितना दर्द उनको रोहतक शहर की सीट हारने का हुआ, उतना दर्द प्रदेश में सरकार गंवाने का नहीं हुआ। क्योंकि 10 साल रोहतक की चौधर के नाम पर ताने देते रहे। लोग अब भी पूछते हैं कि आखिर रोहतक शहर में क्यों हारे। यह हार भाजपा के मनीष ग्रोवर ने ही दी थी। फरवरी 2016 के दंगों केे बाद हुए निगम मेयर चुनाव में भी कांग्रेस भाजपा से मात खा गई। मेयर की जीत के पीछे भी ग्रोवर की अहम भूमिका रही। ग्रोवर लोकसभा चुनाव में भी जाट नॉन जाट नारे के बीच भाजपा प्रत्याशी के तौर पर अच्छी पसंद हो सकते हैं।

गांवों में जाट ओपन, गैर जाट चुप
खुफिया विभाग के सूत्रों ने बताया कि लोकसभा क्षेत्र के अंदर जाट मतदाता जहां खुलकर अपनी राय रख रहे हैं, लेकिन गैर जाट चुप हैं। रोहतक जिले के गढ़ी सांपला-किलोई, महम व कलानौर और रोहतक शहर हलके में अब भी हुड्डा प्रभाव बरकरार है। लेकिन जाट समुदाय में जननायक जनता पार्टी के सांसद दुष्यंत चौटाला के प्रति भी क्रेज उभर रहा है। इनेलो का अपना पुराना वोट बैंक हैं। कैप्टन व धनखड़ के प्रति कई गांव में अच्छी राय मिली है। शहर के अंदर ग्रोवर का अपना वोट बैंक है। ऐसे में भाजपा गहराई से खुफिया विभाग की रिपोर्ट का अध्ययन करके टिकट तय करेगी।

आप से गठबंधन न होने पर जेजेपी प्रत्याशी हो सकते हैं देशवाल, मकड़ौली या सुहाग
इनेलो के बंटवारे के बाद गठित सांसद दुष्यंत चौटाला की पार्टी जजपा व आप के बीच गठबंधन हो सकता है। जींद उप चुनाव मिलकर लड़ चुकी जेजेपी व आप के बीच सीटों के बंटवारे पर पेंच फंसा है। आप के प्रदेशाध्यक्ष नवीन जयहिंद रोहतक से ही हैं। ऐसे में अगर दोनों दलों के बीच गठबंधन हुआ तो दिल्ली से लगती रोहतक लोकसभा सीट आप के खाते में जा सकती है। गठबंधन न होने पर जेजेपी जिलाध्यक्ष धर्मपाल मकड़ौली, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य एडवोकेट बलवान सुहाग या एमडीयू के छात्र नेता प्रदीप देशवाल को मैदान में उतार सकती है।

नांदल या कैप्टन में से एक
इनेलो को बंटवारे के बाद जिले में कमजोर माना जा रहा है। हालांकि, राजनीति में कब कौन बाजी मार ले जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। पार्टी मेयर चुनाव में अच्छे खासे वोट हासिल करने वाले युवा चेहरे संचित नांदल को मैदान में उतार सकती है। उनके पिता सतीश नांदल न केवल पार्टी के जिलाध्यक्ष हैं, बल्कि पार्टी के बंटवारे के समय अजय चौटाला के घर आने के बावजूद इनेलो के साथ रहे। वहीं, 1999 में भाजपा-इनेलो गठबंधन प्रत्याशी के तौर पर भूपेंद्र हुड्डा को शिकस्त दे चुके कैप्टन इंद्रसिंह भी पार्टी में ही हैं।

बसपा-लोसपा गठबंधन नहीं खोल रहा पत्ते
इनेलो से गठबंधन तोड़कर बसपा ने भाजपा के बागी सांसद राजकुमार सैनी की नवगठित पार्टी लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी से गठबंधन किया है। लोकसभा चुनाव में गठबंधन रोहतक में किसे मैदान में उतारेगा, इसकी अभी घोषणा नहीं हुई है।

तीन जिलों में फैला रोहतक लोकसभा क्षेत्र, 16.5 लाख मतदाता, नौ हलके
रोहतक लोकसभा क्षेत्र में नौ विधानसभा आती हैं। इसमें रोहतक जिले के चार रोहतक सिटी, महम, कलानौर व गढ़ी सांपला, झज्जर जिले के झज्जर सिटी, बेरी, बादली व बहादुरगढ़ और रेवाड़ी जिले का एक हलका कोसली आता है। पूरे लोकसभा क्षेत्र में 16.5 लाख वोटर हैं। इसमें रोहतक जिले में साढ़े 7 लाख वोटर मतदाता सूची में हैं। वोटिंग के लिए 1 हजार 859 बूथ बनाए गए हैं। इसमें रोहतक जिले में 804, झज्जर जिले में 798 और कोसली में 257 बूथ बनाए गए हैं। लोकसभा क्षेत्र के चुनाव इतिहास पर नजर डाले हैं तो सीट पर हुड्डा परिवार का दबदबा रहा है। 10 साल प्रदेश के सीएम रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा चार बार यहीं से सांसद बने। उनसे पहले उनके पिता चौधरी रणबीर हुड्डा दो बार और अब लगातार तीन बार 2005, 2009 और 2014 में दीपेंद्र हुड्डा सांसद बन चुके हैं। पिछली बार देश में मोदी लहर के बावजूद दीपेंद्र जीतने में कामयाब रहे थे।
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