हिसार। 1926 में जन्मे उदयभानु हंस की 1952 में हिंदी रुबाइयां प्रकाशित हुई थीं, जो हिंदी में नया प्रयोग थी। उन्होंने हिंदी साहित्य को अपने गीत, दोहों, कविताओं व गजलों से समृद्ध किया। हंस की अनेक साहित्यिक उपलब्धियां हैं। पंजाब से अलग राज्य बनने के बाद हरियाणा सरकार ने 1967 में उदयभानु हंस को राज्य कवि का सम्मान प्रदान किया था। हंस ने माध्यमिक शिक्षा तक उर्दू एवं फारसी की शिक्षा ग्रहण की और घर पर ही उनके पिता ने उन्हें हिंदी व संस्कृत पढ़ाई। उन्होंने प्रभाकर, शास्त्री और फिर हिंदी में एमए किया। हंस ने सनातन धर्म संस्कृत कॉलेज मुलतान और रामजस कॉलेज दिल्ली से शिक्षा प्राप्त की।
हिंदी में रुबाई के प्रवर्तक कहे जाते थे हंस
उदयभानु हंस हिंदी में रुबाई के प्रवर्तक कवि थे, जो रुबाई सम्राट के रूप में लोकप्रिय रहे। प्रसिद्ध गीतकार गोपालदास नीरज तो हंस को मूलरूप से गीतकार मानते थे। सुप्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन के साथ भी उदयभानु हंस का लगाव रहा है। हरिवंश राय बच्चन उदयभानु हंस को हिंदी कविता की विशेष प्रवृत्ति का पोषक मानते थे।
26 जुलाई 2015 को हंस से मिलने उनके घर गए थे सीएम मनोहर लाल
पांच साल पहले पैरालिसिस होने के बाद उदयभानु हंस साहित्य के मंच से दूर हो गए। उसके बाद उनकी यादाश्त घटती चली गई। अब किसी को पहचान भी नहीं पा रहे थे। 26 जुलाई 2015 को मुख्यमंत्री मनोहर लाल अपने हिसार दौरे के दौरान उदयभानु हंस से मिलने उनके घर पर पहुंचे थे। 25 मिनट तक घर पर रुके मुख्यमंत्री को हंस ने अपनी कविता की लाइनें भी सुनाई थी।
साहित्यिक उपलब्धियां
-- संस्कृत-लेखन के लिए साप्ताहिक संस्कृतम् अयोध्या से कवि भूषणम् तथा साहित्यालंकार की दो उपलब्धियां
-- 1967 में हरियाणा सरकार द्वारा सर्वप्रथम राज्यकवि का सम्मान दिया गया।
-- 1968 में गुरु गोबिंद सिंह पर आधारित महाकाव्य संत सिपाही पर उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा निराला पुरस्कार दिया गया।
-- हरियाणा, पंजाब व हिमाचल प्रदेश के स्कूल-कॉलेजों के पाठ्यक्रम में जीवन परिचय सहित रचनाएं निर्धारित की गईं।
-- 1992 में पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैलसिंह ने दिल्ली में गीत गंगा सम्मान दिया।
-- 1994 में हिमाचल प्रदेश की प्रमुख संस्था हिमोत्कर्ष द्वारा अखिल भारतीय श्रेष्ठ साहित्यकार का सम्मान दिया गया।
-- 1994 में ही हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग द्वारा इलाहाबाद में विद्या वाचस्पति की मानद उपाधि दी गई।
-- 2001 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय तथा महर्षि विश्वविद्यालय रोहतक द्वारा कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर दो शोध-छात्रों को पीएचडी की उपाधियां दी गईं।
-- प्रथम यूरोप हिंदी महासम्मेलन में कवि के रूप में आमंत्रित किया गया।