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बच्चा चोरी पीजीआई

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रोहतक। मेरी बेटी भूखी होगी, मुझे उसे दूध पिलाना है। कोई तो मेरी बच्ची को ले आओ, पता नहीं कहा-किस हाल में होगी। यह कहते हुए मनीषा रोते हुए बार-बार बेहोश हो रही थी। पीजीआई के वार्ड-2 में भर्ती मनीषा बच्ची चोरी होने के बाद बदहवास हालत में रही। मनीषा कह रही थी कि नौ महीने पेट में रखने और तीन दिन दर्द झेलने के बाद उसका मुंह देखा था, हमारी तो किसी से कोई दुश्मनी भी नहीं थी। बोली, आधार कार्ड बनवाने गए थे, बेटी को ननद ने ले रखा था। सीढ़ियों तक आते ही मुझे चक्कर आ गया, मुझे तो होश आया तब दूसरे बेड वालों ने बताया कि इसकी बेटी चोरी हो गई। मेरी सास तो भोली है, उसको तो पता भी नहीं लड़की को कोई ले गया। पति को कोई अंदर नहीं आने दे रहा, ननद को ही पता होगा कौन थी वो महिला जो मेरी बच्ची को ले गई। मनीषा की पहली बेटी हुई है, इससे पहले उनका दो साल का बेटा नैतिक है। मनीषा ने बताया कि डॉक्टरों ने शाम चार बजे छुट्टी देने के लिए भी बोल दिया था।
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बच्चा चोरी होने के बाद हुई पांच लेयर में सुरक्षा
नवजात के चोरी होने के बाद पीजीआई के स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग में पांच लेयर में सुरक्षा कर दी गई है। वार्ड में एंट्री करते समय सिक्योरिटी गार्ड वार्ड में एडमिट महिलाओं के परिजनों को चेकिंग के बाद ही अंदर जाने दे रहे हैं। इसके बाद महिला पुलिसकर्मी अंदर जाने से रोक रही हैं। आगे सीढ़ियों पर चढ़ते समय फिर से आपका सामना महिला सिक्योरिटी गार्ड से होगा। सीढ़ियों से ऊपर जाते ही फिर से महिला पुलिसकर्मी मुस्तैदी से ड्यूटी करती नजर आ रही है, इनकी हर आने-जाने वाली महिला पर पैनी नजर है। मनीषा के प्राइवेट वार्ड के बाहर एक पुलिसकर्मी चेयर पर बैठा है, जो डॉक्टरों के सिवा किसी को भी महिला से मिलने की अनुमति नहीं देता। इससे पहले भी वर्ष 2017 में 11 सितंबर को पीजीआई के स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग से बच्चा चोरी हुआ था और पीजीआई में कई बार बच्चो की अदला-बदली की खबरें भी मिल चुकी हैं।
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