फ्लैग : नगर निगम की दुकानों की रजिस्ट्री दुकानदारों के नाम करने का मामला
हेडिंग : शहरी निकाय विभाग ने मांगा 20 साल का ब्योरा, कारोबारी असहमत
: अप्रैल 2018 में सरकार ने की थी दुकानों की रजिस्ट्री कराने की घोषणा
: मंत्री को व्यापारियों ने सौंपा मांग पत्र, बोले-अधिकारी बेवजह अटका रहे रोड़ा
: नई शर्त मंजूर नहीं, शहर में हैं 300 से अधिक व्यापारी निगम के किराएदार
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। नगर निगम के किराएदार कारोबारी अधिकारियों द्वारा तय किए गए नियमों के फेर में फंस गए हैं। शहरी निकाय विभाग के मुख्यालय ने एक प्रोफार्मा जारी किया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि दुकान चाहे खुली बोली पर दी गई है या किराए पर। दुकानदार को फार्म के अंदर भरना होगा कि 20 साल पहले कितना किराया तय था। हर पांच साल बाद 25 प्रतिशत बढ़ा किराया जमा कराया या नहीं। नए नियमों से किराएदार नाराज हैं। उन्होंने सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर को एक मांग पत्र सौंपा है, जिसमें नियमों को सरल बनाने की मांग की गई है।
प्रदेश सरकार ने 19 अप्रैल 2018 को घोषणा की थी कि शहरों के अंदर जहां भी नगर निगम, नगर पालिका या नगर परिषद की दुकानें हैं। उसकी रजिस्ट्री कलेक्टर रेट पर 20 साल पुराने किराएदारों के नाम करवाई जाएगी। निकाय विभागों को भेजे पत्र में इससे ज्यादा नियम स्पष्ट नहीं किए गए। निगम आयुक्त ने पत्र लिखकर पूछा कि यह स्पष्ट नहीं है कि अगर दुकान के ऊपर प्रथम या द्वितीय मंजिल बनी हैं और अलग-अलग किराएदार के पास हैं। ऐसी स्थिति में उनकी रजिस्ट्री भूतल वाले किरायदार के नाम होगी या अलग-अलग। शहरी निकाय विभाग की तरफ से जवाब में एक प्रोफार्मा भेजा गया है।
ये ब्योरा भरना किराएदार को अनिवार्य
शहरी निकाय विभाग द्वारा भेजे प्रोफार्मा में छह कॉलम बनाए गए हैं। एक कॉलम के 5 से 8 भाग हैं, जिनमें अलग-अलग ब्योरा मांगा गया है। भाग 1, 2, 3 में किराएदार कारोबारी को पूरा ब्योरा भरना होगा। नाम, पता, मोबाइल नंबर, दुकान कब अलॉट हुई, साइज क्या रहा।
: कॉलम चार में किराएदार को बताना होगा कि वास्तविक अलॉटी कौन है। उसने कब और किसे दुकान या प्लाट हस्तांतरित किया। अलाटमेंट के समय दुकान का क्या किराया था। अब क्या किराया है। वास्तविक अलॉटी द्वारा हर पांच साल बाद 25 प्रतिशत वृद्धि के साथ कितना किराया जमा कराया गया। किराया बकाया है या नहीं, है तो कितना है।
: अलॉटमेंट के समय प्लॉट या दुकान का साइज, टोटल स्टोरी या मंजिल, ग्राउंड कवर एरिया कितना था। अब वर्तमान में क्या स्थिति है।
नोट : फॉर्म भरने के बाद बिल्डिंग इंस्पेक्टर द्वारा जांच पड़ताल की जाएगी। इसके बाद उसके हस्ताक्षर के बाद फॉर्म आगे बढ़ेगा।
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20 साल के किराएदारी का देना होगा शपथ पत्र
शहरी निकाय विभाग द्वारा भेजे गए पत्र में साफ है कि दुकानदार को कानूनी तौर पर शपथ देना होगा कि दुकान कब किराए पर ली। 20 साल से वहीं किराएदार है। उसने आगे किसी अन्य को किराए पर दुकान नहीं दी।
व्यापारियों ने मंत्री को सौंपा पत्र, दिए सुझाव
सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर के साथ रोहतक व्यापार मंडल व पालिका बाजार एसोसिएशन के पदाधिकारियों की मीटिंग हुई, जिसमें मंत्री को बताया गया कि शहरी निकाय विभाग द्वारा तय किए गए शर्तों के तहत दुकानों की रजिस्ट्री कराना संभव नहीं है। ऐसे में शर्तों में संशोधन किया जाए।
: जो दुकानदार 20 साल से किराएदार हैं, उनकी सिक्योरिटी राशि रजिस्ट्री के समय जमा कर ली जाए।
: जिन दुकानदारों ने निगम की अनुमति लेकर निर्माण कार्य किया है, उस स्थित में ग्राउंड फ्लोर के अलग रेट और प्रथम या द्वितीय तल के अलग रेट तय किए जाएं।
: निगम द्वारा 20 साल की शर्त रखी गई है। ऐसी स्थिति में वर्तमान में जो किराएदार दुकान चला रहा है, उसके नाम रजिस्ट्री करवाई जाए।
: शहरी निकाय विभाग द्वारा रजिस्ट्री के लिए सभी शर्तों को उल्लेख किया जाए, लेकिन सिक्योरिटी राशि से लेकर किराएदार की अवधि तक के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं है।
वर्जन--------------
पांच माह बाद भी दुकानों की रजिस्ट्री कराने के मामले में नियम स्पष्ट नहीं हैं। कुछ नई शर्त लगाई गई हैं, जो अव्यवहारिक हैं। सहकारिता मंत्री को मांग पत्र देकर नियमों में संशोधन की मांग की है।
-गुलशन निझावन, प्रधान पालिका बाजार एसोसिएशन
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दुकानदारों को शहरी निकाय विभाग द्वारा तय प्रोफार्मा से अवगत करवा दिया गया है। सरकार व मुख्यालय जो नियम तय करेगी, उसे किराएदारों के सामने रख दिया जाएगा।
-आरएस वर्मा, आयुक्त नगर निगम
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यहां-यहां हैं निगम की दुकानें
पालिका बाजार, पुराना बस स्टैंड, कच्चा बेरी रोड, गांधी कैंप, शिवाजी कॉलोनी, दिल्ली रोड, भिवानी रोड, सुभाष रोड व इंदिरा मार्केट में निगम की दुकानें हैं।