अमर उजाला एक्सक्लूसिव
हाई टेक सुविधाओं से लैस होने जा रहा पीजीआईएमएस और जिला अस्पताल
25 करोड़ की लीनियर एक्सीलेटर देगी कैंसर रोगियों को राहत
संजय कुमार
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में जल्द ही कैंसर रोगियों के लिये 25 करोड़ रुपये की ‘लीनियर एक्सीलेटर’ मशीन आ रही है। इसके बाद संस्थान देश के एम्स, पीजीआईएमएस चंडीगढ़ व कई शीर्ष अस्पतालों की लिस्ट में आ जाएगा। इस मशीन का लगभग चार माह बाद मरीजों को लाभ यह मिलेगा कि उन्हें कोबाल्ट थेरेपी से उपचार के दौरान होेने वाले साइड इफेक्ट से राहत मिलेगी।
संस्थान के रेडियोथैरेपी विभाग में कैंसर रोगियों की फिलहाल कोबाल्ट थैरेपी के तहत सेंक लगाई जाती है। इससे मरीज के कैंसर प्रभावित एरिया के अलावा अन्य टिश्यू भी क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। जबकि लीनियर एक्सीलेटर मशीन से कैंसर के मरीजों को सेंक के दौरान इन समस्याओं से बचाया जा सकेगा। इस मशीन के माध्यम से प्रभावित एरिया को ही सेंक दी जाएगी। इसके लिए स्पेशल बंकर बनाया जा रहा है, जिससे मशीन की किरणें बाहर न आ सकें। इसके लिये संस्थान में रेडियोथैरेपी विभाग के मानक के हिसाब से मशीन को स्थापित करने की व्यवस्था की जा रही है।
रेडियोलॉजी विभाग को मिलेगी 128 स्लाइस की सीटी, 256 स्लाइस का प्रयास
संस्थान के रेडियोलॉजी विभाग में जल्द ही 128 स्लाइस की सीटी मशीन आ रही है। विभाग प्रयास कर रहा है कि इस मशीन के आने से पहले यदि एचएलएल को अतिरिक्त पैसा भेज कर 256 स्लाइस की सीटी स्कैन मशीन को मंगा लिया जाए। यदि यह प्रक्रिया सिरे चढ़ी तो संस्थान में एक उच्च स्तर की जांच मशीन रेडियोलॉजी विभाग में शामिल हो जाएगी। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के 150 करोड़ रुपये के बजट में से संस्थान का छह करोड़ रुपये का बजट बैलेंस था। इस बजट का प्रयोग करते हुये संस्थान को यह जांच मशीन पांच करोड़ 12 लाख के करीब की पड़ रही है। अधिकारियों का प्रयास है कि वह अतिरिक्त पैसा संस्थान की ओर से भेज कर उच्च क्वालिटी की मशीन मंगवा लें। यदि यह योजना सिरे नहीं चढ़ती तो 128 स्लाइस की मशीन लगभग दो माह में आ जाएगी और यह संस्थान में आने वाले मरीजों को लाभ देगी।
बोले अधिकारी
विभाग में सवा तीन करोड़ रुपये की एक व दूसरी छह से सात करोड़ की सीटी स्कैन की मशीन आ रही है। इसके अलावा तीन डिजिटल मोबाइल एक्स-रे मशीन व एक पोर्टेबल एक्स-रे मशीन की डिमांड भेजी गई है। विभाग ने चार अल्ट्रासाउंड कलर डोपलर मशीन की भी डिमांड डाली है। वर्तमान में विभाग में प्रतिदिन 1200 एक्स-रे, 80 सीटी, 40 एमआरआई, 600 से अधिक अल्ट्रासाउंड जांच होती है।
- डॉ. रोहताश यादव, डीन एकेडमिक अफेयर एवं विभागाध्यक्ष रेडियोलॉजी, पीजीआईएमएस
जिला अस्पताल में होगी एमआरआई और डायलिसिस
पीजीआईएमएस की तर्ज पर जिला अस्पताल में भी उच्च स्तर की चिकित्सा सेवाएं जल्द ही उपलब्ध होंगी। यहां पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप पर एमआरआई मशीन और डायलिसिस यूनिट लगाने की तैयारी है। इसके लिये पीपीपी मोड का स्टाफ अपना सर्वे कर रहा है। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चंद्र के अनुसार एमआरआई और डायलिसिस शुरू होने से मरीजों को निजी अस्पताल, प्राइवेट जांच केंद्र में अधिक खर्च करने से राहत मिलेगी। गौरतलब है कि जिला अस्पताल में ईको व फेको तकनीक भी उपलब्ध है। हालांकि कार्डियोलॉजिस्ट व फिजिशियन न होने के चलते ईको मशीन का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। जबकि फेको का लाभ नेत्र रोगियों को मिल रहा है। चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि ईको के लिये डॉक्टर की डिमांड विभाग को भेजी गई है। इसके अलावा डायलेसिस और एमआरआई का कार्य विभाग के डीजी कार्यालय के स्तर पर हो रहा है।