पीजीआईएमएस को लोगो
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सीओई के त्यागपत्र के बाद डीन वेलफेयर स्टूडेंट और चीफ वार्डन बदले
पीजीआईएमएस कुलपति अमेरिका में पीजीआईएमएस में तीखी राजनीति शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विभाग विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ओपी कालरा के अमेरिका जाते ही संस्थान में तीखी राजनीति शुरू हो गई है। हाल ही में कंट्रोल ऑफ एग्जाम डॉ. अंतरिक्ष ने अपना त्याग पत्र ई मेल के माध्यम से कुलपति को भेजा है, वहीं डीन वेलफेयर स्टूडेंट डॉ. ध्रुव चौधरी और चीफ वार्डन को बदल दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार परीक्षा नियंत्रक डॉ. अंतरिक्ष के त्यागपत्र को लेकर संस्थान में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। मंगलवार को एक साथ डीन वेलफेयर स्टूडेंट और चीफ वार्डन का बदला जाना भी सुर्खियों में है। वर्तमान में डॉ. ध्रुव चौधरी की जगह डॉ. विकास ककड़ को डीन वेलफेयर स्टूडेंट और डॉ. एसके धत्तरवाल की जगह डॉ. ईश्वर को चीफ वार्डन की जिम्मेदारी दी गई है। यह तीनों मुद्दे संस्थान में इसलिए चर्चा का विषय बने हैं कि कुलपति के विदेश जाने के बाद इस तरह की कार्रवाई हो रही है। माना जा रहा है कि कुलपति निर्देश पहले जारी कर चुके थे, इनके आर्डर अब निकाले गए हैं। डीन वेलफेयर स्टूडेंट और चीफ वार्डन के पद के बाद संस्थान में कुछ अधिकारियों की इच्छा कंट्रोल ऑफ एग्जाम का पद लेने की है, लेकिन तीन ग्रुप में बंटे संस्थान में यह पद पाना आसान नहीं होगा। बताया जा रहा है कि ये फेरबदल आपसी राजनीति, प्रशासन के नियम न मानने, अनाप-शनाप कार्य करने का दबाव बनाने के चक्कर में किए गए हैं।
सातवां पे कमीशन लागू नहीं होने पर एचएसएमटीए सख्त
मंगलवार को पुराने पे कमीशन के अनुसार वेतन मिलने पर हरियाणा स्टेट मेडिकल टीचर एसोसिएशन ने सख्त एतराज जताया है। इसमें डॉक्टरों ने रोष जताते हुए कहा है कि वह इसका बुधवार सुबह 10 से 11 बजे के बीच कुलपति कार्यालय पर विरोध करेंगे। क्योंकि निदेशक व आडिट विभाग से बातचीत के बाद भी डॉक्टरों को सातवां पे कमीशन के तहत वेतन नहीं मिला है।
एमसीआई निरीक्षण पड़ सकता है महंगा
जल्द ही संस्थान में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) निरीक्षण होना है। इस निरीक्षण के दौरान तीन गुटों में बंटे संस्थान के कुछ अधिकारियों को समस्या का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि एमसीआई के समक्ष एक समय पर एक से अधिक पद पर तैनात अधिकारियों के अलावा परीक्षक की रोटेशन समय पर न होने का सवाल स्वयं संस्थान के डॉक्टर ही उठाने की तैयारी में हैं। ऐसे में संस्थान के लिए एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो सकती है।