गौड़ कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में विद्वानों ने महिलाओं की स्थिति पर किया मंथन
जिंदगी की हकीकत से निकला हुआ साहित्य लिखती हैं महिला साहित्यकार
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक
गौड़ ब्राह्मण डिग्री कॉलेज के अंग्रेजी विभाग में रिफ्लेक्शन एंड मनिफेस्टेशंस ऑफ वूमेन इन लिटरेचर : एन ओवरव्यू विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में विद्वानों ने महिलाओं की स्थिति पर मंथन किया। यहां महिलाओं के लोकगीतों के जरिए अपने साथ हो रहे भेदभाव पर किए गए कटाक्ष को दर्शाया गया।
डायरेक्टर जनरल हायर एजुकेशन पंचकूला की प्रायोजित सेमिनार में सेवानिवृत्त आईएएस अशोक कुमार ने कहा साहित्य समाज का दर्पण होता है। आर्थिक आजादी के चलते महिलाएं स्वावलंबी बन अपना जीवन यापन करें। नारी को कमजोर या हीन नहीं समझना चाहिए। महिलाएं अपने साथ हो रहे भेदभाव को समाज के सामने रखती हैं। इसके लिए साहित्य उनका बेहतर माध्यम रहे। उन्होंने लगातार प्रयास कर न केवल भेदभाव से खुद को उबारा, बल्कि अपनी अलग पहचान भी बनाई। महिला साहित्यकारों का साहित्य जिंदगी की हकीकत से निकला होता है। इसमें सच झकझोरने वाला होता है।
जीजीएसआईपी विश्वविद्यालय दिल्ली से डॉ. अनूप बेनीवाल ने कहा कि लोकगीतों के माध्यम से भी महिलाओं ने समाज में उनके साथ हो रहे भेदभाव को दर्शाया। नारी के साथ हो रहा लिंग भेद अब भी कायम है। फिल्मों के माध्यम से भी नारी का चित्रण किया गया है। हमारी भावनाएं, जीवन का अनुभव ही साहित्य सर्जन करता है। सेमिनार के मुख्य संरक्षक नगरनिगम आयुक्त व गौड़ ब्राह्मण शिक्षण संस्थाओं के प्रशासक प्रदीप कुमार और संरक्षक गौड़ कॉलेज प्राचार्य डॉ. जेएन शर्मा ने भी अपने विचार रखे। इन्होंने अतिथियों को स्मृतिचिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।