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करोड़ों खर्च करके अधिकारी अनजान, स्कूलों में बच्चे नहीं सुन सकेंगे पीएम मोदी का भाषण

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करोड़ों खर्च करके अधिकारी अनजान, स्कूलों में बच्चे नहीं सुन सकेंगे पीएम मोदी का भाषण
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अमित कौशिक
रोहतक। लंबा तामझाम, करोड़ों खर्च, लेकिन लापरवाही और बदहाली के कारण नतीजा शून्य। राजकीय स्कूलों में बच्चों के बौद्धिक विकास को बढ़ाने और नवीनतम जानकारी देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर लाए गए अधिकतर डीटीएच और एजुसेट बॉक्स धूल फांक रहे हैं। कहीं बैटरी खराब है तो कहीं उनकी देखरेख करने वाले टेक्नीशियन पद खाली पड़ा है। हद तो यह है कि 15 अगस्त को प्रधानमंत्री का भाषण होने के बावजूद भी स्थानीय अधिकारी इन्हें ठीक कराने की बजाय पीछा छुड़ाते नजर आ रहे हैं।
दरअसल, स्वतंत्रता दिवस पर पीएम भाषण देंगे। इसके अलावा देश के इतिहास और उपलब्धि के साथ ही आम नागरिकों के लिए संदेश होगा। करोड़ों रुपये के संसाधन जुटाने के बावजूद स्कूली बच्चे इससे अवगत नहीं हो सकेंगे। अगर यह सिस्टम ठीक होते तो अध्यापक बच्चों को कार्यक्रम दिखाने के साथ ही इसकी जानकारी भी दे पाते। शिक्षा विभाग के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि बच्चों को किसी खास विषय पर जानकारी और विशेष कार्यक्रम से रूबरू कराने के लिए सरकार ने 2005 में राजकीय स्कूलों को इस तरह की सुविधा दी थी। इसके लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे। अधिकतर स्कूलों में स्पेशल डीटीएच और एजुसेट के क्लासरूम बनवाए गए थे। डीटीएच के लिए छतरी और प्लाज्मा की बड़ी स्क्रीन लगाई गई। इसके अलावा एजुसेट के लिए कंप्यूटर स्क्रीन के साथ ही स्पीकर और बैटरी सहित फर्नीचर पर खर्चा किया गया। एजुसेट के इंस्टॉल होने के बाद से ही किसी भी स्कूल में इसका प्रयोग नहीं हो सका और रखरखाव की कमी के चलते यह बेकार होते चले गए।
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शहर के एक सीनियर सेकेंडरी स्कूल मेें एजुसेट और डीटीएच के इंचार्ज ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यहां जबसे एजुसेट लगाया गया है, तभी से इसका उपयोग नहीं हो सका है। इसके अलावा डीटीएच में चंडीगढ़ से कोई प्रोग्राम निर्धारित नहीं होने की वजह से सिग्नल ही नहीं आते हैं।

क्या है डीटीएच और एजुसेट
डीटीएच सिंगल कम्यूनिकेशन का माध्यम है। इसमें विभिन्न प्रकार के नए और रोचक विषय पढ़ाए जा सकते हैं। शिक्षा विभाग की ओर से कोई भी स्कीम या सब्जेक्ट इस पर तुरंत दिखाया जा सकता है। प्रदेश के सभी स्कूलों के डीटीएच चंडीगढ़ से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा एजुसेट डबल कम्यूनिकेशन माध्यम है। इसमें दूसरी ओर से शिक्षा विभाग का कोई अधिकारी या मंत्री सीधे तौर पर बच्चों और अध्यापकों से जुड़ सकता है। इसमें दोनों ओर से सवाल जवाब किए जा सकते हैं।
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डीटीएच एजुसेट काफी जगह खराब होने की जानकारी है। बैटरी सही न होने की वजह से एजुसेट बंद पड़े हैं। टेक्निशियन का पद खाली होने से सिस्टम नहीं सुधारे जा रहे हैं।
सुनीता रुहिल, जिला शिक्षा अधिकारी
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