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दस लाख की आबादी पर महज एक गायनोकॉलोजिस्ट
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
केंद्र सरकार की मातृ सुरक्षा एवं प्रदेश की किलकारी सहित गर्भवती महिलाओं के लिए चलाई जा रही तमाम योजनाएं रेवाड़ी में मजाक बनकर रह गई हैं। हालात यह है कि जिले की दस लाख की आबादी पर महज एक डाक्टर (गायनोकॉलोजिस्ट) तैनात है। जिले के पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 13 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 113 सब सेंटर पर एक भी महिला विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात नहीं हैं। ऐसे में दूर-दराज स्थित गांवों के साथ समीपवर्ती राजस्थान की महिलाओं का जिम्मा भी रेवाड़ी स्थित 100 बेड वाले नागरिक अस्पताल पर है। यहां के हालात भी इतने खराब हैं कि यहां आने वाली हर दूसरी क्रिटिकल गर्भवती महिला को रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में समय पर सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण कई बार दो जानों की जिंदगी पर खतरा बना रहता है।
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रात के समय राम भरोसे रहती है प्रसूता की जान
नागरिक अस्पताल में चार शिफ्टों में चार महिला विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती होनी चाहिए। गायनोकॉलोजिस्ट डॉ. अर्चना पर ही चारों शिफ्ट का भार है। दिन के समय किसी तरह से डॉ. अर्चना से काम चल जाता है लेकिन रात के समय यदि यहां भर्ती प्रसूूता को विशेषज्ञ डॉक्टर की जरूरत पड़ जाए तो उसकी जान राम-भरोसे ही रहती है। जानकारी के अनुसार कई बार विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने पर गर्भवती को रोहतक या निजी अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। चार विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ करीब आठ एमबीबीएस महिला डॉक्टरों का होना जरूरी है, लेकिन नागरिक अस्पताल में महज तीन एमबीबीएस डॉक्टर ही तैनात हैं। ऐसे में गर्भवती महिलाओं की देखरेख किस तरह होती होगी। आसानी से समझा जा सकता है।
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तीस फीसदी सीजेरियन होती हैं डिलीवरी
नागरिक अस्पताल में एक महीने में औसतन 350-400 डिलीवरी होती है। इनमें से तीस फीसदी बच्चों का जन्म ऑपरेशन (सीजेरियन) से होता है। अर्थात प्रतिदिन 3-4 डिलीवरी ऑपरेशन से हो रही हैं। मेडिकल के अनुसार सीजेरियन डिलीवरी गायनोकॉलोजिस्ट ही करा सकती हैं। अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर नहीं होने के कारण परेशानी बढ़ रही है। धीरे-धीरे लोगों का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से विश्वास उठ रहा है।
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निजी अस्पतालों की हो रही है चांदी
सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरी सुविधाएं नहीं होने का फायदा सीधे तौर पर निजी अस्पतालों को मिल रहा है। जरूरतमंद लोगों का भी सरकारी व्यवस्था पर से विश्वास उठने लग गया है। ऐसे में उन्हें कर्ज लेकर डिलीवरी करानी पड़ रही है। निजी अस्पतालों में साधारण केस में 10-15 हजार और सीजेरियन केस में 40-50 रुपये का बिल बनाया जाता है। मजबूरी में लोगों को अपनी जेब कटवानी पड़ रही है। इतना ही नहीं सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था का फायदा उठाने के लिए निजी अस्पतालों ने भी अपने लोग नागरिक अस्पताल में फिट कर दिए हैं। इन लोगों ने गायनी विभाग में सेटिंग की हुई है। रेफर के लिए भी अस्पताल तक निर्धारित हैं।
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यह बात सही है कि नागरिक अस्पताल में डिलीवरी का दबाव बहुत ज्यादा है। यहां पर विशेषज्ञ के साथ अन्य डॉक्टर भी तैनात होने चाहिए। हमारी तरफ से एसएमओ और सीएमओ ऑफिस को अवगत करा दिया गया है। - डॉ. अर्चना, गायनोकॉलोजिस्ट, रेवाड़ी
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अस्पताल में महिला विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। हमारी तरफ से बेहतर सुविधा देने की कोशिश रहती है। नियुक्ति का काम आला अधिकारियों को करना है। - डॉ. सुदर्शन पंवार, कार्यकारी सिविल सर्जन, रेवाड़ी।
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