एनीमिया के कारण गर्भावस्था में बच्चे व मां दोनों की मौत होने का खतरा रहता है अधिक
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। डिलीवरी के दौरान वर्ष 2025 के अप्रैल से मार्च 2026 तक 12 प्रसूताओं की मौत हो चुकी हैं। गर्भधारण करने से लेकर डिलीवरी के 42 दिन बाद तक होने वाली मौत को प्रसूता मृत्यु में गिना जाता है। 2024 में यह संख्या 16 थी।
जिला इम्युनाइजेशन ऑफिसर डॉ. प्रतिभा खत्री ने बताया कि प्रसूता मृत्यु के अलग-अलग कारण रहते हैं। इनमें दुर्घटना, आत्महत्या व अन्य कारण शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इनका गर्भ से कुछ लेना-देना नहीं होता लेकिन गर्भावस्था के कारण इसको इसमें गिना जाता है।
इन 12 में से एक गर्भवती की मौत एनीमिया के कारण हुई है। उनकी प्रसव के बाद ज्यादा खून बहने के कारण मौत हुई है। महिलाओं में ये ही एक सामान्य कारण माना जाता है इसलिए शुरुआत से ही सावधानी आवश्यक होती है।
हर गर्भवती को जल्द अपना रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए। टीकाकरण, आयरन, कैल्शियम व अन्य दवाइयां समय पर लेनी चाहिए। एनीमिया के कारण गर्भावस्था में बच्चे व माता दोनों की मौत होने का खतरा अधिक रहता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर गर्भवती को पूरे नौ महीने के अंदर कम से कम चार बार जांच करानी चाहिए। ज्यादा से ज्यादा तीन माह में एक बार, फिर तीन महीने में एक बार व आखिर के तीन महीनों में हर 15 दिन बाद गर्भवती को जांच करानी चाहिए।
हाई रिस्क में फैक्टर
लंबाई 140 से कम हो
पहले कई बच्चे खराब हो चुके हो
पहला बच्चा सिजेरियन से हुआ हो
बच्चा गर्भ में उल्टा या टेढ़ा हो
पहले कोई गंभीर बीमारी हो
इनका हाई रिस्क कम किया जा सकता
एनीमिया के हाई रिस्क को कम किया जा सकता है। आयरन व पोषण लेकर इसको सही किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त बीपी, शुगर व अन्य को पहले ही पहचान कर बचाव किया जा सकता है।
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ऐसे कराएं रजिस्ट्रेशन
अस्पताल, पीएचसी पर जाकर बताएं गर्भवती है। एक हेल्थ बनाकर पोर्टल पर रजिस्टर्ड किया जाता है। आभा आईडी बनाई जाती है। टीकाकरण से लेकर सारी जांच की जिम्मेदारी एएनएम की होती है।