रोहतक। पब्लिक हेल्थ विभाग के दूषित पेयजल ने आम जनता को पीलिया का रोगी बना दिया है। इसके बावजूद अधिकारी मानने को तैयार नहीं हैं कि इसमें उनके विभाग की चूक है। मरीजों की सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग जरूर हरकत में आ गया है। सिविल सर्जन के निर्देशों पर बुधवार विभाग की टीम ने प्रभावित स्थानों पर जा कर पानी के सैंपल भरे हैं।
जनता कॉलोनी, न्यू राजेंद्र कॉलोनी, प्रेम नगर जैसी कई कॉलोनियों में दूषित पेयजल सप्लाई होना आम बात है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायत देने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती। अधिकांश उपभोक्ताओं ने तो थक कर अपने घरों में आरओ सिस्टम लगवा लिए हैं। विभागीय अधिकारी दूषित पेयजल सप्लाई का कारण लीकेज होना, पेयजल लाइन का पुराना होना, उपभोक्ताओं की ओर से अवैध पेयजल कनेक्शन लेना, विभागीय प्लंबराें से लाइन न जुड़वाना जैसे कई तर्क दे रहे हैं। कारण जो भी, विभाग अपने उपभोक्ताओं तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने में नाकाम साबित हो रहा है।
जनवरी से अब तक लिए 55 सैंपल में दो फेल
स्वास्थ्य विभाग के हेल्थ निरीक्षक अजय ने बताया कि जनवरी से अब तक विभाग ने 55 पेयजल सैंपल जांच के लिए भरे थे। इसमें से दो सैंपल फेल मिले, इसमें बैक्टीरिया मिला था। इसकी रिपोर्ट पब्लिक हेल्थ विभाग को दे दी गई थी। इसके साथ ही जनता कॉलोनी में बुधवार को भी चार अलग-अलग जगह से पानी के सैंपल जांच के लिए भरे गए हैं। इसकी रिपोर्ट आने पर पब्लिक हेल्थ को इसकी जानकारी दे दी जाएगी।
कुछ लोगों को मिली है पीलिया की समस्या
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. केएल मलिक ने बताया कि उन्होंने जनता कॉलोनी में पीलिया के मरीजों की केस हिस्ट्री ली है। कुछ लोगों को पीलिया की समस्या मिली है। इन्हें हैपेटाइटिस ए है, इसमें घबराने की कोई बात नहीं है, यह एक सप्ताह में ठीक हो जाता है। लोगों को पानी में डालने के लिए ब्लीचिंग की गोलियां दी गई हैं। आगे भी यह अभियान जारी रहेगा।
बोले आमजन
मेरे बच्चे आरव, अक्षिता को पीलिया की समस्या है। सप्ताह पहले गंदा पानी सप्लाई में आ रहा था। डॉक्टर ने कारण बताया तो पब्लिक हेल्थ को इसकी शिकायत की। शिकायत के कई दिन बाद पानी ठीक हुआ, लेकिन कभी-कभार पानी में बदबू अभी भी आती है।
-रितू
बेटी खुशी को पीलिया हो गया है, वह दस दिन से बीमार है। एक माह में आरओ सिस्टम का तीन बार कैंडल बदल चुके हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि पानी कैसा आता होगा। अधिकारी कोई भी सुनने को तैयार नहीं है।
-सुषमा
पोती श्रुति को पीलिया की समस्या है। कई दिनों से पानी गंदा आ रहा था। इसके लिए विभाग को कहा गया, लेकिन काम नहीं हुआ। अब हर दिन विभाग के अधिकारियों के पास जा कर कौन खड़ा रहे। अब तीन दिन से पानी ठीक आ रहा है।
-निर्मला
पानी नहीं, गंदा पानी सप्लाई में आता है। इसमें गोबर की बदबू आती है। इसे पीना तो दूर यह किसी काम का नहीं होता। बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई सुनने को तैयार नहीं है। विभाग को लीकेज की जांच करवानी चाहिए।
-होशयारी
पीने के पानी में बदबू आती है। गली में लीकेज है, यदि तलाशी जाए तो समस्या का समाधान हो सकता है। लेकिन यहां कोई आता ही नहीं है। बगैर आरओ के पानी की बूंद भी प्रयोग करना मुश्किल हो जाता है।
-संतरा
कॉलोनी में लीकेज ही लीकेज मिलेंगी। इसे सही कराना विभाग का काम है। पानी दूषित होने के चलते आए दिन जनता बीमार होती रहती है। शिकायत करने के साथ दवा करवा कर सभी परेशान हो चुके हैं।
-रानी
गलियों में धड़ल्ले से चल रही डेयरी, कैसे सप्लाई हो स्वच्छ पेयजल
राजेंद्रा कॉलोनी के लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गलियों में धड़ल्ले से डेयरी संचालित हो रही है। इनके किनारे बनी नालियों में गोबर बहता रहता है। इन्हीं के पास से पेयजल लाइन गुजर रही हैं और लीकेज होने पर यही पानी लोगों के घरों में सप्लाई के दौरान जाता है। नगर निगम इसे बाहर करवा पाने में असमर्थ है, अकेले पब्लिक हेल्थ को क्या दोष दिया जाए। यदि आपस में बोलें तो विवाद शुरू हो जाता है।
विभाग के पास जहां की समस्या आती है, वहां तत्काल टीम को भेज दिया जाता है। टीम मौके की जांच कर पेयजल सप्लाई में गड़बड़ी को रोकती है। इस लीकेज को तलाशने में कुछ समय लग जाता है। विभाग की ओर से कभी कोई ढिलाई नहीं बरती जाती। पूरी टीम को इस मामले में कोई लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
-भानू प्रताप, कार्यकारी अभियंता, पब्लिक हेल्थ
पीलिया के रोगियों का मामला संज्ञान में आने के बाद डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. केएल मलिक को जिम्मेदारी दी गई है कि वह मौके पर जा कर स्थिति का जायजा लें। इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में पानी के सैंपल भरवाए जा रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद इस संबंध में कुछ कहा जा सकेगा।
-डॉ. अनिल बिरला, सिविल सर्जन