- सुरक्षा अधिकारी और पक्के कर्मचारी के बीच चल रहे विवाद पर लगा विराम, खत्म हुई हड़ताल
30 हजार मरीज रहे 72 घंटे परेशान, विवाद खत्म होने में लगा सिर्फ एक मिनट
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। मुदई सुस्त गवाह चुस्त वाली कहावत शुक्रवार को पीजीआईएमएस के कुलपति कार्यालय में चरितार्थ हुई। यहां तीन दिन से हड़ताल चल रही थी। आरोप था कि मुख्य सुरक्षा अधिकारी ईश्वर शर्मा और उनके सहयोगी गार्ड ने एक महिला के शक जताने पर पक्के कर्मचारी बंसीलाल के साथ मारपीट की और पुलिस को सौंपा। इसके विरोध में गैर शिक्षक कर्मचारी एसोसिएशन ने मोर्चा खोलते हुए हड़ताल शुरू कर दी। तीन दिन की हड़ताल में तकरीबन 30 हजार मरीज परेशान हुए और कई आपरेशन तक रद हो गए व जांचें प्रभावित रहीं। यही नहीं हड़ताली कर्मचारियों को अनुबंधित कर्मचारी एसोसिएशन, रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन व कुछ सीनियर डॉक्टर अपना समर्थन देने भी पहुंच गए। लेकिन शुक्रवार को जब प्रशासनिक अधिकारियों ने दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठा कर अपनी-अपनी बात रखने का मौका दिया तो महज एक मिनट में सारे मनमुटाव दूर हो गए। दोनों की बातचीत में ऐसा कुछ निकल कर ही नहीं आया कि कर्मचारियों को हड़ताल करनी पडे़।
ओपीडी कार्य प्रभावित करने पहुंचे और दवा काउंटर पर जड़ा ताला
पीजीआईएमएस के गैर शिक्षक कर्मचारी एसोसिएशन के पदाधिकारी और कर्मचारी शुक्रवार को सुबह मुख्य सुरक्षा अधिकारी ईश्वर शर्मा को हटाने की मांग को लेकर हंगामे पर उतर आए। पहले कर्मचारी नेताओं ने ओपीडी में जबरन घुस कर सब कुछ बंद कराने की कोशिश की, लेकिन विरोध के चलते कामयाब नहीं हुए। कर्मचारियों ने मरीजों को ओपीडी एरिया से बाहर निकालने की कोशिश की, इसका विरोध मौके पर तैनात सुरक्षा गार्डों ने किया।
हंगामे से सहमे मरीज
हड़ताल के दौरान आक्रोशित कर्मचारी सीआरएस ओपीडी काउंटर पर गए और स्टाफ को मरीजों का कार्ड न बनाने के लिए कहा तो सभी डाटा एंट्री ऑपरेटरों ने ऐसा करने से मना कर दिया। इसके विरोध स्वरूप कर्मचारियों ने 75 नंबर कक्ष के दवा काउंटरों पर ही ताला जड़ दिया। उन्होंने फार्मासिस्टों को अपने साथ ले लिया और ओपीडी में उत्पात मचाया। सुबह मरीजों की भीड़ सारी घटना को देखकर सहम गई और अचरज में पड़ गई कि वह ऐसा करने से उन्हें कैसे रोेके। इसके बाद सभी ने ब्लड सैंपल लेने वाले लैब व थॉयराइड की जांच करने वाली लैब पर ताला जड़ दिया। इससे मरीज बेहाल हो गए। इसके चलते न तो किसी को मेडिकल स्टोर से दवा मिल रही थी और न ही टेस्ट के लिए सैंपल लिए जा रहे थे। इससे पहले की ओपीडी में जांच कराने आई जनता भड़कती घटना की सूचना मिलतेे ही मुख्य सुरक्षा अधिकारी ईश्वर शर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। इसके तुरंत बाद कुलपति डॉ. ओपी कालरा, एमएस डॉ. नित्यानंद, डीन एवं निदेशक डॉ. रोहतास यादव भी मौके पर पहुंचे। यहां प्रशासनिक अधिकारियों ने चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी को फटकार लगाई और कमरों में लगे तालों को खुलवाया।
कुर्सी पर सोती मिली महिला कर्मचारी, पूछने पर जवाब मिला सिर में दर्द है
कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान बुधवार व वीरवार दो दिन कुलपति संस्थान में नहीं थे, वह शुक्रवार को जैसे ही संस्थान में आए रजिस्ट्रार डॉ. एचके अग्रवाल व चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नित्यानंद के साथ धनवंतरी अपेक्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। अधिकारी ने अस्पताल परिसर का मुआयना किया। इस दौरान अधिकारी जैसे ही दूसरी मंजिल पर लैब में पहुंचे तो एक महिला कर्मचारी कुर्सी पर सोती मिली। इस पर अधिकारी ने फटकार लगाते हुए कारण पूछा तो महिला ने बताया कि उसके सिर में दर्द है और उसने दवा ले रखी है। इस पर अधिकारी ने कर्मचारी को घर जा कर आराम करने को कहा। वहीं अधिकारी आपरेशन थियेटर पहुंचे तो ओटी के बाहर फुट मैट व शू रैक न होने पर सवाल उठाया। इसके साथ ही प्रशासन ने हड़ताली कर्मचारियों के रुख को देखते हुए पुलिस प्रशासन को तैनात करवा दिया था। सभी को निर्देश थे कि यदि कोई भी कर्मचारी ट्रॉमा सेंटर के कार्य को प्रभावित करता है तो उसे तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
मरीजों को उठानी पड़ी असुविधाएं और उठे सवाल
- ओपीडी कार्ड बनवाने के लिए मरीजाें को घंटों कतार में लगना पड़ा
- दवा काउंटर एक ही खुला होने के चलते देर से आया नंबर
- डाटा एंट्री ऑपरेटरों से दवा बंटवाने पर उठाया गया सवाल
- मरीजों के सैंपल लेने में हुई देरी और विद्यार्थियों ने लिए सैंपल
- ओटी मास्टरों की हड़ताल के चलते ऑपरेशन सुविधाएं रही बाधित
विजय पार्क में हड़ताली कर्मचारियों ने की एमएस के खिलाफ नारेबाजी
विजय पार्क में हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों को जब समझाने चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नित्यानंद पहुंचे तो उनकी कर्मचारियों से कहासुनी हो गई। जब अधिकारी ने कर्मचारियों को ऐसा न करने के लिए कहा तो उन्हें कहा गया कि वह बीच में न पडे़। कहीं ऐसा न हो कि किसी और के चक्कर में पहले उनको उनके ही खिलाफ हड़ताल करनी पडे़। यही नहीं मौके पर अधिकारी के खिलाफ कर्मचारियों ने नारेबाजी भी की। वहीं कर्मचारियों में दोपहर से चर्चा शुरू हो गई थी कि सुरक्षा अधिकारी अब समझौता करने को तैयार हैं। इसके बाद हड़ताली कर्मचारियों के तेवर ठंडे पड़ने शुरू हो गए थे। वहीं सूत्रों की मानें तो कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर संस्थान का पदाधिकारियों का दबाव भी था कि यदि व शांति से नहीं मानेंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई होना तय है। इसमें सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, सरकारी कर्मचारी को धमकी देने जैसे मामलों को खड़ा किया जा सकता था। हालांकि, बात बिगड़ने से पहले ही मामला शांत हो गया।
पीजीआईएमएस का पक्ष
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के गैर शिक्षक कर्मचारी एसोसिएशन द्वारा तीन दिनों से की जा रही हड़ताल शुक्रवार को खत्म हो गई है। दोनों पक्षों की गलतफहमी दूर होने के बाद कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल वापिस ले ली और अपने कार्य पर लौट गए हैं। शुक्रवार को स्टोर, ओपीडी, लोंड्री व एक्सरे का कार्य कर्मचारियों ने बाधित करने की कोशिश की। इस पर कुलपति डॉ. ओपी कालरा, रजिस्ट्रार डॉ. एचके अग्रवाल, डीन व निदेशक डॉ. रोहताश यादव एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नित्यानंद ने स्वयं कमान संभालते हुए सीनियर डॉक्टरों, टीचर्स, छात्रों व आउट सोर्स स्टाफ के सहयोग से कर्मचारियों के कार्य में बाधा डालने की कोशिश को विफल कर दिया और मरीजों का इलाज पूर्ण रूप से किया। इस दौरान ट्रॉमा, इमरजेंसी व इंडोर सेवाएं सुचारू रूप से चलीं। डॉ. रोहताश यादव ने बताया कि चीफ सिक्योरिटी अफसर व कर्मचारी ने एसोसिएशन के सामने बैठकर अपनी गलतफहमी को दूर कर लिया, इसके बाद एसोसिएशन ने भी सहमती जताते हुए हड़ताल वापिस ले ली।