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दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद से अधिक खतरनाक रोहतक

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दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद से अधिक खतरनाक रोहतक
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जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स 483 पार

फोटो सहित
- स्मॉग का जिम्मेदार नौकरशाह, मानव जीवन संकट में
- पॉल्यूशन विभाग का दावा बंद करा दिए गए हैं उद्योग

अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
स्मॉग का असर मानव जीवन को गहरे संकट में डाल रहा है। दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे भीड़-भाड़ वाले और बडे़ औद्योगिक एरिया को पछाड़ते हुए रोहतक सबसे अधिक खतरनाक एरिया की श्रेणी में आ गया है। एयर क्वालिटी इंडेक्स के अनुरूप रोहतक में रविवार को 483 एक्यूआई का मानक दर्ज किया गया।
शहर में बढ़ते प्रदूषण का जितना जिम्मेदार आमजन है, उससे अधिक इसके लिए जिम्मेदार नौकरशाह है। क्योंकि समय रहते नियमों को ताक पर रख कर प्रदूषण फैलाने वालों पर कोई लगाम नहीं लगाई जाती। जब समस्या विकट रुप लेती है तो सारी जिम्मेदारी किसानों पर पराली जलाने पर डाल कर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया जाता है। जबकि प्रदूषण उत्पन्न करने वाले वाहनों, औद्योगिक इकाइयों, निर्माण कार्यों को इसका जनक मानने को भी कोई तैयार नहीं होता। रविवार को दिल्ली का एक्यूआई 481, गुरुग्राम का 463, फरीदाबाद 470 दर्ज किया गया। जबकि गाजियाबाद में 498 और नोएडा में 487 एक्यूआई दर्ज किया गया।
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कोई अपनी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं : दहिया
वरिष्ठ सर्जन एवं समाजसेवी डॉॅ. आरएस दहिया ने बताया कि प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंचने की नैतिक जिम्मेदारी कोई लेने को तैयार नहीं है। विकसित देश भी पर्यावरण में प्रदूषण का कारण भी तीसरी दुनिया पर थौंप देते हैं। इसकी मुख्य वजह कई हैं, लेकिन हर बार बात किसानों की पराली पर डाल दी जाती है। फिलहाल इससे बचने के लिए जरूरी है कि खुले में न जाएं, जितना समय हो इनडोर एक्टिविटी ही करें। वरिष्ठ सर्जन ने बताया कि एक मानक के अनुसार प्रदूषण के कारणों में 51 फीसदी उद्योग, 25 फीसदी यातायात, एक प्रतिशत उपभोक्ता और कामर्शियल प्रोडक्ट, 11 फीसदी कामर्शियल एंड रेजिडेंटल हीटिंग, चार अन्य व 8 फीसदी ही कृषि से संबंधित होती है।

पॉल्यूशन सर्टिफिकेट भी बने हैं मजाक
शहर के विभिन्न पेट्रोल पंपों में से कुछ पर पॉल्यूशन सर्टिफिकेट लेना मजाक बना हुआ है। यहां बगैर जांच के रुपये दे कर सर्टिफिकेट लेना आसान है। यही नहीं शहर में घूम रहे भारी वाहन और सबसे अधिक आटो चालकों की बात करें तो इनके पास पॉल्यूशन के सर्टिफिकेट हैं भी या नहीं यह किसी को नहीं पता। प्रशासन दबाव में आकर इनके कागज तक जांचने की जहमत नहीं उठाता।

फैक्ट्री करवा दी गई हैं बंद, ईंट-भट्ठा पहले से हैं बंद : मलिक
पॉल्यूशन विभाग के एसडीई अजय मलिक ने बताया कि फैक्ट्रियों को बंद करवा दिया गया है। इसके अलावा जिले में 146 ईंट-भट्ठा हैं, ये पहले से ही बंद हैं। जो र्दो इंट-भट्ठा संचालित हो रहे हैं, वह नई तकनीक के हैं। इसके अलावा जो प्रदूषण फैला रहे हैं, उनको नोटिस दिया जा रहा है। इन पर जल्द ही कार्रवाई करके सील किया जाएगा।


जीआरपी ने नो पार्किंग में खडे़ वाहनों को हटवाया
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
जीआरपी ने रविवार को रेलवे स्टेशन पर जांच अभियान चलाते हुए नो पार्किंग जोन में खड़े वाहनों को हटवाया। अधिकारियों ने वाहन चालकों को निर्देश देते हुए कहा कि उनके कारण यात्रियों को परेशानी होती है। जो लोग यात्रियों को छोड़ने या लेने के लिए आते हैं, वह पार्किंग में वाहन खड़ा करना सुनिश्चित करें।
जीआरपी थाने से नरेंद्र सिंह, बीरेंद्र सिंह, बलवान सिंह, कपूर सिंह, रणबीर की टीम ने रविवार को रेलवे स्टेशन की व्यवस्था संभालने के लिए रेलवे परिसर में खडे़ वाहनों की जांच की। इसके साथ ही प्लेटफार्म पर भी यात्रियों का सामान भी जांचा गया। मौके पर पुलिस अधिकारियों ने यात्रियों को अपना सामान सुरक्षित रखने और सुरक्षित यात्रा करने के टिप्स दिए। वहीं पुलिस ने नियमों को तोड़ने वाले वाहन चालकों का चालान भी किया।
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स्मॉग के चलते ये ट्रेन रही लेट
- 12138 फिरोजपुर से सीएसटी मुंबई, पंजाब मेल सवा छह घंटे
- 14036 पठानकोट से दिल्ली सवा पांच घंटे
- 16032 वैष्णो देवी कटरा से अंडमान साढ़े पांच घंटे
- 13007 उद्यान आभा तूफान एक्सप्रेस पांच घंटे
- 14723 कालिंदी एक्सप्रेस साढ़े पांच घंटे
- 14625 छिंदवाड़ा एक्सप्रेस 11 घंटे 46 मिनट
- 12481 दिल्ली-श्रीगंगानगर इंटरसिटी एक्सप्रेस 13 घंटा 42 मिनट
- 14519 किसान एक्सप्रेस दो घंटा सात मिनट
- 15909 अवध असम एक्सप्रेस 12 घंटा 19 मिनट
- 12555 गोरखधाम एक्सप्रेस साढ़े आठ घंटा
- बरेली इंटरसिटी एक्सप्रेस रद्द

30 फीसदी बढ़ी मरीजों की ओपीडी : डॉ. ध्रुव
पीजीआईएमएस में पीसीसीएम विभागाध्यक्ष एवं आपातकालीन विभाग के प्रभारी डॉ. ध्रुव चौधरी ने बताया कि इन दिनों स्मॉग ने मरीजों की संख्या में 30 फीसदी इजाफा किया है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि सुबह और शाम को आउटडोर कार्य न करें। अभी सांस लेने और आंखों में जलन जैसी समस्या आ रही है। यदि ऐसा ही रहा तो आने वाले समय में इसके मरीजों की संख्या में इजाफा होगा। आवश्यक होने पर ही बाहर निकले और थ्री लेयर और एन-95 मास्क का प्रयोग करें। बाहर जाने वालों को ध्यान देने की जरूरत है कि यह मास्क भी कोई स्मॉग से बचने का स्थायी समाधान नहीं हैं। जब तक तेज हवा या बरसात नहीं होती, इससे राहत मिलने वाली नहीं है। सुबह और शाम तापमान घटने के दौरान प्रदूषण का स्तर कई गुणा बढ़ जाता है।

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