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सावधान! जिला अस्पताल में चोरों का बोलबाला

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सावधान! जिला अस्पताल में चोरों का बोलबाला
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
जिला अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारियों के चलते लगातार चोरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। अस्पताल से कभी नवजात तो कभी एलईडी तक चोरी हो जा रही है। यहां तक की ऑपरेशन थियेटर से मॉनिटर तक चोरी हो गया। इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारी चोरों का पता नहीं लगा सके। सुरक्षा अधिकारियों की मानें तो कैंपस की सुरक्षा के लिए 30 सुरक्षाकर्मियों की जरूरत है, जबकि 16 सुरक्षाकर्मियों से काम चलाया जा रहा है।
अस्पताल की सुरक्षा के लिए महज 16 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। इसमें छह सुरक्षाकर्मी सुबह और चार-चार सुरक्षाकर्मी शाम और रात को ड्यूटी पर रहते हैं। इन पर निगरानी रखने के लिए एक सुपरवाइजर की तैनाती की गई है। सुरक्षा की जिम्मेदारी उठा रहे डॉ. अभिनव ने विभाग से 30 सुरक्षाकर्मियों की डिमांड की थी। इसके बाद भी सुरक्षाकर्मी नहीं मिले। दो हजार के तकरीबन ओपीडी को संभालने के लिए महज छह सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है, इसमें से एक सुरक्षाकर्मी लेबर रूम के लिए लगाया होता है। ऐसे में सुरक्षाकर्मियों के अभाव में अस्पताल में अकसर असामाजिक तत्व वारदात को अंजाम देते रहते हैं।
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हो चुकी हैं वारदात
जिला अस्पताल के महिला वार्ड से पहले नवजात बच्चा चोरी हुआ। इसके बाद एक एलईडी और आपरेशन थियेटर से मॉनिटर तक चोरी हो गया। इनके मामले पुलिस में दर्ज हैं।

सीसीटीवी की मॉनिटरिंग भी नहीं
जिला अस्पताल में की सुरक्षा के नाम पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, लेकिन इनका भी कोई लाभ नहीं मिल रहा है। कैमरों की निगरानी के लिए पांच मॉनिटर लगाए गए हैं। हालांकि सुरक्षाकर्मियों को एक भी मॉनिटर नहीं दिए गए, जिससे वह अस्पताल परिसर में नजर बनाए रखे। घटना होने के बाद अधिकारी और पुलिस सीसीटीवी की फुटेज खंगालती है। फुटेज में आरोपी का चेहरा ढका होने की वजह से उसे पहचानना मुश्किल हो जाता है।

कमजोर सुरक्षा के चलते हो सकता है बड़ा हादसा
अस्पताल की कमजोर सुरक्षा व्यवस्था के चलते यहां ओपीडी के बाद अगले दिन सुबह ओपीडी शुरू होने तक सभी गेट बंद कर दिए जाते हैं। मरीजों और डॉक्टरों के लिए एक मुख्य गेट खोल कर रखा जाता है। जबकि अस्पताल परिसर में मुख्य गेट के अलावा सभी गेटों को खुला रखा जाना चाहिए। अन्य गेटों को इमरजेंसी में हादसों से बचने के लिए लगाया गया है। इसके बावजूद इन गेटों को बंद रखा गया है। ऐसे में कमजोर सुरक्षा के चलते किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।

सुरक्षा ठेकेदार का पक्ष
जिला अस्पताल के हिसाब से काफी कम सुरक्षा कर्मचारी की तैनाती की गई है। इससे समस्या हो जाती है, 30 सुरक्षा कर्मचारी लगने की विभाग की और से डिमांड की गई है। इसके पूरा होते ही कोई समस्या नहीं होगी। इसके अलावा सुरक्षा सुपरवाइजर के पास सीसीटीवी की मोनीटरिंग की कोई व्यवस्था नहीं है।
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- अमित, सुपरवाइजर, निजी सुरक्षा कर्मचारी

बोले अधिकारी
जिला अस्पताल की सुरक्षा के उचित प्रबंध किए गए हैं। जो गेट सायं बंद रहते हैं वह कार्यालय के हैं। वार्ड की ओर जाने के लिए आपात विभाग का गेट खुला रहता है। इसके अलावा सुरक्षा कर्मचारी बढ़ाने के लिए अधिकारियों के पास डिमांड भेजी गई है।
- डॉ. रमेश चंद्र, चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
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