डीएसपी से बात कर बढ़ा तनाव, मांगें मानने पर 55 घंटे बाद लिया शव
अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी।
जिला अस्पताल की मोर्चरी में शव रख करीब 55 घंटे से धरना दे रहे मृतक बलजीत के परिजन और ग्रामीण रात आठ बजे शव लेने के लिए तैयार तो हो गए, लेकिन घंटों तनाव बना रहा। धरना उठाने से इनकार के बाद जिला प्रशासन ने अस्पताल परिसर में धारा 144 लगा दी। साथ ही सभी को आठ बजे तक धरना खत्म करने का अल्टीमेटम दे दिया। डीएसपी से वार्ता बेनतीजा होने के बाद खुद एसपी को अस्पताल आना पड़ा। मृतक के लड़के विकास और शिकायतकर्ता को गनमैन मुहैया कराने, परिवार के पांच सदस्यों को सुरक्षा तौर पर हथियारों के लाइसेंस देने, आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एसआईटी के गठित करने, आरोपियों की गिरफ्तारी होने तक गांव में पुलिस फोर्स तैनाती का आश्वासन एसपी से मिलने के बाद परिजन शव लेने के लिए तैयार हुए।
बडेसरा गांव में शनिवार को पंचायती चुनाव की रंजिश में हुए खूनी संघर्ष में पूर्व सरपंच के चचेरे भाई बलजीत सिंह की मौत हो गई थी, जबकि पांच अन्य घायल हो गए थे। पुलिस ने शिकायत पर सरपंच, उसके पति समेत 54 लोगों के खिलाफ हत्या, हत्या की कोशिश का केस दर्ज किया था। रविवार को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी होने के बाद ही शव लेने का ऐलान कर दिया था। परिजन 55 घंटे तक अपनी मांग पर अड़े रहे। मंगलवार को दिन में दो बार परिजनों, ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र भौरिया से उनके कार्यालय में मुलाकात की। मगर, फैसला नहीं हो सका। इसके बाद एडीसी ने अस्पताल परिसर में धारा 144 लागू कर दी। देर शाम करीब पौने आठ बजे पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र भौरिया अस्पताल में धरने पर बैठे परिजनों और ग्रामीणों के पास पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों और परिजनों को आश्वासन दिया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए डीएसपी विजय देशवाल के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर दी गई है। मांगे मान लिए जाने के बाद रात करीब आठ बजे परिजन और ग्रामीण धरना उठाने के लिए तैयार हुए। साथ ही लिखित में दिया कि वे सुबह शव ले लेंगे।
धारा 144 और अल्टीमेटम के बाद बढ़ा तनाव
पुलिस प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद मृतक बलजीत के परिजन और ग्रामीण धरना उठाने और शव लेने के लिए नहीं माने। इसके बाद शाम को एडीसी धीरेंद्र खड़गटा ने अस्पताल परिसर में धारा 144 लागू कर दी। बताया कि धरने से अव्यवस्था फैल रही है और शव तीन दिन से अस्पताल में रखा है। इससे बीमारी भी फैल सकती है। आदेशों की कॉपी अस्पताल परिसर में चस्पा की गई तो हड़कंप मच गया। इसी दौरान शहर थाना प्रभारी बिक्रम सिंह अस्पताल पहुंचे और धरना देने वालों को चेतावनी दी कि आठ बजे तक धरना समाप्त कर दें, वरना कार्रवाई होगी। इससे तनाव और भी बढ़ गया। आठ बजे से पहले ही पुलिस अधीक्षक ग्रामीणों के बीच पहुंच गए।
बेटी और मां की हालत बिगड़ी
शनिवार को बड़ेसरा गांव में जमीदार बलजीत की हत्या के बाद मंगलवार सुबह मृतक की मां रिसाली देवी और बेटी नीरज की तबीयत बिगड़ गई। दोनों को उपचार के लिए इमरजेंसी में भर्ती करवाया गया। मृतक की बेटी लगातार रोये जा रही थी। उसका भाई विकास और अन्य परिजन उसे ढांढस बंधा रहे थे।
डीएसपी पर बरसे ग्रामीण
ग्रामीणों के बीच पहुंचे पुलिस अधीक्षक के समक्ष परिजनों ने डीएसपी चंद्रपाल के खिलाफ भड़ास निकाली। परिजनों ने बताया कि पहले भी हत्या प्रयास के मामले में डीएसपी ने कोई कार्रवाई नहीं होने दी। पुलिस अधीक्षक ने ग्रामीणों को इस मामले की भी जांच का आश्वासन दिया।
आरोप : पुलिस को आरोपियों का पता, नहीं की रेड
तालू गांव में हत्या के दो मुख्य आरोपी एक घर में छुपे थे। हमारे एक साथी ने इसकी सूचना दी। पुलिस अधिकारियों को सूचित किया गया। बावजूद इसके आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए रेड नहीं की। यह आरोप है मृतक बलजीत के लड़के का। उन्होंने आरोप लगाया कि एक डीएसपी मामले में कार्रवाई नहीं होने दे रहा और वहीं आरोपियों को बचा रहे हैं।
बलजीत की हत्या का मामला दर्ज है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। शिकायतकर्ता और मृतक के बेटे को सुरक्षा के तौर पर गनमैन दिए है। गांव में चौकी तो नहीं बनाई जा रही, मगर मामले के शांत होने और आरोपियों की गिरफ्तारी होने तक पुलिस फोर्स तैनात रहेगी। परिजनों ने डीएसपी की शिकायत की है, जिसकी जांच करवाई जाएगी।
सुरेंद्र भौरिया, पुलिस अधीक्षक