अमर उजाला ब्यूरो
हांसी।
नगर परिषद में एजेंडा को लेकर शुरू हुआ हंगामा अब दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। एजेंडा फेल करवाने की मांग को लेकर 17 पार्षदों ने डीसी के नाम पत्र लिखा है। हालांकि पार्षदगण हिसार में डीसी से मिलने पहुंचे। लेकिन डीसी के मौके पर न मिलने पर उन्होंने एजेंडा फले करवाने को लेकर पत्र लिखा है। पार्षदगणों का कहना है कि वह वीरवार को इस संबंध में डीसी से मुलाकात करेंगे।
पत्र में कहा गया है कि नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी ने एजेंडा प्रस्ताव को लेकर आपसे मार्गदर्शन मांगा है। कार्यकारी अधिकारी द्वारा भेजा गया एजेंडा गैरकानूनी और गुमराह करने वाला है। पत्र में उन्होंने स्वयं लिखा है कि 29 में से 16 सदस्यों ने एजेंडा के 1 से लेकर 52 प्रस्तावों को अस्वीकृत किया है, जबकि समर्थन में मात्र 13 ही पार्षद है। 13 पार्षदों में एक वोट सभा अध्यक्षा का भी शामिल है। इस प्रकार 3 वोटों से ये प्रस्ताव गिर गए।
कहा, एजेंडा पास हुआ तो खटखटाना पड़ेगा कोर्ट का दरवाजा
नगर परिषद के संशोधित कानून हरियाणा 26 ऑफ 2006 के हरियाणा म्यूनिसिपल एक्ट 1973 में संशोधित 14ए के अनुसार मनोनीत सदस्यों को भी आम सभा में पूर्ण रूप से भाग लेने का अधिकार है। पार्षदगणों ने इस पत्र के साथ नियम की कॉपी भी साथ लगाई। पत्र में पार्षदगणों ने मांग करते हुए कहा कि नगर परिषद का 52 प्रस्तावों का एजेंडा फेल किया जाए। अन्यथा मजबूरन सभी पार्षदों को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर होना पड़ेगा। पत्र पर वाइस चेयरपर्सन डॉ. श्री शर्मा, पार्षद रीता शर्मा, सुमन शर्मा, हरपाल कौर, ममता सैनी, आशीष उर्फ पिंकू, विनोद सिंगला, अशोक ढालिया, धर्मवीर रतेरिया, बेबी सिंगला, अनिता बंसल, सुभाष चन्द्र, सतीश चुचरा, सुरेन्द्र कुमार, अजय सैनी, प्रवीन ऐलावादी, पवन सोलंकी को मिला कर कुल 17 पार्षदों के हस्ताक्षर है।
वहीं बता दें कि नगर परिषद में एजेंडा को लेकर हुए हंगामे के चलते शहर के विकास कार्य बिगड़ने के आसार है। वैसे ही नगर परिषद के अधीन आए शहीद लाला हुक्म चंद जैन पार्क और आमटी झील अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे है। शहर में मूलभूत समस्याओं की भरमार है। इसके चलते लोगों पर इसकी मार पड़ने वाली है। सामाजिक कार्यकर्ता भप्पी जैन ने कहा कि आमटी झील की हालत इतनी दयनीय हो चुकी है कि लोगों का वहां से गुजरना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।