80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आया तूफान, पेड़, खंभे और होर्डिंग गिरे, अंधेरे में रहा शहर
घरों में कैद हुए लोग, रात 10:10 बजे पर शहर में चलनी शुरू हुई तेज हवाएं, महम, लाखनमाजरा, सांपला में भी धूल के साथ ही दृश्यता हो गई थी शून्य
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
शहर में 80 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से आए तूफान से कई जगह पेड़ गिरे, बिजली के खंभे गिरने से पूरे शहर की बिजली गुल होने से शहर अंधेरे में रहा। चौराहों पर लगे फ्लैक्स बोर्ड भी उखड़कर नीचे आ गए। करीब एक घंटे तक चले तूफान ने लोगों को घरों में कैद कर दिया। शहर के बाहरी इलाके महम, लाखनमाजरा और सांपला आदि क्षेत्रों में भी तूफान से लोगों की धड़कने बढ़ गई। धूल भरी हवाओं से दृश्यता शून्य हो गई, सड़क पर गुजर रहा यातायात जहां का तहां रुक गया। हालांकि गनीमत रही कि कहीं पर किसी के हताहत होने की सूचना नहीं रही, इसकी वजह रही पहले ही जारी की गई चेतावनी, जिसकी वजह से लोग सतर्क रहे।
रोहतक में रात करीब 10 बजे तेज हवाएं चलनी शुरू हुई। महज 10 मिनट के बाद ही 10:10 बजे हालात बेकाबू हो गए। तेज हवाओं ने छोटे-छोटे चक्रवात का रूप ले लिया और अपने साथ धूल को गोल-गोल घूमाने लगीं। इसके साथ ही तूफान की तीव्रता तेज होने लगी। दिल्ली बाईपास के पास वेव गार्डन का गेट गिरकर टूट गया। अशोका चौक पर लगे होर्डिंग और फ्लैक्स तेज हवा में टूटकर सड़क पर गिर गए। जाट कॉलेज के पास समेत अशोका चौक के पास समेत दो दर्जन से अधिक जगहों पर पेड़ गिरे। चौराहे पर लगे फ्लैक्स बोर्ड गिर पड़े। करीब एक घंटे तक तूफान तेजी से चलता रहा, इस दौरान बूंदाबांदी होने धूल कुछ कम हुई। रात करीब 11:14 बजे तूफान की गति में कुछ कमी आई थी। इसके साथ ही रात पौने 12 बजे बौछार तेज होने पर हवा में धूल कम हुई। जिसके बाद कुछ राहत हुई, लेकिन हवाओं का चलना जारी रहा। रात सवा 12 बजे बारिश होने लगी। जिससे मौसम में ठंड आ गई। इस दौरान शहर में जगह-जगह पर रेहड़ी पलट गए थे। घरों की छत पर रखे सेट टॉप बॉक्स गिर गए। दुकानों के तिरपाल, स्टूल, साइकिल भी गिरीं हुई थीं।
तूफान की चेतावनी के बाद भी नहीं हुआ उठान
लाखनमाजरा। मौसम की तूफान की चेतावनी के बाद सरकार ने प्रदेश में अलर्ट जारी कर दिया। और शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी निजी व सरकारी स्कूलों की दो दिन की छुट्टी कर दी। सभी विभागों को ड्यूटी पर सतर्क कर दिया गया, लेकिन सरकार ने मंडियों में गेहूं के उठान के लिए कोई कदम नहीं उठाया। लोगों का कहना है कि तूफान को देखते हुए मंडियों में गेहूं को बचाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। जिला ग्रामीण महिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं प्रमुख समाजसेवी निर्मला राठी ने कहा कि जिस तरह स्कूलों की छुट्टियां कर सरकार ने तूफान की चेतावनी को स्वीकार किया, उसी प्रकार मंडियों में गेंहू को उठाने के लिए भी तत्परता से कदम उठाने चाहिए थे। पूर्व सरपंच एवं इनेलो नेता जगपाल राठी उर्फ कुल्फी पहलवान ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तूफान की चेतावनी को देखते हुए सरकार को सख्त आदेश देकर गेहूं के उठान का प्रबंधन करना चाहिए। किसानों की मेहनत सरकार की गलत नीतियों की भेंट चढ़ जाती है।