ऑपरेशन के कपड़े पहनाए, इंजेक्शन दिया और बाद में कर दिया इनकार
- दिनभर इंतजार के बाद भी नहीं हुआ मरीज का ऑपरेशन, अब तक तीन बार हुआ है रद
- अकाउंट विभाग की लापरवाही भुगत रहा मरीज
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विभाग विश्वविद्यालय में अकाउंट विभाग की लापरवाही का खामियाजा एक मरीज को भुगतना पड़ रहा है। पथरी के मरीज को यूरोलॉजी विभाग ने तीन बार ऑपरेशन की तारीख दी, लेकिन तीनों पर आपरेशन रद करना पड़ा। इसकी वजह मरीज को बीपीएल खाते के तहत नि:शुल्क दवा नहीं मिलना बताया जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि यदि मरीज की दवा स्टोर में नहीं आई तो मरीज को ऑपरेशन की डेट ही क्यों दी जा रही है।
मेवात के तावडू निवासी प्रमिला ने बताया कि उसके पति गजे सिंह को पथरी की समस्या है। वह पीजीआई में चार माह पहले उपचार के लिए आए थे। चिकित्सक उपचार के लिए गजे सिंह को बीच-बीच में बुलाते रहते हैं। 23 अगस्त को उसका पहला कार्ड बना था, जांच में उसे तीन पथरी मिली। एक पथरी पेशाब की थैली में थी, वह निकल गई। जबकि दो पथरी किडनी में हैं। इसे निकालने के लिए डॉक्टर ने ऑपरेशन की सलाह दी और कहा कि वह उन्हें 27 नवंबर को फोन करे उनका आपरेशन 28 नवंबर को कर दिया जाएगा।
जब उन्होंने फोन किया तो डॉक्टर ने 27 को अस्पताल आने से मना कर दिया और कहा कि वह सीधे 28 को आ जाए। रास्ते में समस्या के चलते वह लेट हो गए और पीजीआईएमए में ढाई बजे पहुंचे। इस पर डॉक्टरों ने ऑपरेशन से मना कर दिया। इस पर उन्होेंने कहा कि वह 27 को ही आ रहे थे, लेकिन फोन पर मना कर दिया गया। काफी कहने के बाद डॉक्टरों ने 28 को मरीज को दाखिल किया। लेकिन बुधवार को ऑपरेशन टल गया, उन्हें आश्वासन दिया गया कि उनका ऑपरेशन शुक्रवार एक दिसंबर को कर दिया जाएगा।
मरीज को रात को दवा दी गई और दस बजे से खाना पीना रुकवा दिया गया। उसे ऑपरेशन के कपडे़ पहना दिए गए और इंजेक्शन तक लगा दिया गया, लेकिन मरीज को आपरेशन टेबल पर नहीं ले जाया गया। सायं चार बजे डॉक्टर ने कहा कि वह अगले सप्ताह बुधवार को मरीज को ले आए, ऑपरेशन कर दिया जाएगा। डॉक्टर ने ट्यूब व नीमा तक मंगा लिया था, लेकिन ऑपरेशन नहीं किया। महिला ने बताया कि शुक्रवार को उनके आगे आठ ऑपरेशन किए गए, लेकिन उनका और एक अन्य मरीज का नंबर नहीं आया।
महिला ने बताया कि उनके पति को कानों से कम सुनाई देता है, परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं है। उन्होंने डॉक्टर से जब गुहार लगाई तो उन्हें बताया गया कि उनका सामान ही नहीं मिल पाया, इसके लिए उन्होेंने फार्म भर कर भेज रखा है। महिला प्रमिला ने बताया कि जब वह संस्थान के बीपीएल कार्यालय में गई तो पता चला उसके पैसे तो आ गए हैं, लेकिन स्टोर में पैसे नहीं आए। इसके लिए कहा जा रहा है कि पहले वह पुराने बिलों का हिसाब करें तो दवा आएंगी।
बोले अधिकारी
अकाउंट विभाग की अड़चनों के चलते मरीज परेशान होते हैं। पिछले चार-पांच माह से समस्या हो रही है। लेकिन मरीज की समस्या का समाधान किया जाएगा। उनके संज्ञान में अभी तक मामला नहीं था, वह इस समस्या का हल जरूर निकलवा देंगे।
- डॉ. आरबी जैन, नोडल अधिकारी बीपीएल शाखा, पीजीआईएमएस
पिछले दिनों तकरीब एक माह नवीनीकरण के चलते ऑपरेशन थियेटर बंद रहा है। इसके चलते मरीजों की वेटिंग अधिक चल रही है। डॉक्टर को जब तक सामान नहीं मिलेगा वह ऑपरेशन कैसे कर सकता है। बाकी इस मामले में संबंधित विभाग से बात की जाएगी।
- डॉ. प्रशांत, प्रोफेसर इंचार्ज, पीआर विभाग, हेल्थ विश्वविद्यालय