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स्वाइन फ्लू बनता जा रहा मुसीबत, 10 में से पांच की मौत

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अमर उजाला ब्यूरो
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रोहतक।
स्वाइन फ्लू से लोगों को न घबराने की नसीहत देने वाले स्वास्थ्य विभाग के खुद होश उड़े हैं। पिछले दिनों स्वाइन फ्लू से पांच मौत विभाग के लिए मुसीबत बन गई है। अलर्ट के बावजूद 10 में से पांच मरीजों की मौत ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए।
पीजीआई और स्वास्थ्य विभाग में तालमेल नहीं है। यही नहीं निजी अस्पतालों से भी स्वास्थ्य विभाग को पूरी जानकारी नहीं मिल पा रही है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि उसे सही समय पर डाटा के साथ जानकारी नहीं दी जा रही है। इस संबंध में शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग ने पीजीआईएमएस प्रशासन से इसकी शिकायत की है। विभाग की मानें तो स्वाइन फ्लू से चार मौतों का पहले खुलासा हो चुका है, जबकि पानीपत की एक अन्य महिला की भी मौत हो चुकी है। इसके बारे में विभाग को नहीं बताया गया।
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इएनटी विभाग से नहीं हो रही समय पर जांच
पीजीआईके आपातकालीन विभाग में स्वाइन फ्लू के मरीजों को उपचार दिया जा रहा है। लेकिन यहां आने वाले मरीजों के जांच सैंपल लेेने की जिम्मेदारी इएनटी विभाग की है। स्थिति यह है कि विभाग के बुलाने के बाद भी डॉक्टर कई घंटों तक मौके पर नहीं आते। इस संबंध में आपात विभाग ने संबंधित विभाग के अधिकारी से बात की है।

पीजीआई संक्रमण की जद में
पीजीआई में प्रतिदिन सात से दस हजार मरीज स्वाइन फ्लू का उपचार कराने आते हैं। इसमें से कई मरीजों को स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण होते हैं। इसमें जब तक मरीज की पुष्टि नहीं हो जाती वह सामान्य मरीजों के बीच रहते हैं। कई बार तो स्थिति यह होती है कि स्वाइन फ्लू के मरीजों को वार्डों में अन्य मरीजों के साथ रखा जाता है। वार्ड दो में एक गर्भवती महिला को शुक्रवार स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि हुई है। जबकि वह पिछले तीन दिनों से वार्ड में दाखिल थी। इससे आशंका बढ़ गई है कि ऐसे मरीज अन्य मरीजों को संक्रमित न कर दें। स्वयं डॉक्टर भी मानते हैं कि उनके यहां आइसोलेशन के पर्याप्त इंतजाम नहीं है। इसके संक्रमण को फैलने से कोई रोक भी नहीं सकता।
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बोले अधिकारी
हम स्वाइन फ्लू के मरीजों के उपचार का पर्याप्त इंतजाम कर रहे हैं। जो प्रफोर्मा को लेकर समस्या आ रही है, उसका प्रबंध कर दिया गया है। स्वाइन फ्लू के मरीज का जैसे ही पता चलता है उसे अलग रखा जाता है।
- डॉ. संदीप, डीएमएस, आपातकालीन विभाग, पीजीआई
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