पहाड़ों के पानी से उफान पर हैं जिले की नहरें
चरखी दादरी।
पहाड़ों पर हो रही बारिश के कारण पानी आने से जिले की नहरें लगातार उफान पर हैं। नहरों में क्षमता से अधिक पानी आने पर अब ओवरफ्लो होने का खतरा बनने लगा है। इसलिए सिंचाई विभाग को अतिरिक्त पानी रिजर्व टैंक में उतारना पड़ रहा है ताकि नहरों के ओवरफ्लो होने पर किसानों की फसलें बर्बाद न हो जाए। सिंचाई विभाग के अधिकारी लगातार नहरों की मॉनीटरिंग करने का तर्क दे रहे हैं। जिले की नहरों में पिछले करीब एक माह से लगातार पानी चल रहा है। मेन लोहारू नहर के घिकाड़ा पंप हाउस में 35 पंप लगे हैं जिनमें से 27 वर्किंग में हैं शेष पंप खराब पड़े हैं। इसी प्रकार बधवाना नहर पर सात पंप हैं जिनमें से पांच पंप ही काम कर रहे हैं। किसी पंप की मोटर जली हुई है तो कोई पंप लंबे समय से खराब पड़ा है।
पिछले दिनों हुई बारिश के बाद नहरी पानी की मात्रा में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा इस बार जिले में अधिकतम 900क्यूसेक तक पानी पहुंचा है। इसलिए सिंचाई विभाग अधिकारियों ने पत्र लिखकर पानी की मात्रा कम करने को लिखा है ताकि नहरों के ओवरफ्लो होने से बचाया जा सके। अगर आने वाले समय में और बारिश हो जाती है तो हालात बेकाबू होना स्वाभाविक है। लोहारू नहर में पीछे से 200 क्यूसेक पानी कम करवाया गया है ताकि नहर ओवरफ्लो न होने पाए। मेन लोहारू नहर के अलावा, बधवाना, मैहड़ा डिस्टीब्यूटरी, कितलाना डिस्टीब्यूटरी, सतनाली फीडर सहित सभी नहरों में पानी क्षमता से ज्यादा चल रहा है। जिले की मेन लोहारू नहर का अतिरिक्त पानी गांव रावलधी के समीप बने रिजर्व टैंक में डालना पड़ रहा है ताकि नहर का पानी ओवरफ्लो होकर आसपास के खेतों व गांवों में नहीं जमा हो जाए।
जर्जर पंप हाउस से नहीं हो पा रहा पूरे पानी का उठान
मेन लोहारू नहर के घिकाड़ा पंप हाउस में 35 पंप लगे हैं जिनमें से 27 वर्किंग में हैं शेष पंप खराब पड़े हैं। इसी प्रकार बधवाना नहर पर सात पंप हैं जिनमें से पांच पंप ही काम कर रहे हैं। किसी पंप की मोटर जली हुई है तो कोई पंप लंबे समय से खराब पड़ा है।
नहरों की छंटाई न होना भी प्रमुख कारण
नहरों की समय- समय पर छंटाई न होना भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। नहरों में मिट्टी और गाद का जमाव बना रहता है जिससे इनकी पानी की क्षमता कम हो जाती है। छंटाई न होने पर 50 से 100 क्यूसेक पानी की क्षमता घट जाती है। दो रोज पहले जिले की दो मेन नहरें टूट चुकी हैं जिससे करीब 10 एकड़ जमीन में खड़ी खरीफ की फसलें खराब हो चुकी हैं। बधवाना नहर गांव ढाणी फौगाट के समीप ओवरफ्लो हो गई थी । इसी प्रकार गांव रामबास के समीप नहर टूटने से कई किसानों की फसलों में नुकसान हो गया था।
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नहरों में पीछे से पानी कम करवाया जा रहा है ताकि पानी पर नियंत्रण बनाया रखा जा सके और ओवरफ्लो की स्थिति पैदा न होने पाए। नहरों की लगातार निगरानी रखी जा रही है।
एसडीओ वीरेंद्र लाकड़ा, सिंचाई विभाग