भारत बंद रहा बेअसर, तीन दिन बाद खुले बाजार
भिवानी।
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल की ओर से आहूत भारत बंद शहर में बेअसर रहा, लेकिन ग्रामीण इलाकों में असर दिखा। कपड़ा व्यापारियों ने तीन दिन की हड़ताल के बाद शुक्रवार को भारत बंद से दूरी बनाए रखी। व्यापारियों-दुकानदारों ने सुबह बाजार के बीच हवन कर जीएसटी मसले पर सरकार को सद्बुद्धि देने की भगवान से प्रार्थना की और दुकानें खोली। दुकानें खुलने के चलते तीन दिन बाद बाजारों में रौनक लौटी। दो जुलाई के शादी मुहूर्त के लिए लोग खरीदारी करने उमड़े। वहीं कपड़ा व्यापारियों, दुकानदारों ने दोपहर बाद डीसी को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर जीएसटी के सरलीकरण की मांग रखी। भिवानी शहर में भले ही भारत बंद बेअसर रहा हो मगर लोहारू, ढिगावा व कुछ अन्य जगह मंडियां बंद रही।
भारत बंद के आह्वान के तहत शुक्रवार को कपड़ा व्यापारी व अन्य दुकानदार बिचला बाजार चौक पर एकत्रित हुए। यहां हवन के बाद दुकानदारों ने अपनी दुकानें खोली। बरसात के बावजूद दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ रही। इसका कारण दो जुलाई का शादी मुहुर्त माना जाना जा रहा है। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिला प्रधान भानुप्रकाश शर्मा ने बताया कि जीएसटी को लेकर आज भारत बंद का आह्वान किया था। कपड़ा मार्केट को छोड़ जिलेभर में मंडियां बंद रही है। व्यापारियों ने कहा कि जीएसटी पर नियमावली के संबंध में विभिन्न राज्यों के वित्त मंत्रियों से राय भले ली गई हो लेकिन यह देश के लिए अनुकूल नहीं है। इस मौके पर गिगराज जैन, रितेश मित्तल, गिरधारीलाल, नवीन गुप्ता, राकेश गौड़, लक्ष्मण, देवराज महता, प्रेम धमीजा, लवली, प्रवीण गर्ग, हेमु, कृष्ण कुमार, अर्जुन मिढ्ढा आदि मौजूद रहे।
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30 प्रतिशत से ज्यादा के पास नहीं जीएसटी नंबर
विभाग के अनुसार भिवानी में नौ हजार से अधिक व्यापारी, दुकानदार ऐसे है जो जीएसटी के दायरे में आते है। उनमें से करीब 70 फीसदी ने जीएसटी नंबर ले लिया है और बाकी अभी लंबित है। यानी तीन हजार व्यापारी, दुकानदारों के पास अभी भी जीएसटी नंबर नहीं है।
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ये हैं मुख्य मांग
* माह में तीन रिटर्न के स्थान पर एक तिमाही रिटर्न
* विक्रेता यदि जीएसटी जमा नहीं करवाता है तो खरीददार की जिम्मेवारी न हो।
* जीएसटी की उच्चतम दर 15 फीसदी से अधिक न हो। रिटर्न की व्यवस्था ऑनलाइन व मैनुअल दोनों होनी चाहिए।
* मंडी शुल्क को जीएसटी में शामिल किया जाना चाहिए।
* कपड़ा, ब्रांडेड अनाज, तिलहन, कृषि यंत्र, कीटनाशक एवं जीवन की आवश्यक वस्तुएं जीएसटी से मुक्त होने चाहिए।
टैक्स भरने से अच्छा है ग्राहकों को ही छूट दे
जीएसटी में स्टॉक पर भी टैक्स का प्रावधान है और इलेक्ट्रानिक्स दुकानदारों को 28 प्रतिशत टैक्स देना होगा। ऐसे में दुकानदारों ने खुद नुकसान उठाते हुए 30 से 40 फीसदी तक डिस्काउंट देकर सामान बेचने में लगे रहे। दुकानदारों का कहना था कि सरकार को टैक्स के रूप में देंगे इससे बेहतर है कुछ नुकसान उठाकर उपभोक्ताओं को ही बेच दे। विजय इलेक्ट्रानिक संचालक विजय टुटेजा ने बताया कि वे 30 फीसदी तक स्टॉक में रखे पुराने सामान पर सेल दे रहे हेै।
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घबराएं नहीं दुकानदार, व्यापारी
जीएसटी में घबराने की जरूरत नहीं। पहले जो हिसाब तीन-चार महीने में दुकानदार, व्यापारी लगाते थे, वो अब हर महीने लगाना होगा। बस इतना ही फर्क है। जीएसटी नंबर लेने व स्टॉक की जानकारी देने के लिए सरकार ने जुलाई का पूरा महीना दिया है। चिंतित सिर्फ चोरी करने वाले दुकानदारों को है। चोरी की जहां भी शिकायत मिलेगी, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जगजीत सिंह, डीईटीसी