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पीजीआईएमएस सुरक्षा गार्ड मामले में कुलपति ने ली निजी कंपनी और अधिकारी की क्लास

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पीजीआईएमएस सुरक्षा गार्ड मामले में कुलपति ने ली निजी कंपनी और अधिकारी की क्लास
सुरक्षा गार्डों के हड़ताल पर जाने के मामले पर जुर्माना लगाने के निर्देश

प्रकाशित समाचार की फोटो प्रति 12 जुलाई को माई सिटी के पेज संख्या छह पर
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ओपी कालरा ने संस्थान में सुरक्षा गार्डों की हड़ताल और निजी कंपनी की ओर से देरी से बिल जमा कराने के मामले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए निजी कंपनी व सुरक्षा का जिम्मा देख रहे डीएमएस की क्लास लगा दी। अधिकारी ने सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा कि नियमानुसार हड़ताल करने और लेट बिल जमा कराने के मामले में निजी कंपनी पर जुर्माना किया जाए। साथ ही सख्त हिदायत दी है कि यदि 15 दिन के अंदर व्यवस्था सही नहीं होती तो कंपनी का ठेका रद्द कर दो।
सूत्रों के अनुसार, कुलपति डॉ. ओपी कालरा ने सुरक्षा गार्डों की छह व दस जुलाई की हड़ताल पर कड़ा संज्ञान लेते हुए वीरवार को अपने कार्यालय में सुरक्षा अधिकारियों, निजी कंपनी के अधिकारियों के साथ बैठक कर हड़ताल पर सवाल खडे़ किए हैं। अधिकारी ने सुरक्षा कंट्रोल रूम की ओर से जारी पत्रों पर संज्ञान न लेने के लिए डीएमएस व अकाउंट विभाग की भी खिंचाई की है। अधिकारी ने स्पष्ट कहा कि जब संस्थान में नियमों को तोड़ा गया है तो इन पर अभी तक जुर्माना क्यों नहीं लगाया गया है। वहीं बैठक में रोस्टर बनाने के मामले पर उठे सवाल पर कहा गया कि अभी तक इस पर विवाद नहीं हुआ, अब क्या सवाल उठाया जा रहा है। इसमें निर्णय हुआ कि निजी कंपनी अपने स्तर पर रोस्टर बना ले। लेकिन यदि गड़बड़ी हुई तो वह अंदर जाने की तैयारी कर ले, वह गड़बड़ी करने वाले को नहीं छोडे़ंगे। एक कंपनी पहले से ही अंदर जाने वाली है।
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वहीं बैठक में कहा गया कि हाजिरी के समय निजी कंपनी का व्यक्ति तीनों शिफ्टों में अनिवार्य रूप से रहेगा। गौरतलब है कि सुरक्षा कंट्रोल रूम की ओर से लगातार पांच पत्र जारी किए गए थे, लेकिन अधिकारी इसकी अनदेखी कर रहे थे। बताया जा रहा है कि 12 जुलाई को भी दो पत्र जारी किए गए हैं, इसके बाद कुलपति ने आपात बैठक बुला कर सभी की क्लास ले ली। इस मुद्दे को अमर उजाला ने 12 जुलाई के अंक में ‘पांच पत्र जारी होने के बाद भी अधिकारी मौन’ शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
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