जहरीली सब्जियों का सैंपल नहीं ले पा रहे स्वास्थ्य विभाग ने बताई मजबूरी
‘जांच रिपोर्ट फेल मिलने पर किसे भेजें नोटिस’
या
-- सही पता न होने के चलते स्वास्थ्य विभाग नहीं लेता जहरीली सब्जियों के सैंपल, बताई मजबूरी
सैंपल फेल होने पर सब्जी विक्रेता को किस पते पर भेजें नोटिस
- जांच रिपोर्ट फेल होने पर संबंधित विक्रेता को कोर्ट में करना होता है पेश
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। ड्रेन नंबर आठ के आसपास उगाई जा रही जहरीली खेती की जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, पर्यावरण विभाग और सिंचाई विभाग जहां अनदेखा करता है, वहीं स्वास्थ्य विभाग इन खेतों में उगाई जा रही जहरीली सब्जियों का सैंपल इसलिए नहीं भरता कि जांच रिपोर्ट फेल आने पर वह नोटिस किसे भेजेगा। रिपोर्ट फेल होने पर विभाग के ऊपर दबाव होता है कि वह संबंधित व्यक्ति को कोर्ट में पेश करे। लेकिन सही पता न होने के चलते आरोपी फरार होता है और स्वास्थ्य विभाग उसकी तलाश कर रहा होता है।
स्वास्थ्य विभाग की मानें तो वह मजबूर है, क्योंकि जांच के दौरान यदि मंडी में सैंपल ले भी लिया जाए तो वह सब्जी विक्रेता को बाद में कहां से तलाश कर लाएगा। क्योंकि उसका मौके पर न तो कोई स्थायी स्थान होता है और न ही उसके पास मौके पर कोई पहचान पत्र मिल पाता है। विभाग के लिए खाद्य व पेय पदार्थों के सैंपल भरना आसान है, लेकिन रिपोर्ट फेल आने पर उसकी मुसीबत बढ़नी शुरू हो जाती है। इसलिए वह अकसर प्रयास करते हैं कि स्थायी दुकानदार या नामी कंपनी के यहां ही सैंपल भरें। यदि सैंपल फेल आता है तो वह उस पर कम से कम कार्रवाई तो कर सकते हैं। विभाग स्वयं मानता है कि शहर के लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जाता है, लेकिन ऐसा करने वाले अकसर बाहरी होते हैं। कार्रवाई के लिए इन लोगों को तलाशना उनके बस में नहीं होता। विभाग की मानें तो छापे के दौरान कोई अपराधी नहीं होता, वह जो पता बताता है दर्ज कर लिया जाता है। समस्या उस समय शुरू होती है जब सैंपल फेल होने पर उनकी तलाश की जाती है। कोई बाहरी होता है तो कोई झुग्गी में रह रहा होता है, किसी के पास पहचान पत्र होता है तो वह नकली होता है।
यह हार्ड समाचार है, कृपया इसे बाक्स में हाई लाइट करें।
सैंपल फेल आया, लेकिन कार्रवाई किस पर करें
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। स्वास्थ्य विभाग की मानें तो लगभग तीन माह पहले उन्होंने जनता कॉलोनी में नकली घी बनाने वालों के यहां छापामारी कर जांच सैंपल भरे थे। यहां मौके पर मिले सभी व्यक्ति गुजराती थे। जब सैंपल रिपोर्ट फेल आई है तो अब डेढ़ माह से आरोपी मिल ही नहीं रहे। अब पुलिस और स्वास्थ्य विभाग दोनों ही परेशान हैं कि नकली घी बनाने वालों को कहां से तलाश कर लाएं। अब विभाग ने मजबूरी में दुकान मालिक को ही नोटिस दिया है। आधार कार्ड पर दिए गए पते तक सही नहीं होते। ऐसा ही मामला सांपला में नकली देसी घी की बरामदगी में भी आया है। जांच रिपोर्ट में यहां का सैंपल फेल आ गया है, लेकिन नकली घी बनाने और बेचने वालों का अभी तक सुराग नहीं लग सका है।
अधिकारी का दर्द
सैंपल रिपोर्ट फेल आने पर कोई नोटिस लेने वाला ही नहीं होता। जांच के दौरान हम किसी के पहचान पत्र की जांच नहीं कर पाते कि वह असली है या नकली। अधिकांश गलत चीज बेचने वाले अस्थायी रिहायश वाले होते हैं, इन्हें पूरे देश में कहां तलाशें। सैंपल फेल की रिपोर्ट आने पर ये गायब हो जाते हैं। इससे विभाग की कार्रवाई उल्टे हम पर ही भारी पड़ जाती है। हाल ही में शीला बाईपास स्थित एक डिपार्टमेंटल स्टोर में लिए गए पनीर का सैंपल भी फेल आया है। इस संबंध में प्रबंधन को नोटिस दिया जाएगा।
- डॉ. केएल मलिक, उप सिविल सर्जन