नोट : आईआईएम व एमडीयू का फोटो प्रयोग करें।
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एनआईआरएम रैंकिंग : आईआईएम रोहतक 8 स्थान खिसका
- यूनिवर्सिटी वर्ग में एमडीयू को केयूके से बेहतर रैंकिंग
विकास सैनी
रोहतक।
मानव संसाधन मंत्रालय ने नेशनल इंस्टिट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) के तहत 9 वर्गों में इंडिया रैंकिंग 2018 जारी की है। इस सूची में सबसे बड़ा झटका आईआईएम रोहतक को लगा है, पिछले साल के मुकाबले संस्थान आठ स्थान लुढ़क गया है। वहीं ओवरऑल वर्ग में हिसार कृषि विश्वविद्यालय को 76वां स्थान मिला है।
एनआईआरएफ की ओर से जारी सूची को देखें तो सभी नौ कैटेगरी में टॉप-20 में हरियाणा कहीं भी नहीं ठहरता। सुनारिया में इसी महीने करीब 215 करोड़ की लागत से तैयार हुए आईआईएम (भारतीय प्रबंधन संस्थान) की 2017 में मैनेजमेंट वर्ग में 19वीं रैंकिंग थी। इस साल संस्थान आठ अंक खिसक कर 27वें नंबर पर पहुंच गया है।
ओवरऑल रैंकिंग में हिसार कृषि विश्वविद्यालय ने इस बार टॉप 100 में जगह बनाई और 76वीं रैंकिंग पाई। इसी वर्ग में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय टॉप 100 से बाहर हो गया जबकि पिछले साल रैंकिंग 95 थी।
यूनिवर्सिटी वर्ग में देखें तो हिसार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी 50वें स्थान पर है। हालांकि पिछले साल विश्वविद्यालय टॉप 100 में भी नहीं था। एमडीयू को इस बार 76वीं रैंक मिली। वहीं यूनिवर्सिटी वर्ग में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की रैंकिंग 59 से इस बार 21 स्थान गिरकर 80 पहुंच गई है।
इंजीनियरिंग वर्ग में एनआईटी कुरुक्षेत्र ने रैंकिंग में 17 अंकों का सुधार किया है। संस्थान 60वें स्थान से 43वें नंबर पर आ गया। वहीं एनआईटीज में इसे 6वीं रैंक मिली है।
फार्मेसी वर्ग में पीजीआई रोहतक के फार्मेसी कॉलेज को 38वीं रैंक मिली। जीजेयू हिसार की रैंकिंग तीन अंक गिर कर 44 से 47 पर पहुंच गई। वहीं एमडीयू के फार्मास्यूटिकल साइंस डिपार्टमेंट का नाम इस साल सूची से ही गायब है। पिछले वर्ष विभाग 28वें नंबर पर था।
पीजीआई रोहतक के फार्मेसी कॉलेज को 38वीं रैंक
रोहतक। एचआरडी मिनिस्ट्री की ओर से जारी सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग में पीजीआईएमएस रोहतक के फार्मेसी कॉलेज को देश में 38वीं रैंक मिली है। प्रदेश में अव्वल इस कॉलेज में 2008 के बाद डिग्री कोर्सेस शुरू हुए थे। हेल्थ विवि रोहतक के फार्मेसी कॉलेज में वर्तमान में स्नातक की 60 और परास्नातक की पांच-पांच सीट हैं। कॉलेज में फार्मास्यूटिकल और फार्मास्यूटिकल बायो टेक्नोलॉजी में मास्टर डिग्री प्रोग्राम भी हैं। कॉलेज प्राचार्य डा. गजेंद्र सिंह ने बताया कि इस उपलब्धि के लिए फैकल्टी और स्टाफ की भूमिका अहम रही है। यहां के विद्यार्थी अपने दम पर गेट व जीपैट की परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। संस्थान के चार विद्यार्थी अब तक पीएचडी कर चुके हैं। बेहतर रैंकिंग आने पर कॉलेज के पूरे स्टाफ में खुशी है।