सुनोसरकार! समस्याएं हजार, कब तक करें इंतजार...
रेवाड़ी। यूं तो रेवाड़ी को पीतल नगरी के नाम से जाना जाता है, लेकिन इसके साथ-साथ इसे चुनौतियों का जिला कहें तो अति श्योक्ति नहीं होगी। मूलभूत सुविधाओं से लेकर गैंगवार की घटनाओं तक, शिक्षा से लेकर प्रशासनिक व्यवस्थाओं तक कदम-कदम पर चुनौतियों से निपटने की जरूरत आज जिले में नजर आ रही है। प्रदेश के विकास में अभूतपूर्व स्थान रखने वाले जिले के धारूहेड़ा और बावल औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित करीब 1200 इकाइयों से राज्य सरकार को अच्छा-खासा राजस्व प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त पांच लाइनों को जोड़ने वाले रेवाड़ी के रेलवे जंक्शन का इतिहास अपने आप में अनोखा है। कई फिल्मों की शूटिंग के लिए मशहूर रहा रेवाड़ी राजनीतिक क्षेत्र में भी अच्छी पहचान रखता है। इसके बाद भी रेवाड़ी समस्याओं का अंबार है। पग-पग पर आने वाली इन समस्याओं से आमजन को मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। तीन सितंबर को रेवाड़ी में मुख्यमंत्री आ रहे हैं। पिछली बार की तरह इस बार भी लोगों को मुख्यमंत्री से बहुत सी उम्मीदें हैं, वहीं पिछली घोषणाओं को शुरू कराने की भी आस है। विशाल जैमिनी की रिपोर्ट से आइए नजर डालते हैं कि जिले में कौन-कौन सी कई मुख्य समस्याएं हैं जिनका जल्द निराकरण होना जरूरी है।
सड़कों का बुरा हाल : जिलेभर में सड़कों का बुरा हाल है। शहर की ही बात करें तो दिल्ली रोड पर धारूहेड़ा चुंगी से केएलपी कॉलेज तक, सेक्टर एक, बावल रोड, सचिवालय से अनाज मंडी तक सहित अन्य जगह सड़कें खराब हैं। कई जगह तो खाली मिट्टी दिखती है। जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानी होती है।
जाम बिगाड़ रहा काम : जाम की समस्या रेवाड़ी के लिए बहुत पुरानी है। वाहनों के अव्यवस्थित संचालन से यह परेशानी अधिक बढ़ जाती है। इसमें ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की कमी भी काफी हद तक जिम्मेदार है। जिले में महज 38 ट्रैफिक पुलिसकर्मी हैं। जिन्हें हाइवे से लेकर शहर तक की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है।
डंपर का डर : शाम ढलते ही सर्कुलर रोड से गुजरने वाले डंपर यमदूत से कम नहीं है। तेजी से गुजरने वाले इन डंपरों से कई बार हादसे हो चुके हैं। नाईवाली, अंबेडकर चौक, बस स्टैंड, अभय सिंह चौक आदि जगहों पर इन डंपरों से हादसे हुए हैैं। अभय सिंह चौक और अंबेडकर चौक पर इन हादसों में मौत हुई थी।
स्वास्थ्य सेवा जीरो : बावल सीएचसी की हालत इन दिनों खस्ता है। यहां न तो डॉक्टर हैं और न ही पर्याप्त चिकित्सकीय उपकरण। इससे यह सीएचसी महज रेफरल प्वाइंट बनकर रह गया है। कर्मचारियों के अभाव में यहां सफाई भी पर्याप्त नहीं हो पाती।
बेपटरी सफाई व्यवस्था : शहर में सफाई का बुरा हाल है। शहर से करीब 100 टन कूड़ा प्रतिदिन निकलता है। लेकिन निस्तारण व्यवस्था नहीं होने से यह शहर की गलियों के साथ बाहरी निकलने वाली सड़कों के किनारों पर सड़ता है। हालांकि रामसिंहपुरा में बनने वाले कूड़ा निस्तारण संयंत्र बनने का रास्ता साफ हो गया है। लेकिन इसके बनने तक बाधा बनी रहेगी।
पानी बन रहा परेशानी : भिवाड़ी के औद्योगिक क्षेत्र से आकर धारूहेड़ा में भरने वाले दूषित पानी की समस्या भी बहुत बड़ी है। यह मामला एनजीटी में चल रहा है। कई बार इस संबंध में कई बार सरकार को फटकार भी लग चुकी है। इस पानी से किसानों की फसलें खराब हो जाती है। लेकिन अभी तक इस मामले का कोई भी निस्तारण नहीं हुआ।
नगर परिषद में काम रुके : राज्य सरकार के बदलने के बाद भी नगर परिषद में विवादों की झड़ी लग गई। पहले विकास से अधिक सारा जोर कांग्रेस समर्थित चेयरपर्सन को हटाने पर लगा रहा। लेकिन अब भाजपाइयों की ही आपसी गुटबाजी से नगर परिषद के सारे काम लटक गए हैं। नगर परिषद में विकास कार्यों के टेंडर भी हुए, लेकिन वह सब कुछ विवादों में लटके रहे।
धारूहेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया का हस्तांतरण : 1976 में बना धारूहेड़ा का इंडस्ट्रियल एरिया पूरे देश में अमिट छाप छोड़ता था। यहां करीब 100 औद्योगिक इकाइयां है। लेकिन हुडा और एचएसआईआईडीसी के बीच जमीन हस्तांतरण के विवाद के चलते यहां विकास रुका है। इंडस्ट्रियल एरिया बनने के बाद अभी तक सड़कें नहीं बनी हैं। वहीं इकाइयों के लिए भी कोई भी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं है।
लावारिश पशु : सड़कों पर डेरा डाले लावारिस पशु आमजन के लिए बड़ी परेशानी पैदा कर रहे हैं। कई बार इनसे हादसे हो जाते हैं। पिछले दिनों अभय सिंह चौक के समीप एक बाइक चालक की टक्कर से मौत हो गई थी। कई बार इसके लिए प्रयास होते हैं, लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति के अभाव में सब कुछ सिफर ही रहता है।
वाचनालय : शहर के बड़ा तालाब के पास स्थित बाल मुकुंद गुप्त पुस्तकालय का उद्घाटन साल 1992 में हुआ था। यह प्रदेश का सबसे पहला सरकारी वाचनालय था। शुरुआत में तो सबकुछ ठीक रहा। लेकिन आज इसकी बहुत खराब हो चुकी है। देखरेख के अभाव में वाचनालय खंडहर बनता जा रहा है। पुस्तकों की जगह यहां कबाड़ भरा है। इससे पाठकों को बहुत परेशानी हो रही है।
राशन की मारामारी : राज्य सरकार की ओर से राशन वितरण प्रणाली ऑनलाइन करने से उपभोक्ताओं को काफी परेशानी आ रही है। जिलेभर में करीब एक लाख राशन कार्ड हैं। पिछले दिनों राशन के लिए बायोमीट्रिक सिस्टम शुरू करने के बाद से ही कई उपभोक्ता राशन से वंचित रह गए हैं। इसका कारण उपभोक्ताओं के अंगूठे का मिलान नहीं होना है।
खेलों में सुविधा नहीं : शहर का राव तुलाराम स्टेडियम जिले का सबसे बड़ा स्टेडियम है। यहां फुटबॉल के लिए प्रदेश स्तर का मैदान है। लेकिन यहां निकलने वाले चूहों ने इसकी दुर्गति कर रखी है। चूहों ने जगह-जगह गड्ढे बना दिए हैं। वहीं यूं तो स्टेडियम में लाखों रुपये के विकास कार्य हो रहे हैं, लेकिन इनका बार-बार रुकना भी परेशानी पैदा कर देता है। स्टेडियम में कोचों का भी अभाव है।
अवैध वाहन : शहर में अवैध वाहनों का भी संचालन जोरों पर हैं। अधिकतर बसें एक चक्कर की अनुमति से लेकर कई चक्कर लगा रही हैं। वहीं रूट भी बढ़ा रही है। जिससे हादसे होते रहते हैं। वाहन चालक मनमाफिक जगह पर बसों को खड़ा देते हैं, जिससे जाम लग जाता है।
अतिक्रमण की मार : शहर में अतिक्रमण की समस्या भी बड़ी है। नगर परिषद की ओर से इनके खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। लेकिन इसका कोई समाधान ही नहीं निकल पाता। पिछले दिनों नगर परिषद सभी बाजारों में अतिक्रमण हटाने में सहयोग की बात भी कही थी। लेकिन हाल अभी भी वही है।
क्राइम पर कंट्रोल नहीं : शहर में अपराध भी चरम पर है। शहर में आए दिन गैंगवार होती रहती हैं। गत सप्ताह ही गैंगवार में तीन युवकों की मौत हो गई। शहर में गैंगवार को मुख्य कारण अवैध शराब की बिक्री है। जिसके कारण यहां कई गैंग बने हैं। वहीं आसपास के क्षेत्र में भी अपराधों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है।
शहर की समस्याओं के निदान के लिए निरंतर प्रयास किए जाते हैं। फिर भी अगर कोई कमी रह गई है तो उसका भी शीघ्र निदान किया जाएगा। - कुशल कटारिया, एसडीएम, रेवाड़ी
मुख्यमंत्री से रेवाड़ी के लिए काफी कुछ मांगेंगे। पिछली घोषणाओं पर भी चर्चा की जाएगी। रेवाड़ी के विकास में कोई कसर नहीं रहेगी।
-रणधीर सिंह कापड़ीवास, विधायक, रेवाड़ी
हमारे हलके में मुख्यमंत्री की पुरानी घोषणाएं बाकी हैं। हालांकि इन पर काम किया जा रहा है। लेकिन शेष घोषणाओं को पूरी करने सहित नए विकास कार्य भी चर्चा की जाएगी। -विक्रम सिंह यादव, विधायक, कोसली
हालांकि बावल हलके में काफी विकास कार्य कराए गए हैं। इसके बाद भी हम सीएम से अन्य विकास कार्यों पर चर्चा करेंगे। -डॉ. बनवारीलाल, जन स्वास्थ्य राज्यमंत्री