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दो लाख में से महज दो लोगों ने डाउनलोड किया स्वच्छता ऐप, फीडबैक में भी फिसड्डी

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सर्वेक्षण के दौरान सवाल पूछते टीम का सदस्य। - फोटो : Rewari
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चार जनवरी से प्रदेश भर में शहरी विकास मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 शुरू हो चुका है। कुल 6 हजार में से 1500 अंक सिटीजन फीडबैक, स्वच्छता ऐप डाउनलोड करने, वोट फॉर योर सिटी एप व कॉल कर फीडबैक के दिए जाने हैं। लेकिन जिले की रेवाड़ी नगर परिषद (नप) के साथ धारूहेड़ा व बावल नगर पालिकाएं (नपा) सभी मामलों में फिसड्डी हैं।
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रेवाड़ी नप की बात करें तो यहां करीब दो लाख की आबादी वाले शहर में महज दो लोगों ने स्वच्छता एप डाउनलोड किया है। वहीं मंत्रालय के सिटीजन फीडबैक पोर्टल पर अपनी राय देने वालों में महज 37 लोग शामिल हैं। धारूहेड़ा व बावल नपा में एक भी व्यक्ति ने स्वच्छता ऐप डाउनलोड नहीं किया। वहीं फीडबैक भी महज एक-एक व्यक्ति ने ही दिया है।
वोट फोर योर सिटी एप में सहकारिता मंत्री का कस्बा फिसड्डी
स्मार्ट फोन के प्ले स्टोर में जाकर वोट फॉर योर सिटी ऐप के माध्यम से भी लोग अपनी राय शहर की स्वच्छता के बारे में दे सकते हैं। लेकिन यहां पर भी हालात कुछ ज्यादा अच्छे नहीं हैं। प्रदेश के सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारी लाल के कस्बे बावल की नपा में महज 16 लोगों ने इस एप को डाउनलोड किया है। धारूहेड़ा में 89 व रेवाड़ी नप में 237 लोग की ऐप डाउनलोड करने के लिए आगे आए।
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1996 पर कॉल कर दे सकते हैं फीडबैक, अभी तक एक भी नहीं
सिटीजन फीडबैक के तहत आईवीआर नंबर 1996 पर कॉल पर भी शहर के नागरिक अपना फीडबैक दे सकते हैं। तीनों नगर निकायों की बात करें तो एक भी व्यक्ति ने कॉल कर फीडबैक नहीं दिया। इसका एक बड़ा कारण लोगों को इसकी जानकारी नहीं होना है। लेकिन लोगों को जानकारी देना भी नप अधिकारियों का जिम्मा था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।
सवाल: क्या गलत फीडबैक के डर से बचना चाहते हैं जिम्मेदार
शहर के सेक्टर-1, 3 व 4 में ठेकेदार के 60 सफाईकर्मी सफाई कार्यों में लगे हुए हैं। जबकि शहर के अंदर व बाहरी कॉलोनियों में स्थायी व डीसी रेट पर लगे हुए करीब 320 सफाई कर्मचारियों पर हर रोज सफाई का जिम्मा होता है। सेक्टर को छोड़ दिया जाए तो पुराने शहर व बाहरी कॉलोनियों के लोगों में सफाई नहीं होने से जिम्मेदारों के प्रति रोष है। कई ऐसी गलियां है, जहां पर सफाई कर्मचारी 10 से 12 दिन में एक बार पहुंचते हैं। ऐसे में यदि यहां के लोग सर्वे में अपने राय देंगे तो उनकी राय क्या होगी आसानी से समझा जा सकता है। ऐसे में सवाल है कि आखिर क्या नगर निकाय अधिकारी लोगों को सर्वे से दूर रखना चाहते हैं। यदि ऐसा नहीं होता तो शहर के लोगों को सर्वे के बारे में जानकारी होती। क्योंकि आम आदमी तो दूर शहर के पार्षदों को सर्वेक्षण के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। पार्षदों का आरोप है कि नप अधिकारियों की ओर से उनको किसी भी तरह की जानकारी नहीं दी गई है। या फिर नप अधिकारी लोगों तक सर्वे की जानकारी ही नहीं देना चाहते हैं, क्योंकि सेक्टर व पार्षदों के घरों के आसपास के स्थानों को छोड़ दिया जाए तो अभी भी सफाई कर्मी गलियों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
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