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विश्व हेपेटाइटिस दिवस : समय पर जांच और उपचार से बीमारी को दी जा सकती है मात

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रेवाड़ी। हेपेटाइटिस बी और सी का इलाज अब नागरिक अस्पताल में संभव है। लोगों को इसके प्रति जानकारी रखनी चाहिए। हेपेटाइटिस एक ऐसी बीमारी है, जिससे लीवर सिरोसिस सहित अन्य बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है। उक्त जानकारी नागरिक अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. रणवीर सिंह ने दी है।
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उन्होंने बताया कि बीमारी के बारे में जागरूकता के लिए ही 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। नागरिक अस्पताल में इस वर्ष अब तक 46 मरीज हेपेटाइटिस सी के मरीज आ चुके हैं, जिनमें 37 लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 9 मरीजों का इलाज चल रहा है। इसके अलावा हेपेटाइटिस बी के 17 लोगों का इलाज चल रहा है।
नागरिक अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. रणवीर सिंह ने बताया कि पहले जिले में बीमारी का इलाज लोगों को प्राइवेट अस्पतालों में कराना होता था। इसमें एक महीने का खर्चा करीब 50 हजार रुपये आता था। हेपेटाइटिस बी की जांच के लिए मरीज को 7 हजार रुपये और हेपेटाइटिस सी की जांच के लिए 6 हजार रुपये देने होते थे। अब इस बीमारी के इलाज की सुविधा नागरिक अस्पताल में हो गई है, यहां पर हेपेटाइटिस सी व बी के करीब 26 मरीज इलाज करा रहे हैं।
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शराब का सेवन करने वाले रहें सावधान
डॉ. रणवीर सिंह बताया कि आमतौर पर शराब के शौकीनों को यह बीमारी अधिक होती है। अगर समय पर इलाज कराया जाए तो लोग ठीक हो सकते हैं। इस बीमारी से छुटकारा मिल सकता है। उधर, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सीमा यादव के अनुसार, गर्भावस्था में हेपेटाइटिस की जांच कराना बहुत जरूरी है। इससे जच्चा-बच्चा दोनों की सेहत ठीक रहती है। हेपेटाइटिस वायरस को पांच प्रकार यथा ए, बी, सी, डी और ई के रूप में जाना जाता है। यह सभी लीवर को प्रभावित करते हैं।
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डीसी ने आमजन से की हेपेटाइटिस से बचाव व सतर्क रहने की अपील
डीसी अशोक कुमार गर्ग ने विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर आमजन को जागरूक करते हुए बीमारी से बचाव रखने व सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस एक वायरल बीमारी है। उन्होंने बताया कि अब हेपेटाइटिस बी और सी का इलाज संभव है। आमजन को इसके बारे में जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस एक ऐसी बीमारी है, जिससे लीवर सिरोसिस सहित अन्य बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि यह बीमारी किसी भी उम्र में और किसी को भी हो सकती है, लेकिन बच्चों में इस बीमारी के होने की आशंका अत्यधिक प्रबल मानी जाती है। इसमें मुख्य रूप से रोगी का लीवर प्रभावित होता है। हेपेटाइटिस लीवर की सूजन है, ये लीवर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। इस वायरस के 5 स्ट्रेन होते हैं जिन्हें हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी, ई के नाम से पहचाना जाता है। इनमें से ए और ई संक्रमित खाने और पानी से फैलते हैं, जबकि हेपेटाइटिस बी सेक्सुअल कॉन्टैक्ट से फैलता है। इसके अलावा संक्रमित खून चढ़ाने से भी हेपेटाइटिस का खतरा बना रहता है।
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हेपेटाइटिस के लक्षण
-त्वचा और आंखों का रंग पीला होना।
-मूत्र का रंग गहरा पीला हो जाना।
-अत्यधिक थकान, उल्टी आना।
-पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द।
-भूख कम लगना, बुखार आना।
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बचाव के उपाय
- साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- टैटू के लिए स्टरलाइज नीडल का इस्तेमाल करें।
- सुरक्षित शारीरिक संबंध बनाएं।
- अपने टूथब्रश और रेजर किसी के साथ साझा न करें।
- विशेषकर टॉयलेट से आने के बाद सफाई का ध्यान रखें।
- दूषित पानी पीने से बचें।
- डॉक्टर की दी हुई दवाइयों का ओवर-डोज न लें।
- शराब, तंबाकू और धूमपान की लत से बचें।
- पौष्टिक और सुपाच्य आहार लें, वजन नियंत्रित रखें।
- किसी बीमारी का ट्रीटमेंट ले रहे हैं तो लिवर का भी ध्यान रखें।
- योग, व्यायाम और टहलने की आदत डालें।
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