रेवाड़ी। हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष उषा प्रियदर्शी ने बुधवार को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में आयोग आपके द्वार कार्यक्रम के तहत महिला संबंधी मामलों की सुनवाई की। इस दौरान रेवाड़ी-महेंद्रगढ़ की 19 शिकायतों में से दो मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी के आदेश दिए। 14 मामलों निपटारा किया गया। इस दौरान एक बुजुर्ग महिला ने मारपीट का आरोप लगाते हुए वीडियो पेश किया। इसे देखकर अध्यक्ष ने आरोपी बेटे की गिरफ्तारी के निर्देश दिए।
शहर परशुराम कॉलोनी निवासी कमला देवी (71) ने बेटे नवीन यादव की शिकायत की। आरोप लगाया कि बेटा उनको घर से निकालने का प्रयास कर रहा है और मारपीट करता है। 8 अगस्त को वह घर में अकेली थी, तभी नवीन घर में घुसा और गाली-गलौज व मारपीट की। उसने पटक दिया, उसके कपड़े फाड़ दिए। सोने के कुंडल छीनकर ली।
बताया कि चोट लगने के बाद 8 से 10 अगस्त तक सरकारी ट्रॉमा सेंटर में भर्ती रहना पड़ा। 9 अगस्त को बेटे ने किराएदारों के साथ मारपीट की और मकान खाली करने की धमकी दी। उन्होंने जान-माल को खतरा बताते हुए बेटे पर खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस पर अध्यक्ष ने आरोपी बेटे को गिरफ्तार करने के आदेश दिए।
आरोपी को मां के लिए सोने के कुंडल बनवाकर देने के निर्देश भी दिए। पुलिस को नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए हुए कहा कि समाज में ऐसा करने वालों को किसी भी सूरत में नहीं बख्शा जाएगा।
सबूत नहीं देने पर शिकायतकर्ता पर कार्रवाई के आदेश
महेंद्रगढ़ जिला के गांव बैरावास निवासी संजू देवी ने आरोप लगाया कि सरकारी पटवारी सुमलता और गिरदावर बाबूलाल ने मिलकर उसके पति राजवीर को झूठे मामले में फंसाया और इसके बदले 8 लाख रुपए लिए। दावा किया कि उसके पास रिकॉर्डिंग, बैंक लेनदेन, फीस की रसीद और अन्य दस्तावेज हैं। आयोग ने जब शिकायतकर्ता से आरोपों के समर्थन में रिकॉर्डिंग और दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा तो वह इन्हें पेश नहीं कर सकी। इसके बाद चेयरपर्सन ने पुलिस को मामले की जांच करने और शिकायतकर्ता के खिलाफ उचित कार्रवाई के निर्देश दिए।
स्कूल स्टाफ की शिकायत पर डिप्टी डीईओ जवाब नहीं दे पाए
बूढ़पुर के एक विद्यालय के स्टाफ ने स्कूल की शिक्षिका के खिलाफ शिकायत दी थी। मामले में शिक्षा विभाग की ओर से डिप्टी डीईओ को जवाब देने के लिए बुलाया गया लेकिन डिप्टी डीईओ ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। इस पर अध्यक्ष ने नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारी को मौके पर बुलाने के निर्देश दिए। अधिकारी के पहुंचने के बाद दोनों पक्षों ने अपना-अपना पक्ष रखा। अंत में समझौता करा दिया गया।
बेटी से मिलने की अनुमति, जांच अधिकारी भी बदला
पीड़िता अनू यादव ने आयोग के सामने शिकायत की कि उसे अपनी बेटी से मिलने नहीं दिया जा रहा। चेयरपर्सन ने पूरी बात सुनने के बाद उसे एक बार बेटी से मिलने देने के आदेश दिए। शिकायतकर्ता की मांग पर मामले के जांच अधिकारी को भी बदलने के निर्देश दिए गए। सुनवाई के दौरान दो मामलों में शिकायतकर्ता उपस्थित नहीं हुए। वहीं आयोग ने अधिकारियों को महिला संबंधी शिकायतों में गंभीरता से कार्रवाई करने के निर्देश दिए।