रेवाड़ी। महिला समानता दिवस पर साहित्यकार मनोज वशिष्ठ ने कहा कि नारी दया नहीं बल्कि सम्मान और समान अवसरों की अधिकारी है। नारी सृष्टि, चेतना और सृजन का मूल आधार रही है।
उन्होंने कहा कि महिला समानता दिवस केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता के पुनर्मूल्यांकन का अवसर है।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ नारी को शक्ति देना नहीं, बल्कि उसमें पहले से मौजूद क्षमता को स्वीकार करना है। आज महिलाओं को दया नहीं, अधिकार और केवल आरक्षण नहीं, बल्कि समान अवसर की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षित और आत्मनिर्भर नारी परिवार के साथ समाज और राष्ट्र के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नारी के उत्थान के बिना राष्ट्र का समग्र विकास संभव नहीं है।