रेवाड़ी। रेवाड़ी-रोहतक राजमार्ग पर डीघल टोल प्लाजा पार करने के बाद एंबुलेंस रोक कर सड़क के किनारे सात माह की गर्भवती प्रसव पीड़ित साल्हावास निवासी एक महिला रिंकू (29) का प्रसव कराना पड़ा। महिला ने बच्ची को जन्म दिया। जच्चा-बच्चा दोनों रोहतक पीजीआई में उपचाराधीन हैं। स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में 20 दिन के भीतर खुले में प्रसव का यह दूसरा मामला है।
गांव साल्हावास निवासी जोगेंद्र ने बताया कि उनकी पत्नी रिंकू सात माह की गर्भवती थी। 28 अगस्त की रात अचानक पेट में दर्द होने पर वह कोसली के सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे। जांच के बाद चिकित्सकों ने पत्नी को रेवाड़ी नागरिक अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। रात करीब साढ़े 11 बजे वे रेवाड़ी अस्पताल पहुंचे। ड्यूटी पर तैनात महिला चिकित्सक ने जांच के बाद उनकी पत्नी को रोहतक रेफर कर दिया।
जोगेंद्र ने बताया कि एंबुलेंस में उनकी पत्नी के साथ उनकी बहन और एक एलटी मौजूद थे। वह निजी वाहन से उनके साथ जा रहे थे। रेवाड़ी-रोहतक राजमार्ग पर डीघल टोल प्लाजा पार करने के बाद रिंकू की प्रसव पीड़ा बढ़ गई। इसके बाद एंबुलेंस को सड़क किनारे रोककर एलटी ने उसकी बहन की मदद से प्रसव कराया। रिंकू ने सात माह की बच्ची को जन्म दिया।
जोगेंद्र ने बताया कि यदि समय पर उचित उपचार मिलता तो ऐसी स्थिति नहीं बनती। उन्होंने रात के समय सरकारी अस्पतालों में मरीजों को रेफर किए जाने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
8 अगस्त को भी सड़क पर हुआ था प्रसव
इससे पहले 8 अगस्त को कोसली क्षेत्र में भी एक महिला ने सड़क पर प्री-मैच्योर बच्ची को जन्म दिया था। भाकली निवासी महिला की तबीयत बिगड़ने पर उसे कोसली अस्पताल ले जाया गया था, जहां से अल्ट्रासाउंड के लिए रेवाड़ी रेफर किया गया। बाद में घर लौटने के दौरान रात में उसकी तबीयत फिर बिगड़ गई और अस्पताल पहुंचने से पहले ही सड़क पर प्रसव हो गया था।