रेवाड़ी। रामपुरा थाना क्षेत्र के रोलियावास बस स्टैंड के पास मई 2022 में हुए सड़क हादसे में दो लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जोगिंदरी की अदालत ने मामडिया आसमपुर निवासी आरोपी हरि प्रकाश को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि हादसे के समय संबंधित स्कूल वैन आरोपी ही चला रहा था। मामले में शिकायतकर्ता समेत कई महत्वपूर्ण गवाह अदालत में अपने पहले के बयानों से मुकर गए।
3 मई 2022 को रामपुरा थाना पुलिस को सड़क हादसे की सूचना मिली थी। जांच में सामने आया था कि रोलियावास बस स्टैंड के पास तेज रफ्तार स्कूल वैन कार से टकरा गई। हादसे में सोनू और दीपक को गंभीर चोटें आईं। इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई। मित कुमार, अनुज और तनुज घायल हुए थे। हादसे के बाद स्कूल वैन चालक भाग गया था।
मामले में पुलिस ने हरि प्रकाश के खिलाफ धारा 279, 337, 338, 427 और 304-ए के तहत एफआईआर दर्ज कर आरोप पत्र अदालत में पेश किया था।
शिकायतकर्ता कपिल कुमार ने अदालत में बताया था कि 3 मई 2022 को सोनू और दीपक की सड़क हादसे में मौत हुई थी। उसने घटना या आरोपी के संबंध में जानकारी होने से इनकार कर दिया। अदालत में कपिल वाहन चालक की पहचान नहीं कर सका।
सरकारी वकील के अनुरोध पर उसे पक्षद्रोही गवाह घोषित कर जिरह की गई लेकिन अभियोजन को ठोस मदद नहीं मिली।कपिल ने जिरह के दौरान पुलिस को दी गई शिकायत से इनकार किया। उसने कहा कि उसने पुलिस के सामने ऐसी कोई शिकायत नहीं दी थी और पुलिस ने खाली कागजों पर उसके हस्ताक्षर करवाए थे।
छह अन्य गवाह भी नहीं कर सके आरोपी की पहचान
अभियोजन ने मामले में कुल दस गवाह पेश किए। अमित, नीतू, तनुज, करण सिंह, खुशी राम और कुलदीप ने अदालत में अभियोजन के आरोपों का समर्थन नहीं किया। इन गवाहों ने हादसे में अपने परिजनों या परिचितों की मौत की बात तो स्वीकार की, लेकिन आरोपी हरि प्रकाश को हादसे के समय स्कूल वैन चलाने वाले व्यक्ति के रूप में पहचानने से इनकार कर दिया।सरकारी वकील ने इन गवाहों से जिरह कर अभियोजन का पक्ष साबित करने का प्रयास किया लेकिन कोई ऐसा तथ्य सामने नहीं आ सका, जिससे आरोपी की हादसे के समय वाहन चालक के रूप में पहचान स्थापित हो सके।
अदालत ने कहा- आरोपी की पहचान ही साबित नहीं हुई
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि हादसे के समय स्कूल वैन हरि प्रकाश ही चला रहा था। शिकायतकर्ता कपिल कुमार समेत छह महत्वपूर्ण गवाह अदालत में अपने पुलिस बयानों से मुकर गए और पहचान नहीं की। सरकारी वकील की जिरह के बावजूद कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया। अदालत ने कहा कि पहचान साबित नहीं होने पर हरि प्रकाश के खिलाफ तेज गति और लापरवाही से वाहन चलाने का आरोप भी साबित नहीं किया जा सकता। संदेह के आधार पर दोष सिद्ध नहीं हो सकता।