संवाद न्यूज एजेंसी
कोसली। नाहड़ स्थित वन्य प्राणी विहार का एक करोड़ रुपये से कायाकल्प किया जाएगा। करीब 98 एकड़ में चहारदीवार बनाने पर 70 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा 34 लाख रुपये से जंगली जीवों को लिए पेयजल की व्यवस्था की जाएगी।
चहारदीवारी बनाए जाने के बाद वन्य जीवों की सुरक्षा भी चाक चौबंद होगी। लंबे समय से यह कार्य अधूरा पड़ा था। इसके लिए वन विभाग की तरफ से स्टोरेज टैंक का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए पाइपलाइन बिछाई जाएगी। सोलर पैनल ट्यूवेल भी लगाया जाएगा। इस पर करीब 34 लाख रुपये खर्च होंगे। इन दोनों कार्यों को लेकर वन विभाग ने टेंडर भी जारी कर दिया है। इस क्षेत्र की तारबंदी का कार्य वर्षों पूर्व कर दिया गया था, ताकि खतरनाक जीव बाहर जाकर लोगों व पशुओं को अपना शिकार ना बना सके, लेकिन कुछ समय बाद तारबंदी टूटने से अभ्यारण में विचरण करने वाले पशु पक्षी बाहर निकलने लगे थे। इसे देखते हुए वर्ष 2016 में तारबंदी को हटाकर पक्की दीवार बनाने का कार्य शुरू किया गया था। बजट के अभाव में 98 एकड़ जमीन की दीवार बाकी रहने से जीव और अभ्यारण में स्थित पेड़ सुरक्षित नहीं हैं।
1987 में घोषित हुआ था वन्य प्राणी अभ्यारण
वर्ष 1987 में घोषित किया गया नाहड़ वन्य जीव अभ्यारण वन्य जीवों को संरक्षण देने की मिसाल पेश कर रहा है। यह अभ्यारण अरावली क्षेत्र की जैव विविधता को संरक्षण देने में बड़ी भूमिका अदा कर रहा है। कई प्रजाति के वन्य जीव इस अभ्यारण में पल रहे हैं। कोसली रोड स्थित 522 एकड़ एरिया को प्रदेश सरकार ने 30 जनवरी 1987 को अभ्यारण घोषित किया था। इससे पूर्व यह जमीन आरक्षित वन क्षेत्र के दायरे में शामिल थी। अभ्यारण घोषित किए जाने के बाद इसके विकास पर भी पूरा ध्यान दिया जा रहा है। वन्य जीव प्राणी विभाग की ओर से अभ्यारण में वास करने वाले लगभग 250 किस्म के वन्य जीवों के भोजन और पानी की व्यवस्था की गई है।
अभ्यारण में इस समय काला हिरण, नीलगाय, गीदड़, लोमड़ी, सियार आदि वन्य जीव मौजूद हैं। यहां की कई तरह की सांपों की प्रजातियां भी मौजूद हैं। पक्षियों में तोता, उल्लू, मोर, काला तीतर 250 से अधिक स्थानीय व प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां यहां रहती है।
वर्जन:
अभ्यारण में 98 एकड़ की अधूरी चहारदीवारी 70 लाख रुपये से कवर होगी। इसके अलावा जानवरों व पक्षियों के लिए पीने के पानी की समुचित व्यवस्था के लिए 34 लाख का बजट दिया गया है। इस अभ्यारण में हिरण प्रजनन केेंद्र बनाया हुआ है। जहां लुप्त होते काला हिरण की प्रजाति यहां मौजूद है।-ज्योति सिंह, इंस्पेक्टर, वन विभाग