रेवाड़ी। 2019 के एक सड़क दुर्घटना के मामले की सुनवाई ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रदीप कुमार (प्रथम श्रेणी) की कोर्ट में हुई। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी को बरी कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता एफआईआर दर्ज करने में 5 दिनों की देरी का कारण बताने में विफल रहा। उन्होंने कहा कि शिकायत टाइप की गई थी, जबकि शिकायतकर्ता ने गवाही दी कि शिकायत हस्तलिखित थी। जांच अधिकारी ने कहा कि शिकायतकर्ता ने कोई हस्तलिखित शिकायत नहीं दी।
उन्होंने स्वीकार किया कि जांच के दौरान कोई सरकारी गवाह शामिल नहीं किया गया। स्कूटी को कोई नुकसान लिखित में नहीं दिया गया। शिकायत में वाहन की गति का भी उल्लेख नहीं है। अन्य सभी गवाह औपचारिक प्रकृति के हैं और उन्हें वर्तमान दुर्घटना की प्रत्यक्ष जानकारी नहीं है। उपरोक्त चर्चा से यह कहा जा सकता है कि अभियोजन पक्ष अभियुक्त बीरेंद्र के विरुद्ध अपना मामला साबित करने में विफल रहा है। तदनुसार अभियुक्त के विरुद्ध लगाए गए आरोपों से बरी किया जाता है।
ये है पूरा मामला
17 अगस्त 2019 को पुलिस चौकी गढ़ी बोलनी को एक निजी अस्पताल से टेलीफोन पर सूचना प्राप्त हुई कि सोनम यादव और विनोद सड़क किनारे हुई दुर्घटना में घायल हो गए हैं। इस सूचना पर पुलिस टीम अस्पताल पहुंची और विनोद कुमारी की एमएलआर प्राप्त हुई जिसमें फ्रैक्चर का उल्लेख था। सोनम की एमएलआर में डॉक्टर ने उसे बयान के लिए अयोग्य बताया।
19 अगस्त 2019 को घायल सोनम ने लिखित शिकायत प्रस्तुत की। बताया कि 14 अगस्त 2019 को दोपहर लगभग 2:30 बजे वह अपनी मां विनोद के साथ स्कूटी पर किसी निजी काम से रेवाड़ी जा रही थीं और जब वे अपने गांव से लगभग 600 मीटर आगे एक स्कूल के पास पहुंची तो उनके गांव की ओर से एक ब्रेजा कार तेज गति, लापरवाही से आती हुई, स्कूटी में पीछे से टक्कर मार दी जिससे उसे और उसकी मां को काफी चोटें आईं।
लोग इकट्ठा हो गए। चालक ने अपना नाम बीरेंद्र बताया। उनकी स्कूटी भी क्षतिग्रस्त हो गई। ड्राइवर के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई। ड्राइवर ने अस्पताल का सारा खर्च उठाने का वादा किया था, लेकिन फिर कार के ड्राइवर ने अस्पताल का खर्च उठाने या समझौता करने से इनकार कर दिया। इसलिए यह शिकायत दर्ज की गई। इस शिकायत पर मामला दर्ज किया गया।
घटनास्थल का निरीक्षण किया गया। साइट का रफ प्लान तैयार किया गया। गवाहों के बयान दर्ज किए गए। दुर्घटनाग्रस्त वाहन ब्रेज़ा के मालिक को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 133 के तहत नोटिस जारी किया गया। उसने लिखित में बताया कि 17 अगस्त 2019 को बीरेंद्र उसकी कार का ड्राइवर था। 29 अगस्त 2019 को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। दुर्घटनाग्रस्त वाहन को दस्तावेजों सहित पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया। जांच पूरी होने के बाद चालान तैयार कर अदालत में पेश किया गया।