रेवाड़ी। अरावली वन क्षेत्र जैव विविधता का एक बड़ा केंद्र बन रहा है। इसकी गोद में पक्षियों का कुनबा तेजी से बढ़ रहा है। अब यहां ऐसी पक्षियों की प्रजातियां देखने के लिए मिल रही हैं, जिनके बारे में यह कहा जाता था कि ये राज्य विशेष में ही मिलती हैं।
अरावली पहाड़ी की गोद में बसे गांव पाड़ला, अहरोद, बासदूधा, खोल, मनेठी, भालखी, माजरा, नांधा, बलवाड़ी व खालेटा के जंगल आपस में जुड़े हुए हैं। इन दस गांवों का जंगल बहुत घना है। यहां का वातावरण न सिर्फ पेड़-पौधों के लिए, बल्कि जीव-जंतुओं के लिए भी अनुकूल है। इन घने जंगलों में पक्षियों की बहुत सी ऐसी प्रजातियां देखने के लिए मिल रही हैं जो पहले कभी नजर नहीं आईं। कुछ पक्षी प्रेमी जब इन जंगलों में घुसे तो उनको वहां पर व्हाइट नेप्ड टिट और शार्ट टेड स्नेक ईगल जैसे पक्षी दिखाई दिए। व्हाइट नेप्ड टिट को लेकर अभी तक धारणा थी कि यह पूरी दुनिया में सिर्फ आंध्र प्रदेश, राजस्थान व गुजरात के एक दो क्षेत्र में ही दिखाई देते हैं। लेकिन अब इनकी यहां अरावली वन क्षेत्र में मौजूदगी चौंकाने वाली है। इसके अतिरिक्त जिस स्पाटेड ट्री क्रीपर को देखने के लिए पक्षी प्रेमी उत्तराखंड जाया करते थे उसकी भी मौजूदगी इस जंगल में मिली है।
शार्ट टेड स्नैक ईगल भी मिला
शार्ट टेड स्नैक ईगल जो अपने चूजों को भी केवल सांप मारकर खिलाता है, के घोंसले और चूजे यहां पहाड़ की सबसे ऊंची चोटी पर देखने के लिए मिले हैं। पर्यावरणविदों की माने तो इन पक्षियों का यहां मिलना स्पष्ट संकेत दे रहा है कि इस जंगल का वातावरण उनके अनुकूल है और यहां पारिस्थितिकी तंत्र भी धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है।
पक्षियों की लगभग 300 अन्य प्रजातियां मौजूद
इस वन क्षेत्र में चार तरह की कोयल, पेंटेड सैण्डग्राउज, कठफोड़ा की चार प्रजातियां, बंटिंग की प्रजातियां जैसे क्रस्टेड बंटिंग, राक बंटिंग, स्टीरियो लेटेड बंटिंग के अलावा व्हाइट बैलीज मिनीवेट, स्पाटेड उल्लू, स्पाटेड ट्री कीपर, राक ईगल आउल, भारतीय स्कूप्ड उल्लू, मलकोवा, सल्फर बेलीड वारब्लग सहित पक्षियों की लगभग 300 अन्य प्रजातियां भी मौजूद हैं।
अरावली क्षेत्र में पक्षियों की ऐसी प्रजातियां मिलना काबिलेतारीफ
वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञ राकेश अहलावत ने कहा कि अरावली क्षेत्र में पक्षियों की ऐसी प्रजातियां देखने को मिली हैं जो पहले भारत के एक-दो हिस्सों में ही दिखाई देती थीं। अरावली में अच्छा वन क्षेत्र है। भविष्य में भी इसको संरक्षित रखने का पूरा प्रयास किया जाएगा। यहां जल से लेकर पेड़-पौधों व जीव-जंतुओं के संरक्षण के लिए काम किया जा रहा है।