रेवाड़ी। जिले में पंचायत चुनाव की बयार चल चुकी है। चुनाव की घोषणा होते ही गांवों में उम्मीदवार कुकुरमुत्ते की तरह सामने आ रहे हैं। हर घर और चौपाल पर अपनी दस्तक देकर राजनीतिक माहौल बना रहे हैं। साथ ही वोट के अलंबदारों के यहां नतमस्तक हो रहे हैं। इनमें कई उम्मीदवार ऐसे भी हैं, जिनके के वार्ड आरक्षित हो गए हैं। इससे उनकी सारी तैयारियां धरी की धरी रह गईं हैं। वहीं, कई उम्मीदवार पाला बदलकर दूसरे वार्ड में जाकर चुनाव लड़ने के लिए मतदाताओं से भाईचारा और रिश्ता जोड़ रहे हैं। साथ ही अब वे उनके पैर में धोक खा रहे हैं। साथ ही पूछ रहे हैं कि ‘के सेवा करु भाई तेरी’। ऐसे पाला बदलने वाले उम्मीदवारों का मतदाता भी जमकर मजे ले रहे हैं। उनका कहना है कि ‘जब अपने वार्ड में कुछ नहीं कर सकता तो म्हारे में के करेगा’ ।
सोशल मीडिया में भी चुनावी शोर सुनाई दे रहा है। इस दौरान व्हाट्सएप पर भी मैसेज का दौर जारी है। व्हाट्सएप पर आए मैसेज में एक व्यक्ति कहता है कि ‘पहले कोई राम-राम भी नहीं करता था, अब सीधे पैर में धोक खा रहे हैं। दूसरा बोलता है भाई टैम-टैम की बात से, जो आज इतनी पूछ हो रही है। इब तो भावी उम्मीदवार आते ही यू पूछ से की ‘के सेवा करु भाई तेरी’। गांवों में तो शराब पीने वाले लोगों ने अपनी पसंद की शराब भी लेनी शुरू कर दी है। पहले उन्हें कोई पूछता भी नहीं, अब गली में पड़े न भी शराब दे रहे हैं।
‘बाहर का तो बाहर का ही रहता है...’
जिला परिषद के उम्मीदवारों की चर्चा जोरों पर है। दरअसल किसी भावी उम्मीदवार का वार्ड महिला आरक्षित हो गया तो वह दूसरे वार्ड में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। लोगों में चर्चा है कि वे अपने ही वार्ड के उम्मीदवार को वोट देंगे। बाहर का तो बाहर का ही रहता है। जिप प्रमुख का पद सामान्य वर्ग का होने से अधिकतर उम्मीदवार अपनी दावेदारी जता रहे हैं। चुनाव में नतीजे कुछ भी हो लेकर अब कुछ उम्मीदवारों का जीतना ही नाक का सवाल बना हुआ है।
सभी को अपने कुनबे की वोट देने और दिलाने की भर रहे हामी
कुछ गांवों में आरक्षित सीट होने से कई उम्मीदवार के अरमान धरे रहे गए हैं। अब उनका समय सारा दिन खाली बैठकर और तमाशा देखने में बीत रहा है। इस दौरान जो भी भावी उम्मीदवार उनके पास आता है तो वह उसे वोट देने और अपने कुनबे की वोट दिलाने की हामी भर रहे हैं। किसी को मना नहीं कर रहे हैं।