रेवाड़ी। शहर की पौने तीन लाख की आबादी इन दिनों पानी की किल्लत से जूझ रही है। पिछले 14 दिनों से जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है। ऐसे में लोगों को पीने के पानी की परेशानी हो रही है। खुद का कैंपर खरीदकर लोगों को पानी पीना पड़ रहा है। 25 जनवरी को नहर में पानी आना बंद हुआ था। विभाग के अधिकारियों के अनुसार खूबडू हैड से 15 फरवरी को पानी छोड़ दिया जाएगा जिसके बाद 17 की रात तक रेवाड़ी में नहर के माध्यम से पानी पहुंच जाएगा। इसके बाद गांव कालाका व लिसान में बने वाटर टैंकों में भंडारण शुरू कर दिया जाएगा, जिसके बाद 18 फरवरी से शहर में पेयजल आपूर्ति सुचारू हो जाएगी। पानी की राशनिंग से जूझ रहे शहरवासियों को पानी की प्रतिदिन सप्लाई के लिए अब 10 दिनों का इंतजार और करना पड़ेगा।
चार साल से संकट बरकरार
शहर में पेयजल राशनिंग करीब चार साल से चल रही है। नहरी पानी का शेड्यूल पहले 16-16 दिन का था। यानी 16 दिन नहर में पानी आता था और 16 दिन नहर बंद रहती थी। अब 2 साल से शेड्यूल 16-24 का हो गया है। अब 16 दिन नहर में पानी आता है और 24 दिन बंद रहता है। पिछले माह 25 जनवरी को नहरी में पानी आना बंद हुआ था। ऐसे में जनस्वास्थ्य विभाग के पास अब इतनी स्टोरेज क्षमता नहीं है कि शहर वासियों को हर दिन पेयजल सप्लाई दी जा सके, इसलिए हर माह पेयजल राशनिंग की जाती है।
नहरी पानी पर आधारित है जीवन
शहर में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था नहरी पानी पर आधारित है। नहर के पानी को कालाका और लिसाना में बने वाटर टैंक में स्टोर किया जाता है। वहां से बूस्टिंग स्टेशन के माध्यम से शहर में पानी की आपूर्ति होती है। कालाका जलघर में बनाए गए 5 वाटर टैंकों से शहर के 70 फीसदी हिस्से में पेयजल आपूर्ति होती है। वहीं, लिसाना स्थित जलघर के तीन वाटर टैंकों से 30 फीसदी भाग में पानी सप्लाई होता है। दोनों जलघरों से पूरे शहर को 15 से 20 दिन ही पानी आपूर्ति हो सकती है। 25 जनवरी को नहर में पानी बंद हुआ था, जिसके 17 जनवरी को आने की संभावना है।
नहर में पानी आने का शेड्यूल जारी हो चुका है। खूबडू हैड से 15 फरवरी को पानी छोड़ दिया जाएगा। जो 17 फरवरी को पहुंचेगा। टैंकों में केवल 10 दिनों का शेष पानी बचा है। ऐसे में लोगों को पानी व्यर्थ नहीं बहाना चाहिए।
-दीपक यादव, कनिष्ठ अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग रेवाड़ी