संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। खुबड़ू हेड से मंगलवार को दोपहर 2 बजे जेएलएन नहर में पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई। ऐसे में अब पानी का संकट गहरा जाएगा। 2 मई से पानी की राशनिंग की जा रही है। 12 मई तक एक दिन छोड़कर का जलापूर्ति की जाएगी। इस बीच अगर नहर में पानी नहीं छोड़ा गया तो 12 मई के बाद दो दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति की जाएगी जिससे लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
अभी तक वाटर टैंकों में 80 प्रतिशत तक पानी भरा जा चुका है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए जन स्वास्थ्य विभाग और सिंचाई विभाग के अधिकारी लगातार बड़े अधिकारियों के संपर्क में हैं, ताकि रेवाड़ी को पानी मिल सके। अभी जितना पानी टैंकों में भरा गया है, उससे 10 दिन तक तो आपूर्ति जैसे तैसे की जा सकती है। उसके बाद स्थिति गंभीर हो सकती है। जेएलएन नहर में 1 मई को पानी आया था। इसके बाद आगे से पानी कम छोड़ने की वजह से नहर में केवल 8 दिन ही पानी चल पाया जिससे वाटर टैंक पूरी तरह से नहीं भर पाए हैं।
इससे पहले जब नहर में पानी आता था तो 16 दिन तक नहर चलती थी और वाटर टैंकों को भरा जाता था। इस बार पानी की कटौती ने पूरा शेड्यूल बिगड़ गया है। यदि आगे से नहर में पानी नहीं छोड़ा गया तो जनस्वास्थ्य विभाग 10 दिनों के बाद पूरे शहर में दो दिन छोड़कर पानी देगा। ऐसे में लोगों को पानी की समस्या से जूझना पड़ सकता है। जलसंकट को देखते हुए हरियाणा सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि हरियाणा के हिस्सा का पानी पंजाब सरकार उन्हें दे दे लेकिन अभी तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। पंजाब सरकार ने भाखड़ा डैम का पानी रोका है।
अधिकारियों ने की अतिरिक्त पानी की मांग
जिले के लिए 600 क्यूसेक पानी निर्धारित है। जब स्थिति ठीक थी तो 400 से 450 क्यूसेक तक पानी मिलता था। इसका औसतन 300 क्यूसेक तक पहुंच जाता है लेकिन इस बार पीछे से ही पानी नहर में 150 क्यूसेक छोड़ा गया था। रेवाड़ी के हिस्से के पानी में आधी कटौती की गई है। यही कारण है कि नहर में पानी जल्द खत्म हो गया। जन स्वास्थ्य विभाग व सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लगातार बड़े अधिकारियों के संपर्क में हैं। वह अतिरिक्त पानी मांग कर रहे हैं लेकिन कोई स्पष्ट जानकारी नहीं आ रही है। जलसंकट को देखते हुए ठोस कदम उठाए गए हैं। अगर कोई पानी को बर्बादी करेगा तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा।
वर्जन
मंगलवार को दोपहर 2 बजे के बाद नहर में पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई। करीब 80 प्रतिशत तक वाटर टैंकों को भरा जा चुका है। बड़े अधिकरारियों के संपर्क में हैं, ताकि रेवाड़ी को जल्द पानी मिल सके। - हेमंत, जेई, जन स्वास्थ्य विभाग