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Rewari News: साहबी बैराज का पानी बना आफत...खलियावास में बाढ़ जैसे हालात, 200 एकड़ खेत डूबा

Mon, 10 Aug 2026 12:16 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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खलियावास में बने बाढ़ जैसे हालात। संवाद
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धारूहेड़ा। साहबी बैराज में भरा प्रदूषित पानी अब आसपास के गांवों के लिए आफत बन गया है। लगातार हुई बारिश से बैराज का जलस्तर बढ़ गया है जिससे ओवरफ्लो हुआ पानी आसपास के खेतों में फैल गया है। खलियावास गांव में बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। 24 घंटे में करीब 200 एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई है।
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पानी खेतों की मेड़ को पार कर गांव की मुख्य सड़क पर पहुंच गया है। ग्रामीणों को अब गांव में पानी घुसने का डर सताने लगा है। गांव को बचाने के लिए ग्रामीणों को खुद खलियावास-तितरपुर मुख्य रास्ते को खोदकर पानी का बहाव मोड़ना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से समय रहते जलनिकासी की व्यवस्था नहीं की गई, जिसके चलते उन्हें अपने स्तर पर यह कदम उठाना पड़ा।
ग्रामीणों ने कहा कि यदि अगले एक-दो दिनों में फिर तेज बारिश होती है तो खेतों में भरा पानी का दबाव बढ़ सकता है और पानी गांव की आबादी की ओर तेजी से बढ़ सकता है।
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ग्रामीणों का आरोप है कि साहबी बैराज में पहले से बड़ी मात्रा में पानी भरा है। बारिश के दौरान अतिरिक्त पानी आने और रेवाड़ी के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों से लगातार ज्यादा आने वाले पानी के कारण स्थिति और गंभीर हो जाती है। ऐसे में बैराज की क्षमता और जल निकासी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
जलभराव अब केवल कृषि भूमि तक सीमित नहीं रहा। इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय की ओर भी पानी बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय तक जाने वाले मार्ग पर पानी पहुंचने से सड़क के ऊपर से पानी बहने की स्थिति बन रही है।
ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि मौके पर तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों की टीम भेजी जाए। जलस्तर की निगरानी के साथ पंप लगाकर पानी की निकासी कराई जाए और गांवों की आबादी तथा मुख्य रास्तों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही साहबी बैराज और आसपास के क्षेत्र की स्थायी जल निकासी योजना तैयार की जाए। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों से आने वाले पानी की भी जांच कराई जाए।

हर साल डूबती है फसल, फिर स्थायी समाधान क्यों नहीं?
खलियावास के ग्रामीण राहुल, बीरसिंह, मोतीलाल ने कहा कि यह कोई पहली बार नहीं है जब खेतों में पानी भरा हो। पिछले कई वर्षों से बारिश के दौरान क्षेत्र में जलभराव की समस्या सामने आती रही है। किसानों की फसलें बर्बाद होती हैं, लेकिन समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार फसल खराब होने के बाद प्रभावित किसानों को पर्याप्त मुआवजा भी नहीं मिल रहा। ऐसे में किसानों के सामने दोहरी मार है। एक तरफ फसल बर्बाद हो रही है और दूसरी तरफ जलभराव की समस्या हर साल पैदा हो रही है।

प्रदूषित पानी का भी बड़ा खतरा
साहबी क्षेत्र में जमा पानी को लेकर पर्यावरणीय चिंता भी बढ़ गई है। राजकुमार, बबलू और प्रवीण का कहना है कि यदि प्रदूषित पानी खेतों में लंबे समय तक जमा रहता है तो इसका कृषि भूमि और भूजल पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में केवल पानी निकाल देना पर्याप्त नहीं होगा। प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना होगा कि बैराज में पानी का स्रोत क्या है, कितना पानी आ रहा है, पानी की निकासी की क्षमता कितनी है और प्रदूषित पानी को नियंत्रित तरीके से कहां ले जाया जाएगा।
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