बावल। कस्बे में वर्ष 1826 में बना ऐतिहासिक रामसरोवर तालाब शासन और प्रशासन की अनदेखी के कारण अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। लोगों का कहना है कि रामसरोवर तालाब को बचाने के लिए नहर से जोड़ना चाहिए।
महेंद्र गोवर्धन ने बताया कि 20 लाख रुपये मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कृषि विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में रामसरोवर के बाउंड्रीवाल के लिए दिए थे। 10 लाख रुपये डी प्लान से मिले और 15 लाख रुपये सांसद राव इंद्रजीत ने बाउंड्रीवाल के लिए दिए। इससे तालाब की चहारदीवारी तो तैयार हो चुकी है, लेकिन नहर से जोड़कर पानी पहुंचाने और समतलीकरण का कार्य अभी अधूरा है। यह तालाब प्राचीन समय से ही स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र और धरोहर के रूप में जाना जाता है। सरकार की अमृत जलधारा योजना भी इस तालाब में पानी नहीं पहुंचा सकी है। पुजारी भक्तराम ने बताया कि इस तालाब ने खंड और जिला स्तरीय तैराक दिए हैं। आवारा पशुओं के पानी पीने का एकमात्र स्थान रहा है। नाभा रियासत के समय राजा हीरा सिंह भी यहां आते रहे हैं। ग्रामीण अजीत, उपेंद्र, नरेश ने कहा कि नहर से जोड़कर तालाब में पानी भरा जाए, ताकि तालाब के अस्तित्व को बचाया जा सके।
सोमवार को अधिकारियों से बात करके नहर से जोहड़ को जोड़ दिया जाएगा। प्रशासन किसी भी ऐतिहासिक धरोहर को संजोए रखना चाहता है।- संजीव कुमार, एसडीएम, बावल।