जागो रे मतदाता जागो, आया चुनाव का मेला है।
गली-गली में झंडे लहराते, द्वारे-द्वारे नेता आते।
झुक-झुक कर वो शीश नवाते, मधुर वचनों के जाल बिछाते
नशा, नोट और लोभ के आगे, जो अपना ईमान न त्यागे।
वही नगर का रक्षक होगा, जिसके भीतर संयम जागे
सत्य-धर्म की राह न छोड़ो, चाहे समय झमेला है।
वोट तुम्हारा भाग्य विधाता, ये शक्ति का रेला है
रेवाड़ी की वीर-धरा का, तुमको मान बढ़ाना है।
धारूहेड़ा के विकास का, सुंदर स्वप्न सजाना है
सड़क, नाली और स्वच्छ हवा का, जो संकल्प उठाए।
बिना भेदभाव के जो जन-जन को, गले से आज लगाए
भीड़ बहुत है झूठे जग में, पर तू आज अकेला है।
वोट तुम्हारा भाग्य विधाता, ये शक्ति का रेला है
डिग्री से जो बड़ा मानिए, वह चरित्र ही गहना है।
साफ-सुथरी छवि वाले के, साथ सदा ही रहना है
वशिष्ठ मनोज की लेखनी कहती, यह अधिकार तुम्हारा है।
नगर-सभा के इस आंगन में, गूंजे जय-जयकारा है
लोकतंत्र की पूजा कर लें, पांच साल का खेला है।
जागो रे मतदाता जागो, आया चुनाव का मेला है।
कवि:
मनोज वशिष्ठ, शिक्षाविद साहित्यकार, विकास नगर