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हम रेवाड़ीवासी हैं, रेवाड़ी में ही रहेंगे.

Fri, 23 Sep 2016 01:18 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला
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विरोध जताते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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रेवाड़ी हमारी जान है, यहां हमारा दिल बसता है। हम रेवाड़ी से दूर नहीं हो सकते। ऐसे ही कुछ नारे वीरवार को जिला सचिवालय में बव्वा गांव के बड़े-बुजुर्ग लगाते दिखाई दिए। ग्रामीणों ने उनके गांव बव्वा को हाल ही में प्रदेश सरकार द्वारा हरियाणा का 22वां जिला घोषित चरखी-दादरी में शामिल किए जाने की संभावना के विरोध में डीसी के नाम ज्ञापन सौंपा।
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डीसी की अनुपस्थिति में ऑफिस कर्मियों ने शिकायत स्वीकार कर जिला उपायुक्त तक पहुंचाने की बात कही। ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो पूरा गांव एकजुट होकर चुनाव से लेकर सभी सामाजिक गतिविधियों का बहिष्कार करेगा, लेकिन चरखी-दादरी को कभी अपने जिले के रूप में स्वीकार नहीं करेगा। चरखी दादरी में बव्वा गांव के अलावा बहाला,नया गांव जाटोंवाला जौलरी व खुर्शीद नगर को शामिल किए जाने की संभावना है।

सरंपच संजोग देवी ने बताया कि ग्राम पंचायत ने गांव को चरखी-दादरी में शामिल किए जाने की संभावना के विरोध में सर्वसम्मति से प्रस्ताव भी पास किया है। वहीं उन्होंने मुख्यमंत्री से भी गांव को रेवाड़ी जिले के अंतर्गत बने रहने की गुहार लगाई है। ज्ञापन सौंपने आए ग्रामीणों में इस फैसले को लेकर भारी विरोध था। ग्रामीणों का कहना था कि उनकी सभी मूलभूत सुविधाएं रेवाड़ी से जुड़ी हैं और यहां से ही पूरी होती है। अब जिला बदलते ही सब कुछ उथल-पुथल हो जाएगा। वहीं चरखी-दादरी क्षेत्र से उनकी बोली, पहनावा, रहन-सहन तथा रीत-रिवाज बिल्कुल अलग है। उनका अस्तित्व रेवाड़ी से शुरू होता है और अचानक से किसी अन्य जिले में शामिल करके उनके साथ अन्याय किया जा रहा है।
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वर्जन:
हम अहीरवाल क्षेत्र में पैदा हुए और यहीं बड़े हुए। अब हमें अचानक से किसी अन्य जिले के साथ जोड़ने का फैसला ले लिया जाता है। जबकि हमारे तौर-तरीके और रहन-सहन इस क्षेत्र से बिल्कुल अलग है। ऐसा लगता है जैसे कि एक बेटे को मां से अलग किया जा रहा है।
बिहारीलाल, ग्रामीण
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रेवाड़ी से हमारा गांव नजदीक है। ग्राम पंचायत का सारा रिकॉर्ड नाहड़ खंड कार्यालय में है। बीडीपीओ कार्यालय भी गांव के समीप होने से ग्रामीणों को सुविधा है।
धर्मसिंह, ग्रामीण
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हम रेवाड़ी जिले के वासी हैं और इसी के रहेंगे। हमारा चरखी-दादरी क्षेत्र व इसके अंतर्गत आने वाले गांवों से कभी कोई वास्ता नहीं रहा। हमारा इस क्षेत्र से मेल भी नहीं खाता है।
रघुबीर सिंह, ग्रामीण

गांव की रिश्तेदारी, जान-पहचान रेवाड़ी जिले के गांवों से हे। चरखी-दादरी क्षेत्र की तरफ हमारा कोई आना-जाना ही है। वहीं गांव से रेवाड़ी के लिए बेहतर परिवहन व्यवस्था भी है। दूसरी चरखी-दादरी बिल्कुल ऑफ रूट है और ना ही इधर जाने के लिए उपयुक्त साधन हैं।
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फूला सिंह, ग्रामीण
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